शेयर बाजार में आज फिर गिरावट, निफ्टी ने तोड़ा 26000 का अहम लेवल, IT, मिडकैप, स्मालकैप सब पिटे
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Why share market is down : विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकलना, अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों की हलचल, इन सबका असर भारतीय शेयर बाजार पर एक साथ दिखाई दिया.

Why share market is down : सुबह जैसे ही शेयर बाजार खुला, निवेशकों के चेहरे पर थोड़ी चिंता साफ नजर आई. कई लोग यह सोच रहे हैं कि आखिर बाजार कमजोर क्यों दिख रहा है? वजह सिर्फ एक नहीं थी, बल्कि विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकलना, अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों की हलचल, इन सबका असर भारतीय शेयर बाजार पर एक साथ दिखाई दिया.
गुरुवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली. लगभग 11:56 बजे तक सेंसेक्स करीब 460.37 अंकों की कमजोरी के साथ नीचे आया, जबकि निफ्टी भी लगभग 179.75 अंक फिसल गया. इस वक्त सेंसेक्स 84500.77 पर था, जबकि निफ्टी50 26,000 का अहम लेवल तोड़कर 25961 पर आ चुका था. आईटी और ऑटो सेक्टर की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ज्यादा रही. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एशियन पेंट्स, मारुति, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयर दबाव में दिखे.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बड़ी वजह
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से आया. आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए. इसके उलट घरेलू निवेशकों ने अच्छी मात्रा में खरीदारी की, लेकिन वह विदेशी बिकवाली के असर को पूरी तरह संतुलित नहीं कर सकी. जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं, तो बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है और निवेशकों का भरोसा भी थोड़ा कमजोर पड़ता है.
आर्थिक स्थिति ठीक, लेकिन ट्रेड डील में देरी
आर्थिक मोर्चे पर हालांकि तस्वीर उतनी खराब नहीं है जितनी बाजार में दिखाई दे रही है. सरकार के ताजा अनुमान बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था करीब 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है. यह दर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज मानी जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के शुरुआती अनुमानों से भी यह आंकड़ा बेहतर है. विशेषज्ञ मानते हैं कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा तुरंत वापस नहीं आ पा रहा है.
निवेशकों के लिए क्या संदेश
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विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी स्तर पर बाजार कुछ अहम सपोर्ट लेवल पर टिका हुआ है, लेकिन ऊपर की ओर मजबूत रेजिस्टेंस भी हैं. साथ ही वैश्विक तनाव, व्यापार से जुड़ी चिंताएं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मिलकर माहौल को खराब बनाए हुए हैं. एशियाई बाजारों की बात करें तो कहीं तेजी दिखी तो कहीं कमजोरी रही. अमेरिका के बाजार भी पिछले सत्र में ज्यादातर नीचे बंद हुए. कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त जरूर देखी गई, लेकिन उसका सीधा असर फिलहाल बाजार को सहारा देने वाला नहीं रहा.
कुल मिलाकर, बाजार की मौजूदा चाल यह संकेत देती है कि निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय धैर्य रखना चाहिए. अर्थव्यवस्था की मजबूती एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक हालात और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा. आम निवेशक के लिए जरूरी है कि वह खबरों को समझकर सोच-समझकर निवेश करे और अफवाहों या तात्कालिक उतार-चढ़ाव से घबराए नहीं.
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Malkhan Singh
मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे ...और पढ़ें
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