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इस देश में बना दुनिया का सबसे छोटा सोने का सिक्का, जानिए इसकी खासियत

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Updated: January 24, 2020, 4:12 PM IST
इस देश में बना दुनिया का सबसे छोटा सोने का सिक्का, जानिए इसकी खासियत
दुनिया का सबसे छोटे सोने का सिक्का

स्विट्जलरलैंड के सरकारी टकसाल में दुनिया का सबसे छोटा सोने का सिक्का बनाया गया है. यह सिक्का इतना छोटा है कि इसे देखने के लिए आपको मैग्निफाइं​ग ग्लास की मदद पड़ेगी.

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  • Last Updated: January 24, 2020, 4:12 PM IST
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बर्लिन. स्विट्जरलैंड (Switzerland) के टकसाल में दुनिया का सबसे छोटा सोने का सिक्का बनाया गया है. ये सिक्का इतना छोटा है कि इसे देखने के लिए आपको मैग्निफाइंग ग्लास (Magnifying Glass) की जरूरत पड़ेगी. इस सिक्के पर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) की तस्वीर है, जिसमें वो अपनी जीभ बाहर निकाले हुए हैं. बीते गुरुवार को स्विट्जरलैंड के सरकारी टकसाल ने इसके बारे में जानकारी दी. बताया गया है कि यह दुनिया का सबसे छोटा सिक्का है.

क्या है इस सिक्के की खासियत
सोने का यह सिक्का 2.96 मिलीमीटर यानी 0.12 इंच का है, जिसका वजन एक आउंस का 500वां हिस्सा है. ग्राम के हिसाब से यह 0.063 ग्राम का है. इस खास सिक्का की वैल्यू स्विस फ्रैंक का एक चौथाई यानी 0.26 डॉलर ही है, जिसे आऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकता है.

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कितनी है एक सिक्के की कीमतस्विसमिंट के मुताबिक, ऐसे केवल 999 सिक्के ही बनाए गए हैं, जिसको खरीदने के लिए 199 फ्रैंक खर्च करना होगा. अगर रुपये में कीमत की बात करें तो ये करीब 14,624 रुपये होगी. इस सिक्के के साथ लोगों को मैग्निफाइंग ग्लास भी दिया जाएगा ताकि वो इस पर बनाए गए आइंस्टीन की तस्वीर को देख सकें.

सिक्के पर क्यों है आइंस्टीन की तस्वीर
साल 1879 में दक्षिणी जर्मनी में पैदा हुए अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1905 में E=mc² फॉर्म्यूले का खोज किया था. आसान शब्दों में इसका मतलब समझें तो किसी भी वस्तु की उर्जा के बारे में पता करने के लिए यह फॉर्म्युला मदद करता है. इस फॉर्म्यूले के अनुसार, वस्तु के मास या वज़न (m) को प्रकाश की गति (c) के वर्ग या एस्कवायर से गुना करना पड़ेगा.

प्रकाश की गति है 300,000,000 मीटर्स प्रति सेकेंड होती है. स्विसमिंट ने कहा कि उसने दुनिया के इस सबसे छोटे सिक्के को बनाने के लिए इतनी ही सटीकता को अपनाया है. आइंस्टीन ने स्विट्जरलैंड में भी कुछ समय बिताया था और उनके पास स्विट्जरलैंड की नागरिकता भी थी. साल 1903 से 1905 के बीच वो यहां की राजधानी बर्न में बिताया था, जहां उन्होंने रिलेटीविटी की थ्योरी की खोज किया था.

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First published: January 24, 2020, 3:52 PM IST
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