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बेटी ने पूरा किया मां का सपना, 5 दिन में 5 नौकरियों में पाई सफलता, अब बनी अफसर

मां ने छोड़ा सपना, तो बेटी ने किया पूरा, 5 दिन में 5 नौकरियों में पाई सफलता, अब बनी अफसर

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टीनू सिंह के पिता मुन्ना कुमार सिंह सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर है, जबकि मां पिंकी सिंह गृहिणी हैं. पिंकी सिंह अंग्रेजी में मास्टर की डिग्री और बीएड की डिग्री प्राप्त कर चुकी है. टीनू ने बताया कि उनकी मां बीपीएससी की अधिकारी बनना चाहती थी. मां के सपने को बेटी टीनू ने साकार किया और एक साथ पांच प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल कर अफसर बन गई.

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गुलशन कश्यप/जमुई. मां का सपना था कि बेटी बीपीएससी की पढ़ाई पूरी कर सरकारी अफसर बने, लेकिन बच्चों की परवरिश के आगे मां ने अपने सपनों को त्याग दिया. बच्चों के पालन-पोषण के लिए उन्होंने घर पर ही रहने की जिम्मेदारी उठाई और अपना सपना छोड़ दिया. लेकिन अब उस मां की बेटी ने सपनों को पूरा करने की जिद में कुछ ऐसा कर दिया है कि उसकी चारों तरफ सराहना होने लगी है.

एक बेटी ने अपनी मां के सपनों को पूरा करने के लिए एक या दो नहीं बल्कि एक साथ पांच प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर ली और बिहार सरकार की अफसर बिटिया बन गई. यह कहानी है जमुई जिला मुख्यालय के रहने वाले मुन्ना कुमार सिंह और पिंकी सिंह की बेटी टीनू सिंह की. जिसने एक या दो नहीं बल्कि पांच अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में एक साथ सफलता हासिल की है.
अफसर बन मां सपना किया पूरा
टीनू सिंह के पिता मुन्ना कुमार सिंह सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर है, जबकि मां पिंकी सिंह गृहिणी हैं. पिंकी सिंह अंग्रेजी में मास्टर की डिग्री और बीएड की डिग्री प्राप्त कर चुकी है. टीनू ने बताया कि उनकी मां बीपीएससी की अधिकारी बनना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. उन्होंने अपने बच्चों के पालन- पोषण के लिए अपने सपनों की तिलांजलि दे दी. लेकिन टीनू ने दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में पांच उपलब्धियां हासिल की. 
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माता-पिता को दिया श्रेय
22 दिसंबर को उसका चयन कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर किया गया था. उसके ठीक अगले दिन 23 दिसंबर को बिहार एसएससी के द्वारा आयोजित सीजीएल की परीक्षा में सफल होकर टीनू ने सहायक प्रशाखा पदाधिकारी का पद हासिल कर लिया. इसके बाद बीपीएससी के द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा के 6 से 8 संवर्ग में भी टीनू ने सफलता हासिल की. बीपीएससी के द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा के माध्यमिक विद्यालय 9 से 10 संवर्ग और उच्च माध्यमिक 11 से 12 संवर्ग के लिए भी टीनू ने सफलता हासिल की. टीनू ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता भाई और अपने मामा को दिया है.
 सोशल मीडिया को नहीं लगाया हाथ
टीनू ने बताया कि जहां आज के समय में ज्यादातर युवा सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहते हैं,लेकिन वह कभी भी सोशल मीडिया पर नहीं गई है. किसी भी सोशल मीडिया पर उसका कोई अकाउंट नहीं है और उसने सोशल मीडिया को हाथ नहीं लगाया है. उसने बताया कि मैंने किताबों से दोस्ती कर ली. इंसान का सबसे बेहतरीन दोस्त किताब होता है और लगातार पढ़ाई करने के बाद उसने सफलता हासिल की है. टीनू के माता-पिता ने भी कहा कि उन्हें हमेशा से लगता था कि उनकी बेटी कुछ ना कुछ जरूर करेगी. हालांकि, टीनू का सपना अभी भी पूरा नहीं हुआ है, वह आगे यूपीएससी की पढ़ाई कर भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी बनना चाहती है. टीनू की सफलता पर परिवार सहित आस पड़ोस में हर्ष का माहौल है.
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