Unique Punishment: इस मेडिकल कॉलेज में अनोखी सजा! गलती करोगे तो 1000 बार लिखना होगा राम-राम, फरमान पर छिड़ी बहस
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Unique Punishment: अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज ने अजब-गजब सजा का फरमान सुनाया है. अब गलती करने पर छात्र को कॉपी पर राम-राम लिखना होगा. कॉलेज प्रिंसिपल ने इसके पीछे अपना तर्क भी बताया है.

नई दिल्ली (Unique Punishment). उत्तर प्रदेश में अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ राजकीय मेडिकल कॉलेज अजीबोगरीब आदेश के कारण चर्चा में है. कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को अनुशासन सिखाने और गलती करने पर दंडित करने के लिए एक फरमान जारी किया है. इसके तहत, अगर कोई छात्र क्लास में या किसी भी शैक्षणिक कार्य में गलती करता है तो उसे जुर्माने के रूप में अपनी नोटबुक पर ‘राम-राम’ लिखना होगा. यह आदेश केवल अनुशासन भंग पर नहीं, बल्कि अटेंडेंस में गड़बड़ी, नोट्स न बनाने या अन्य लापरवाही पर भी लागू होगा.
इस दंड की मात्रा गलती की गंभीरता पर निर्भर करेगी. छोटी गलती पर 100 बार और गंभीर गलती पर 500-1000 बार लिखना पड़ेगा. मेडिकल कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि ऐसी क्रिएटिव सजा से गलती का अहसास होने के साथ ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान भी बढ़ेगा. यह फरमान बहस का कारण बन गया है. कुछ लोग इसे ‘सकारात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव’ के रूप में देख रहे हैं तो कुछ इसे ‘धर्म-आधारित दंड’ मानकर शैक्षणिक संस्थानों में धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के सिद्धांतों पर सवाल उठा रहे हैं.
अयोध्या मेडिकल कॉलेज का ‘राम-राम’ दंड
राजर्षि दशरथ राजकीय मेडिकल कॉलेज ने इस अजब-गजब सजा को तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है. इसका मूल उद्देश्य छात्रों को अनुशासन में लाना है. कॉलेज प्रशासन ने इस कदम के पीछे कई शैक्षिक और सांस्कृतिक उद्देश्य बताए हैं. यह फरमान उन छात्रों पर लागू होगा, जो नियमित रूप से क्लास बंक करते हैं, अटेंडेंस में हेरफेर करते हैं, नोट्स बनाने में लापरवाही करते हैं या शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन करते हैं. प्रशासन का मानना है कि ‘राम-राम’ का जाप आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता भी प्रदान करेगा.
फरमान ने छेड़ी नई बहस
इस फरमान पर शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कुछ लोगों का मानना है कि यह पारंपरिक सजाओं (जैसे जुर्माना या सस्पेंशन) से बेहतर है क्योंकि यह छात्रों को सकारात्मक रास्ते पर ले जाता है. वहीं, आलोचक तर्क दे रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज जैसे प्रोफेशनल संस्थान में किसी विशेष धर्म पर आधारित दंड देना धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ है. हालांकि कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है.
सजा में धर्म की बाध्यता नहीं
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अयोध्या मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि उनका मकसद किसी परंपरा को थोपना नहीं, बल्कि छात्रों को अंदरूनी शांति और अनुशासन से जोड़ना है. गलती के बदले ‘राम नाम’ लिखने से ना केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि अपने संस्कार और संस्कृति के भी करीब आते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें किसी धर्म की बाध्यता नहीं है. जो छात्र जिस धर्म को मानता है, वह उसी के मुताबिक नाम लिख सकता है. शिक्षकों को साफ निर्देश दिया गया है कि किसी भी बच्चे को सिर्फ राम-राम लिखने के लिए बाध्य नहीं करें.
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Deepali Porwal
With over more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academi...और पढ़ें
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