General Knowledge: जापान और भारत के वर्क कल्चर में क्या अंतर है? कहां की नौकरी में ज्यादा आराम है?
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General Knowledge: जापान के लोग दुनिया के सबसे ज्यादा मेहनती लोगों की लिस्ट में गिने जाते हैं. वहां के वर्क कल्चर से भी इस बात को समझा जा सकता है. जानिए भारत और जापान के वर्क कल्चर में क्या अंतर है.

नई दिल्ली (General Knowledge). जापानी और भारतीय कार्य संस्कृति अपनी-अपनी ऐतिहासिक और सामाजिक जड़ों से गहराई से प्रभावित हैं. लेकिन उनके संचालन के बेसिक सिद्धांतों में काफी अंतर है. जापानी वर्क कल्चर मुख्य रूप से सामूहिकता (Collectivism) पर आधारित है. यहां पर्सनल गोल्स को अक्सर कंपनी की सक्सेस से पीछे रखा जाता है. काम के प्रति उनका दृष्टिकोण Gambaru की भावना से प्रेरित होता है. यहां समर्पण और काम के ज्यादा घंटे सम्मान का प्रतीक होते हैं.
भारतीय कार्य संस्कृति ज्यादा Individualistic होती है. यहां कर्मचारी की पहचान अक्सर उसके व्यक्तिगत प्रदर्शन और प्रमोशन से जुड़ी होती है. इंडियन ऑफिस जापानी ऑफिस की तुलना में ज्यादा फ्लेक्सिबल और रिलेशनशिप ओरिएंटेड होते हैं. यहां पर्सनल रिश्तों और भावनाओं को महत्व दिया जाता है. यहां की संस्कृति रिजल्ट ओरिएंटेड है. अगर आप जापान में काम करना चाहते हैं या वहां की वर्क स्टाइल से प्रभावित हैं तो समझिए वहां का पूरा सिस्टम (India vs Japan Work Culture).
Difference Between Indian and Japanese Working Culture: जापान और भारत के वर्क कल्चर में क्या अंतर है?
जापानी और भारतीय कार्य संस्कृति में कई समानताएं हैं तो कुछ बड़े अंतर भी. जानिए उनके बारे में:
1. Hierarchy और सम्मान
जापान: यहां वरिष्ठता का बहुत पालन किया जाता है. सीनियर्स के प्रति सम्मान (Keigo) भाषा और व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.
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भारत: यहां भी hierarchy मौजूद है, लेकिन यहां का सिस्टम ज्यादा फ्लेक्सिबल है. फॉर्मल मीटिंग के बाहर सीनियर और जूनियर अनौपचारिक बातचीत करते हैं.
2. निर्णय लेने की प्रक्रिया
जापान: धीमी, सर्वसम्मति-आधारित प्रक्रिया (Nemawashi) यानी कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी की सहमति सुनिश्चित की जाती है.
भारत: निर्णय अक्सर टॉप मैनेजमेंट या व्यक्तिगत नेता तेजी से लेते हैं. भारत में निर्णय लेने की प्रक्रिया ज्यादा सेंट्रलाइज्ड है.
3. काम के घंटे और लीव पॉलिसी
जापान: काम के ज्यादा घंटे, जो समर्पण का प्रतीक हैं. कर्मचारी अक्सर छुट्टी लेने से कतराते हैं, जिससे ‘कारोशी’ (Karoshi) जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. कारोशी- अत्यधिक काम से मौत या स्वास्थ्य को खतरा.
भारत: काम के घंटे लंबे हो सकते हैं, लेकिन यहां जापान जितनी कठोरता नहीं है. कर्मचारी अपनी छुट्टियों का इस्तेमाल करने में अधिक सहज होते हैं.
4. संचार शैली
जापान: इनडायरेक्ट और कॉन्टेक्सट पर निर्भर. जापान में सीधे ‘न’ कहने से बचा जाता है. इससे बाहरी लोगों के लिए मेसेज समझना कठिन हो सकता है.
भारत: डायरेक्ट कम्युनिकेशन पर फोकस किया जाता है. यहां संचार स्पष्ट होता है और ज्यादातर मामलों में औपचारिकता बनी रहती है.
5. टीमवर्क वर्सेस पर्सनल परफॉर्मेंस प्रदर्शन
जापान: सफलता में हमेशा टीम या कंपनी को श्रेय दिया जाता है. व्यक्तिगत श्रेय लेना अनुचित माना जाता है.
भारत: व्यक्तिगत कौशल और प्रदर्शन को पुरस्कृत किया जाता है. प्रमोशन में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है.
6. मीटिंग्स और समय की पाबंदी
जापान: समय की पाबंदी (Punctuality) बहुत कठोर है. मीटिंग्स में समय पर पहुंचना अनिवार्य है.
भारत: समय की पाबंदी महत्वपूर्ण है, लेकिन जापानी स्टैंडर्ड्स की तुलना में यहां ढील दी जाती है.
7. क्वॉलिटी पर फोकस
जापान: परफेक्शनिज्म और जीरो डिफेक्ट्स पर जोर दिया जाता है. यहां इस प्रक्रिया को कैजेन कहा जाता है.
भारत: क्वॉलिटी मेंटेन करना जरूरी है, लेकिन हाई स्पीड और समय पर डिलीवरी भी महत्वपूर्ण है.
8. सोशल रिलेशनशिप और पर्सनल लाइफ
जापान: ऑफिस वालों के साथ संबंध औपचारिक और व्यावसायिक होते हैं. व्यक्तिगत जीवन और काम के बीच लकीर खींची जाती है.
भारत: ऑफिस में बने रिश्ते पर्सनल और इमोशनल कनेक्शन जैसे हो जाते हैं. यहां सहकर्मी अक्सर एक-दूसरे के दोस्त बन जाते हैं.
9. ड्रेस कोड
जापान: आमतौर पर बहुत फॉर्मल और कंजर्वेटिव ड्रेस कोड का पालन किया जाता है.
भारत: आईटी और स्टार्टअप जैसे मॉडर्न सेक्टर्स में ड्रेस कोड फॉर्मल होता है. लेकिन यहां कंफर्ट लेवल का ध्यान रखा जाता है.
10. बिजनेस कार्ड के नियम
जापान: बिजनेस कार्ड (Meishi) का आदान-प्रदान करते समय बहुत सम्मान दिखाया जाता है.
भारत: यहां भी लोग एक-दूसरे को बिजनेस कार्ड देते हैं. लेकिन यह प्रक्रिया जापान जितनी फॉर्मल नहीं है.
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Deepali Porwal
With over more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academi...और पढ़ें
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