एक ऐसा मंदिर... जहां नहीं टिक पाती है छत, जानिए इसका अद्भुत रहस्य
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Tapeshwari Devi Mandir: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के समलूर गांव में तपेश्वरी माता का मंदिर है. इस मंदिर में श्रद्धालुओं का नवरात्र पर तांता लगा रहता है. आइए इस मंदिर के बारे में कुछ खास बातें जान लेते हैं.

दिनेश गुप्ता, दंंतेवाड़ा
Tapeshwari Devi Mandir: दंतेवाड़ा जिले के समलूर गांव में स्थित तपेश्वरी माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां माता के दरबार में छत नहीं है. स्थानीय कथा के अनुसार, जब भी पूर्वजों ने मंदिर पर छत बनाने का प्रयास किया, वह हर बार भस्म हो गई. श्रद्धालुओं के मुताबिक, माता तपस्विनी रूप में विराजमान हैं और उन्हें खुले आकाश के नीचे रहना ही प्रिय है.
माता तपेश्वरी का स्वरूप साधना और तपस्या का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से दूर-दराज से आने वाले भक्त खुले आसमान के नीचे दरबार में माथा टेकते हैं और मन्नत मांगते हैं.
आस्था है कि माता तपेश्वरी सच्चे मन और विश्वास से की गई प्रार्थनाओं को जरूर सुनती हैं और भक्तों की कठिनाइयों को दूर करती हैं. यही वजह है कि नवरात्र जैसे पर्व पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
आस्था है कि माता तपेश्वरी सच्चे मन और विश्वास से की गई प्रार्थनाओं को जरूर सुनती हैं और भक्तों की कठिनाइयों को दूर करती हैं. यही वजह है कि नवरात्र जैसे पर्व पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
नवरात्र पर लगती है भीड़
शारदीय नवरात्रि पर श्रद्धालु आते हैं और विधि-विधान से पूजा कर कलश विसर्जन संकनी-डंकनी नदी के तट पर करते हैं. समलूर में एक प्राचीन मंदिर है जिसे ओलमराम गुड़ी गोंडी भाषा में बोलते हैं. यहां पर हर साल भारी संख्या में मेला लगता है. माना जाता है कोई भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में जाकर अपनी मन्नत मांगता है तो वह कभी खाली हाथ नहीं जाता है. उसकी मनोकामना पूरी होती ही है.
शारदीय नवरात्रि पर श्रद्धालु आते हैं और विधि-विधान से पूजा कर कलश विसर्जन संकनी-डंकनी नदी के तट पर करते हैं. समलूर में एक प्राचीन मंदिर है जिसे ओलमराम गुड़ी गोंडी भाषा में बोलते हैं. यहां पर हर साल भारी संख्या में मेला लगता है. माना जाता है कोई भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में जाकर अपनी मन्नत मांगता है तो वह कभी खाली हाथ नहीं जाता है. उसकी मनोकामना पूरी होती ही है.
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छत न बनाने की वजह
ऐसी बात नहीं है कि किसी ने भी मंदिर की छत बनवाने की कोशिश नहीं की है. ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में कुछ लोगों ने लकड़ी की मदद से छत बनानी चाही, लेकिन वह तुरंत ही जलकर खाक हो गई. इसलिए आज तक कोई भी इस मंदिर की छत नहीं बना पाया है.
ऐसी बात नहीं है कि किसी ने भी मंदिर की छत बनवाने की कोशिश नहीं की है. ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में कुछ लोगों ने लकड़ी की मदद से छत बनानी चाही, लेकिन वह तुरंत ही जलकर खाक हो गई. इसलिए आज तक कोई भी इस मंदिर की छत नहीं बना पाया है.
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Deepti Sharma
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re...और पढ़ें
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