‘दीवार में खिड़की रहती थी’ का रिकॉर्ड, विनोद कुमार शुक्ल को 30 लाख रॉयल्टी
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Agency:News18 Chhattisgarh
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Hindi Literature Shines : ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल की लोकप्रिय पुस्तक ‘दीवार में खिड़की रहती थी’ की 87,000 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं और इसके एवज में उन्हें ₹30 लाख की रॉयल्टी मिली है.

रायपुर. ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल ने एक नया इतिहास रच दिया है. उनकी लोकप्रिय पुस्तक ‘दीवार में खिड़की रहती थी’ की 87,000 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं और इसके एवज में उन्हें ₹30 लाख की रॉयल्टी मिली है. यह सम्मान उन्हें रायपुर में आयोजित हिंदी युग्म उत्सव कार्यक्रम में दिया गया. यह उपलब्धि साबित करती है कि हिंदी साहित्य का पाठक वर्ग न केवल मौजूद है बल्कि लगातार बढ़ रहा है. प्रकाशन जगत इसे इस धारणा के अंत का प्रतीक मान रहा है कि हिंदी किताबें बिकती नहीं. शुक्ल की यह सफलता पूरे साहित्य जगत के लिए नई उम्मीद लेकर आई है.
हिंदी युग्म प्रकाशन के अनुसार, अप्रैल से अब तक इस पुस्तक की 87,000 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं. इतनी बड़ी बिक्री ने हिंदी किताबों की दुनिया में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है. इस उपलब्धि को चिह्नित करने के लिए रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘हिंदी युग्म उत्सव’ कार्यक्रम में उन्हें ₹30 लाख का प्रतीकात्मक चेक सौंपा गया. यह राशि पहले ही उनके बैंक खाते में ट्रांसफर की जा चुकी थी. दरअसल विनोद कुमार शुक्ल की इस सफलता ने उन धारणाओं को तोड़ दिया है जिनमें कहा जाता है कि हिंदी किताबों की बिक्री सीमित है या पाठक वर्ग सिकुड़ रहा है. हिंदी युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने कहा, “अगर किताबें बिकती हैं, तो लेखक को उसका हक भी मिलता है. यह रॉयल्टी इस बात का प्रमाण है कि हिंदी साहित्य का भविष्य उज्ज्वल है.”
ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल की किताब धूम मचा रही है.
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ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ से इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले पहले साहित्यकार हैं. उनकी रचनाओं ने न सिर्फ हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हैं, बल्कि प्रदेश और देशभर में साहित्य प्रेमियों की नई पीढ़ी को भी प्रभावित किया है. उनकी लेखन शैली गहरी संवेदनाओं और आमजन के जीवन से जुड़ी कहानियों के लिए जानी जाती है. यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सोशल मीडिया और मोबाइल के दौर में भी किताबों की अहमियत बनी हुई है.
59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ से इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले पहले साहित्यकार हैं. उनकी रचनाओं ने न सिर्फ हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हैं, बल्कि प्रदेश और देशभर में साहित्य प्रेमियों की नई पीढ़ी को भी प्रभावित किया है. उनकी लेखन शैली गहरी संवेदनाओं और आमजन के जीवन से जुड़ी कहानियों के लिए जानी जाती है. यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सोशल मीडिया और मोबाइल के दौर में भी किताबों की अहमियत बनी हुई है.
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Sumit verma
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प...और पढ़ें
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