दिल्लीवालों का बुरा हाल! हर 12 दिन में एक बार खराब होती है DTC बस, बेंगलुरु-चेन्नई में 50 गुना बेहतर हालात
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Agency:एजेंसियां
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DTC CAG Report: DTC बस को लेकर कैग ने पिछले महीने दिल्ली विधानसभा में रिपोर्ट पेश की थी. रिपोर्ट में कई खुलासे किए गए हैं. ब्रेकडाउन रेट को लेकर भी चौंकाने वाली बात कही गई है.

नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली सरकारों के कामकाज को लेकर कैग की रिपोर्ट विधानसभा में रखने की घोषणा की थी. रेखा गुप्ता सरकार इसपर अमल करते हुए कई कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश कर चुकी है. दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन यानी DTC को लेकर भी विधानसभा में कैग रिपोर्ट पेश की गई थी. इसमें कई खुलासे किए गए थे. DTC बसों के ब्रेकडाउन रेट को लेकर भी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा गया था. इस रिपोर्ट की मानें तो ब्रेकडाउन के लिहाज से डीटीसी बसों की हालत बेहद खराब है.
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों की ब्रेकडाउन रेट देश के प्रमुख महानगरों में सबसे खराब हैं. डेटा से पता चलता है कि डीटीसी के पुराने बेड़े, खराब रखरखाव और लो प्रोडक्टिविटी ने शहर डीटीसी बसों को लागों के लिए अनरिलाइबल बना दिया है. 24 मार्च को दिल्ली विधानसभा में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की ओर से डीटीसी बसों की हालत पर रिपोर्ट पेश की गई थी. ऑडिट में डीटीसी बस और उसके बुनियादी ढांचे की खस्ताहाल के बारे में पता चलता है. रिपोर्ट में पाया गया कि साल 2015-16 और 2021-22 के बीच डीटीसी बसों में प्रति 10,000 किलोमीटर पर 2.90 से 4.57 की ब्रेकडाउन दर दर्ज की गई.
हर 12 दिन में खराब होती है डीटीसी बस
कैग रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं. डीटीसी की बसों के विपरीत दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डीआईएमटीएस) की ओर से ऑपरेटेड क्लस्टर बसों में इसी अवधि में ब्रेकडाउन रेट 0.01 से 0.03 तक दर्ज की गई. मुंबई की बेस्ट बसों में ब्रेकडाउन की दर 0.33 से 0.57 थी, जबकि बेंगलुरु और चेन्नई में ब्रेकडाउन की दर अक्सर 0.06 से कम थी. यह डीटीसी के सबसे खराब प्रदर्शन से 50 गुना कम है. कैग की ओर से पेश ऑडिट रिपोर्ट के डेटा एक स्पष्ट निष्कर्ष की ओर इशारा करता है- डीटीसी की एक बस हर 12 दिन में एक बार खराब होती है.
कैग रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं. डीटीसी की बसों के विपरीत दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डीआईएमटीएस) की ओर से ऑपरेटेड क्लस्टर बसों में इसी अवधि में ब्रेकडाउन रेट 0.01 से 0.03 तक दर्ज की गई. मुंबई की बेस्ट बसों में ब्रेकडाउन की दर 0.33 से 0.57 थी, जबकि बेंगलुरु और चेन्नई में ब्रेकडाउन की दर अक्सर 0.06 से कम थी. यह डीटीसी के सबसे खराब प्रदर्शन से 50 गुना कम है. कैग की ओर से पेश ऑडिट रिपोर्ट के डेटा एक स्पष्ट निष्कर्ष की ओर इशारा करता है- डीटीसी की एक बस हर 12 दिन में एक बार खराब होती है.
बस के ठीक होने में लग जाते हैं 3 से 4 दिन
अधिकारियों के अनुसार, बस में किसी भी खराबी को ठीक करने में लगभग 2-5 घंटे लग सकते हैं. शुरुआती मरम्मत कार्य के बाद बस को डिपो में ले जाया जाता है और बस के फिर से चलने से पहले इसकी जांच की जाती है, जिसमें 3-4 दिन तक का समय लग सकता है. सीएजी की रिपोर्ट में डीटीसी के संचालन की एक निराशाजनक तस्वीर पेश की गई है, जिसमें पुराने वाहन, अपर्याप्त रखरखाव और खराब प्रबंधन का हवाला दिया गया है. इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि डीटीसी की अधिकांश सीएनजी बसें अपने 10 साल के जीवनकाल को पार कर चुकी हैं और सालाना मेंटेनेंस के बिना ऑपरेट हो रही हैं.
अधिकारियों के अनुसार, बस में किसी भी खराबी को ठीक करने में लगभग 2-5 घंटे लग सकते हैं. शुरुआती मरम्मत कार्य के बाद बस को डिपो में ले जाया जाता है और बस के फिर से चलने से पहले इसकी जांच की जाती है, जिसमें 3-4 दिन तक का समय लग सकता है. सीएजी की रिपोर्ट में डीटीसी के संचालन की एक निराशाजनक तस्वीर पेश की गई है, जिसमें पुराने वाहन, अपर्याप्त रखरखाव और खराब प्रबंधन का हवाला दिया गया है. इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि डीटीसी की अधिकांश सीएनजी बसें अपने 10 साल के जीवनकाल को पार कर चुकी हैं और सालाना मेंटेनेंस के बिना ऑपरेट हो रही हैं.
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Manish Kumar
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
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