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क्या DTC बसों में महिलाओं को पिंक टिकट मिलना अब बंद हो जाएगा? CM रेखा गुप्ता..
क्या DTC बसों में महिलाओं को पिंक टिकट मिलना अब बंद हो जाएगा? सीएम रेखा गुप्ता विधानसभा में कर सकती हैं बड़ा ऐलान
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Agency:News18Hindi
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DTC News: दिल्ली में डीटीसी बसों में पिंक टिकट योजना पर विवाद बढ़ रहा है. आप और बीजेपी के बीच तनाव बढ़ा है. विधानसभा बजट सत्र में इस मुद्दे पर हंगामा होने की संभावना है.

नई दिल्ली. दिल्ली की डीटीसी बसों में पिंक टिकट का मुद्दा आजकल सुर्खियों में है. दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने जब से एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, तब से महिलाओं की फ्री बस सर्विस बंद होने की चर्चा जोर पकड़ रही है. पिंक टिकट की शुरुआत 2019 में तत्कालीन आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने की थी, जिसे महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी आवाजाही को आसान बनाने के तौर पर पेश किया गया था. लेकिन अब, भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद इस योजना को बंद करने की चर्चा हो रही है. इसे लेकर दिल्ली विधानसभा में दोनों दलों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. विधानसभा के बजट सत्र में इस मुद्दे के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं.
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और यात्रियों की शिकायतों में यह बात सामने आ रही है कि डीटीसी बसों के कंडक्टर महिलाओं को पिंक टिकट देने से मना कर रहे हैं. कुछ मामलों में कंडक्टरों ने महिलाओं से कहा कि वे ऑनलाइन टिकट लें या फिर टिकट के बिना यात्रा न करें. कई महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कंडक्टर और ड्राइवर उनके साथ बदतमीजी करते हैं और बसें रोकने में भी आनाकानी करते हैं. यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ यात्रियों ने दावा किया कि यह सब बीजेपी सरकार के इशारे पर हो रहा है. उनका कहना है कि क्या सरकार इस योजना को चुपचाप खत्म करने की तैयारी कर रही है?
महिलाओं की मुफ्त बस सेवा होगी समाप्त?
आप ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि बीजेपी महिलाओं के अधिकारों पर हमला कर रही है और उनकी मुफ्त यात्रा की सुविधा छीनने की साजिश रच रही है. आप नेताओं का दावा है कि पिंक टिकट योजना दिल्ली की महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम था, जिसे बीजेपी अपनी राजनीति के चलते खत्म करना चाहती है. दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे इस योजना को बंद नहीं कर रहे, बल्कि इसे बेहतर और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बीजेपी नेताओं का तर्क है कि आप सरकार ने इस योजना को सिर्फ वोट बैंक के लिए शुरू किया था, जिसके चलते डीटीसी पर भारी कर्ज बढ़ गया और बसों की स्थिति खराब हो गई.
आप ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि बीजेपी महिलाओं के अधिकारों पर हमला कर रही है और उनकी मुफ्त यात्रा की सुविधा छीनने की साजिश रच रही है. आप नेताओं का दावा है कि पिंक टिकट योजना दिल्ली की महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम था, जिसे बीजेपी अपनी राजनीति के चलते खत्म करना चाहती है. दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे इस योजना को बंद नहीं कर रहे, बल्कि इसे बेहतर और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बीजेपी नेताओं का तर्क है कि आप सरकार ने इस योजना को सिर्फ वोट बैंक के लिए शुरू किया था, जिसके चलते डीटीसी पर भारी कर्ज बढ़ गया और बसों की स्थिति खराब हो गई.
बजट सत्र हंगामेदार होगा?
विधानसभा का बजट सत्र, जो आज 24 मार्च 2025 से शुरू हो रहा है, इस विवाद का नया रंगमंच बनने वाला है. सूत्रों के मुताबिक, आप इस सत्र में डीटीसी के कामकाज पर कैग रिपोर्ट और पिंक टिकट योजना को लेकर बीजेपी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर रही है. पार्टी के विधायक सदन में नारेबाजी और प्रदर्शन करेंगे, जैसा कि पहले भी देखा गया है. वहीं, बीजेपी इसे मौके के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है ताकि आप के शासनकाल में डीटीसी की खराब हालत को उजागर किया जाए. बजट सत्र में 25 मार्च को दिल्ली का 2025-26 का बजट पेश होगा, लेकिन उससे पहले ही यह मुद्दा गरमा सकता है.
विधानसभा का बजट सत्र, जो आज 24 मार्च 2025 से शुरू हो रहा है, इस विवाद का नया रंगमंच बनने वाला है. सूत्रों के मुताबिक, आप इस सत्र में डीटीसी के कामकाज पर कैग रिपोर्ट और पिंक टिकट योजना को लेकर बीजेपी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर रही है. पार्टी के विधायक सदन में नारेबाजी और प्रदर्शन करेंगे, जैसा कि पहले भी देखा गया है. वहीं, बीजेपी इसे मौके के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है ताकि आप के शासनकाल में डीटीसी की खराब हालत को उजागर किया जाए. बजट सत्र में 25 मार्च को दिल्ली का 2025-26 का बजट पेश होगा, लेकिन उससे पहले ही यह मुद्दा गरमा सकता है.
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दिल्ली की जनता, खासकर महिलाएं, इस विवाद को लेकर असमंजस में हैं. एक ओर जहां कुछ महिलाएं इस योजना को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा मानती हैं, वहीं दूसरी ओर डीटीसी की खस्ता हालत और बसों की कमी उनकी परेशानी बढ़ा रही है. अब सवाल यह है कि क्या यह राजनीतिक जंग महिलाओं के हितों को मजबूत करेगी या उनकी सुविधाओं को और कमजोर कर देगी? बजट सत्र इसका जवाब देगा, लेकिन तब तक यह मुद्दा दिल्ली की सड़कों से लेकर विधानसभा तक गूंजता रहेगा.
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