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स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा की अर्जी पर HC ने दिये केंद्र को जांच के आदेश, TTFI के नियमों पर अंतरिम रोक

हाई कोर्ट ने केंद्र को बत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के आदेश दिए हैं. इसके लिये केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया गया है. (File)

हाई कोर्ट ने केंद्र को बत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के आदेश दिए हैं. इसके लिये केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया गया है. (File)

Delhi High Court News: राष्ट्रमंडल खेलों की गोल्ड मेडल विजेता और खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त मनिका बत्रा ने आरोप लगाया कि महासंघ की चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और उनकी तरह खिलाड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने भारत की स्टार महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा (TT Star Manika Batra) द्वारा दायर अर्जी  पर सुनवाई करते हुए टेबल टेनिस महासंघ (Table Tanis Association) के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय शिविर में शामिल होना अनिवार्य बताया गया है. खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियाई टेबल टेनिस चैंपियनशिप में टीम में चुन जाने के खिलाफ कोर्ट का रूख किया था. भारतीय टेबल टेनिस महासंघ ने एशियाई चैम्पियनशिप में चुने जाने के लिए राष्ट्रीय शिविर में भाग लेना अनिवार्य किया था.

खिलाड़ी मनिका बत्रा ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय कोच सौम्यदीप रॉय ने बत्रा पर एक मैच गंवाने का दबाव बनाया था. ताकि उनकी निजी प्रशिक्षु ओलंपिक 2020 के लिए क्वलीफाई कर सके. बत्रा ने महासंघ के प्रबंधन की जांच का निर्देश भी खेल मंत्रालय को देने की मांग की है. मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने साथ ही केंद्र को बत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के आदेश दिए हैं. हाई कोर्ट ने केंद्र को चार सप्ताह के अंदर जांच करने को कहा है. हाई कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि केंद्र इस बात पर भी विचार करेगा कि महासंघ के मामले में किसी की जांच की जरूरत न पड़े. मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.

केंद्र सरकार के वकील को दिया गया दो दिन का समय 

मामले की पिछली सुनवाई में जस्टिस रेखा पल्ली ने केंद्र सरकार के वकील को दो दिन का समय दिया था. पिछली सुनवाई में जज ने कहा था कि कोच के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और केंद्र को सक्रियता दिखानी होगी. उन्होंने कहा था वह ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ी हैं. अगर कोच के खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप हैं तो केंद्र सरकार को थोड़ी सक्रियता दिखानी होगी. आखिरकार वह भारत की सर्वोच्च रैंकिंग वाली खिलाड़ी हैं. बत्रा के वकील सचिन दत्ता ने कहा कि सारे मानदंडों पर खरी उतरने के बावजूद सिर्फ राष्ट्रीय शिविर में भाग नहीं लेने के कारण बत्रा को दोहा में सितंबर अक्टूबर में होने वाली एशियाई चैम्पियनशिप में खेलने का मौका नहीं दिया जा रहा.

बत्रा ने कोर्ट से नियम पर रोक लगाने की थी मांग 

मनिका बत्रा ने कोर्ट से इस नियम पर रोक लगाने की मांग की थी ताकि वह नवंबर में एक अन्य अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले सकें. उन्होंने कहा कि नवंबर में एक और टूर्नामेंट है. इस नियम पर रोक लगनी चाहिए. इससे उसका कैरियर खत्म हो जाएगा. महासंघ ने तमाम आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि राष्ट्रीय कोच शिविर में मौजूद ही नहीं है. राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता और खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त बत्रा ने आरोप लगाया कि महासंघ की चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और उनकी तरह खिलाड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है जो खेलों और खिलाड़ियों के हितों के विपरीत है.

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