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'रात में लुखी भूखे सोई, सुबह उठी नहीं बल्कि दुनिया से उठ गई'

पाकुड़ में भूख से मौत
पाकुड़ में भूख से मौत

गांववालों के मुताबिक मौत से पहले कई दिनों तक लुखी भूखी रही. छोटी बहन को डीलर के पास अनाज के लिए भेजा, तो डीलर ने अनाज नहीं दिया. रात में लुखी भूखे सोई, तो फिर उठ नहीं पाई बल्कि दुनिया से उठ गई.

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पाकुड़ में भूख से मौत का एक मामला सामने आया है. घटना हिरणपुर प्रखंड के धवाडांगा गांव की है. कई दिनों से भूखी लुखी मुर्मू यह सुनी कि डीलर ने अनाज नहीं दिया, उसका दम छुट गया.

गांववालों के मुताबिक मौत से पहले कई दिनों तक लुखी भूखी रही. छोटी बहन को डीलर के पास अनाज के लिए भेजा, तो डीलर ने अनाज नहीं दिया. छोटी बहन ने जब बड़ी बहन को यह बात सुनाई,  तो वह सदमे में चली गई कि आज भी भूखे सोना पड़ेगा. रात में लुखी भूखे सोई, तो फिर उठ नहीं पाई बल्कि दुनिया से उठ गई. कई महीने से उसे अनाज नहीं मिला था. पड़ोसियों से उधार चावल लेकर कुछ दिन काम चलाया. आखिरकार भूख ने उसकी जान ले ली.

यह मामला आग की तरह फैला. पदाधिकारी गांव पहुचे और मुखिया के माध्यम से मृतक लुखी मुर्मू के घर सरकारी अनाज भिजवा दिया. ताकि मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा सके. डीलर चैतन मरांडी ने बताया कि पॉस मशीन काम नहीं करने के कारण लुखी को अनाज नहीं दिया गया. सरकार का ऐसा कोई नियम नहीं आई है कि रजिस्टर में लिखाकर आपातकाल की स्थिति में सरकारी अनाज दिया जा सके. लुखी के राशन कार्ड में साफ दर्ज है कि उसको को कई महीनों से अनाज नहीं दिया गया था.



 
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