Advertisement
होमताजा खबरनॉलेज
चंद्रमा के 10 हैरतअंगेज सच, जो नासा रोवर ने खोले

चंद्रमा के 10 हैरतअंगेज सच, जो नासा रोवर ने खोले

Last Updated:

चंद्रमा की जांच के लिए तैयार किया गया 'द ल्यूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर' (LRO) नासा का सबसे नया चंद्रमा टोही वाहन है. इसका निर्माण नौ साल पहले जून 2009 को हुआ था. 'द ल्यूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर' के जरिए भेजी गई अभी तक की 10 बड़ी खोज.

चंद्रमा के 10 हैरतअंगेज सच, जो नासा रोवर ने खोलेZoom
चंद्रमा की जांच के लिए तैयार किया गया 'द ल्यूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर' (LRO) नासा का सबसे नया चंद्रमा टोही वाहन है. इसका निर्माण नौ साल पहले जून 2009 को हुआ था. चंद्रमा से जुड़ी जानकारियों के लिए उसे भेजा गया. इस साल चंद्रमा पर भेजे गए अपोलो मिशन के 50 साल भी पूरे हो रहे हैं. इसके मद्देनजर जानिए नासा के 'द ल्यूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर' के जरिए भेजी गई अभी तक की 10 बड़ी खोज.

1. पानी की खोज
रिसर्चरों के जरिए खोजी गईं, सबसे बड़ी जानकारियों में चांद पर पानी का मिलना है. बर्फ के रूप में चट्टानों के बीच चंद्रमा पर LRO ने अक्टूबर साल 2009 में पानी खोजा. LRO और दूसरे स्पेसक्राफ्ट ने टनों पानी वाली बर्फ को चंद्रमा के उत्तर पोल पर खोज निकाला था.



2. चंद्रमा पर गहरा गड्ढा
LRO ने अभी तक भेजी गई जानकारियों में चंद्रमा पर मौजूद 2 बड़े गड्ढों की डिटेल्स भेजी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये गड्ढे जब बने होंगे, जब भूमिगत लावा ट्यूब फटी होगी. ये घटना किसी उल्का पिंड के गिरने से भी संभव है. ये गड्ढे ज्वालामुखी के नजदीक मौजूद क्षेत्र में है. इस गड्ढे की परिधि 426 फीट यानि 130 मीटर है.

आपकी सोच से कई गुना ज्यादा हीरे धरती के अंदर मौजूद



3. हर्मिट क्रेटर
चांद पर खोज में निकला LRO यानि 'द ल्यूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर' में एक यंत्र लगा है, जो वहां के तापमान को मापता है. इसको डिविनर कहा जाता है. इस उपकरण ने चंद्रमा के हिस्से का जो तापमान भेजा है, वो सोलर सिस्टम में सबसे ठंडा माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक वहां का तापमान प्लूटो के तापमान (-184 सेल्सियस) से भी कम -248 डिग्री सेल्सियस है. ये स्थान चंद्रमा के दक्षिण पोल पर स्थित है.

भूतों की सच्चाई से इंसानी सुपरपावर तक, दुनिया की 4 अनसुलझी गुत्थियां



4. चंद्रमा का दूसरा चेहरा
चांद के एक चेहरे से हम सभी परिचित हैं, जो धरती की ओर से दिखाई देता है. इसकी दूसरी साइड को 'फार साइड ऑफ द मून' कहा जाना चाहिए बल्कि 'डार्क साइड ऑफ मून' की बजाए. सूरज की रोशनी के कारण हम चंद्रमा पर मौजूद वास्तविक आकार को समझ नहीं पाते लेकिन LRO ने अपनी तकनीक से चंद्रमा की टोपोग्राफी इमेज साझा की है. इसमें लाल रंग का दिकाई देने वाला इलाके सबसे ज्यादा पठारी इलाका है. जबकि नीले रंग वाली सबसे कम.



5. चंद्रमा की धुरी
चांद के पोल पर मौजूद कई उच्च क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लगातार सूरज की रोशनी मौजूद रहती है. LRO ने टोपोग्राफी तकनीक के जरिए उन इलाकों की तस्वीर भेजी, जहां ऊंचाई के चलते सोलर विजिबिलिटी 96% थी. इसका मतलब की साल के 243 दिनों में उजाला रहता है. वहां अंधेरे का समय 24 घंटे से कभी ज्यादा नहीं होता है.

ASTRONOMERS ने खोजे 12 नए 'चांद', सौरमंडल में सबसे ज्यादा चांद वाला बना ये ग्रह



6. A11 की तस्वीर
LRO ने उस क्षेत्र की तस्वीरें भी भेजी, जहां अपोलो 11 लैंड हुआ था. भेजी गई तस्वीरों में 12 फीट परिधि साफ दिखाई दे रही है. इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों का ट्रैक और वहां छोड़े गए उपकरण भी तस्वीरों में दिखाई दे रहे हैं. साइंटिफिक वैल्यू के हिसाब से, LRO का भेजा डेटा काफी खास और जानकारियों से लबरेज है.



7. चंद्रमा पर पहाड़
धरती के जैसे चंद्रमा पर मौजूद पहाड़ों को बनने में लंबा वक्त नहीं लगा है. वहां मौजूद सबसे बड़ा पहाड़ भी एक मिनट से कम वक्त में तैयार हुआ है. या उल्का पिंड और धूमकेतु के सतह से टकराते ही.



8. चंद्र घाटी की मौजूदगी
चंद्रमा पर मौजूद घाटी, वहां की सतह पर रिवर चैनल जैसी दिखाई देती है. रिसर्चर्स इसको लहरदार घाटी (सिन्युसस) कहते हैं. इनका निर्माण कैसे हुआ, ये आजतक एक रहस्य है. वैज्ञानिकों के के मुताबिक इसके निर्माण में कई अलग-अलग कारण रहे होंगे. जैसे प्राचीन मैग्मा का बहाव और सब-टैरेनियन लावा ट्यूब्स का बिखरना आदि.



9. रोवर ल्यूनोखोड 1
रूस ने रिसर्च के लिए साल 1970 में चंद्रमा पर ल्यूनोखोड नामक रोवर भेजा था. खत्म होने से पहले उसने करीब 6 मील यानि 10 किमी का सफर किया. LRO की टीम ने दावा किया कि उन्होंने रूस के उस रोवर का पता लगा लिया है. ये अपनी अनुमानित लोकेशन से 1 मील दूर दिखाई दिया.



10. क्रेटर और बोल्डर की साफ तस्वीरें
नासा के इस LRO में हाई रेज्योलुशन कैमरा लगा हुआ है, जो पिछली ल्यूनर ऑर्टिबिटर मिशन से 10 गुना ज्यादा बेहतर तस्वीरें खींचता है. दूसरे एयरक्राफ्ट के सिंगल पिक्सल की तुलना में वो 100 पिक्सल खींचता है. इसकी मदद से रिसर्चर क्रेटर्स और बोल्डर की ज्यादा गहराई से जांच कर सकते हैं.

Click here to add News18 as your preferred news source on Google.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
और पढ़ें