Explainer: किसी भारतीय साइंटिस्ट को क्यों नहीं मिला नोबेल पुरस्कार, कोई साजिश है या कुछ और ही है सच?
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भारतीय वैज्ञानिक को देश के नागरिक रहते हुए नोबेल पुरस्कार 94 साल हो चुके हैं. बेशक इसके कई कारण है जिसमें पश्चिमी देशों का वर्चस्व भी एक कारण है, लेकिन हमारे देश में वैज्ञानिकों के लिए सही माहौल और सुविधाओं की खासी कमी है. देश की तरक्की के लिए ऐसा करना बहुत ही ज्यादा जरूरी है.

कितने भारतीय वैज्ञानिकों को अब तक नोबेल पुरस्कार मिला है? कई लोग इस सवाल का जवाब 4 देंखे. वे नाम भी गिनाएंगे. सीवी रमन, हरगोविंद सिंह खुराना, सी चंद्रशेखर और वेंटरमन रामकृष्णन. लेकिन अगर आप से कहा जाए कि सही जवाब केवल 1 ही है तो? जी हां अब तक केवल एक ही भारतीय नागरिक को बतौर वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार मिला है. वो हैं सीवी रमन, बाकी ने तो विदेश में अध्ययन किया और जब उन्हें नोबेल पुरुस्कार मिला तब वे भारतीय नागरिक भी नहीं थे. तो फिर आखिर ऐसा क्यों है कि 94 सालों में इतनी तरक्की करने के बाद भी हमारे किसी वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है?
कम भारतीय क्यों?
यह सवाल कई मुद्दों से जुड़ा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस के लेख में इसके कारणों पर विचार किया गया है, जिसमें भारती की सीमाओं के अलावा पश्चिमी वर्चस्व, विज्ञान में भारत का निवेश आदि सहित इस बात पर भी गौर किया गया है कि कई भारतीय वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार के लिए नामित भी हुए हैं, इस तथ्य पर गौर किया गया है. पर इनमें सबसे अहम सवाल है, क्या नोबेल पुरस्कार वाकई किसी देश की वैज्ञानिक तरक्की का पैमाना होना चहिए?
यह सवाल कई मुद्दों से जुड़ा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस के लेख में इसके कारणों पर विचार किया गया है, जिसमें भारती की सीमाओं के अलावा पश्चिमी वर्चस्व, विज्ञान में भारत का निवेश आदि सहित इस बात पर भी गौर किया गया है कि कई भारतीय वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार के लिए नामित भी हुए हैं, इस तथ्य पर गौर किया गया है. पर इनमें सबसे अहम सवाल है, क्या नोबेल पुरस्कार वाकई किसी देश की वैज्ञानिक तरक्की का पैमाना होना चहिए?
बहुत की कम निवेश
यह सच है कि भारत में विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ही कम निवेश किया गया है. मूल शोध पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है. पब्लिक फंडिंग की उम्मीद के बारे में तो बात ही क्या की जाए? यहां तक कि निजी क्षेत्र में भी उत्साह की भारी कमी दिखेगी. आलम ये है कि कई विश्वविद्यालय जो कभी शोधकार्यों में बढ़िया हुआ करते थे, वे लगातार अपनी साख गंवाते रहे है. अवसर एक जटिल सवाल हमेशा ही बने रहे.
यह सच है कि भारत में विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ही कम निवेश किया गया है. मूल शोध पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है. पब्लिक फंडिंग की उम्मीद के बारे में तो बात ही क्या की जाए? यहां तक कि निजी क्षेत्र में भी उत्साह की भारी कमी दिखेगी. आलम ये है कि कई विश्वविद्यालय जो कभी शोधकार्यों में बढ़िया हुआ करते थे, वे लगातार अपनी साख गंवाते रहे है. अवसर एक जटिल सवाल हमेशा ही बने रहे.
भारत के कुछ वैज्ञानिकों ने विदेशी नागरिक के तौर पर नोबेल पुरस्कार हासिल किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बहुत ही कम वैज्ञानिक
लेख के मुताबिक भारत में जनसंख्या के मुकाबले शोधकर्ताओं की संख्या वैश्विक संख्या से पांच गुना कम है. नोबेल पुरस्कार जीतने के काबिल लोगों की संख्या बहुत ही कम है. लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत से नोबेल पुरस्कार के लिए वैज्ञानिक नामित ही नहीं हुए. बल्कि कुछ तो ऐसे वैज्ञानिक भी थे जिन्होंने खोज तो बहुत ही बड़ी की थी, लेकिन वे नामित भी ना हो सके.
लेख के मुताबिक भारत में जनसंख्या के मुकाबले शोधकर्ताओं की संख्या वैश्विक संख्या से पांच गुना कम है. नोबेल पुरस्कार जीतने के काबिल लोगों की संख्या बहुत ही कम है. लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत से नोबेल पुरस्कार के लिए वैज्ञानिक नामित ही नहीं हुए. बल्कि कुछ तो ऐसे वैज्ञानिक भी थे जिन्होंने खोज तो बहुत ही बड़ी की थी, लेकिन वे नामित भी ना हो सके.
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कितने लोग नामित हुए?
नामित वैज्ञानिकों के नामों का खुलासा भी 50 साल बात किया जाता है. और ये आंकड़े तक समय समय पर अपडेट होते रहते हैं. दुनिया के फिजिक्स और कैमिस्ट्री में नाम नोबेल उम्मीदवारों के केवल 1970 की सूची उपलब्ध है. वहीं चिकित्सा में यह आंकड़ा केवल 1953 तक का है. भारत के 35 ज्ञात नामित लोगों में केवल 6 वैज्ञानिक थे. इसमें मेघनाथ साहा और सत्येंद्र नाथ बोस भौतिकी के लिए, दीएन रामचंद्रन और टी शेषाद्री कैमिस्ट्री के लिए, और मेडिसिन के लिए उपेंद्रनाथ ब्रह्मचारी का नाम शामिल है. इन्हें अलग अलग समय पर एक से अधिक बार नामित किया गया था.
नामित वैज्ञानिकों के नामों का खुलासा भी 50 साल बात किया जाता है. और ये आंकड़े तक समय समय पर अपडेट होते रहते हैं. दुनिया के फिजिक्स और कैमिस्ट्री में नाम नोबेल उम्मीदवारों के केवल 1970 की सूची उपलब्ध है. वहीं चिकित्सा में यह आंकड़ा केवल 1953 तक का है. भारत के 35 ज्ञात नामित लोगों में केवल 6 वैज्ञानिक थे. इसमें मेघनाथ साहा और सत्येंद्र नाथ बोस भौतिकी के लिए, दीएन रामचंद्रन और टी शेषाद्री कैमिस्ट्री के लिए, और मेडिसिन के लिए उपेंद्रनाथ ब्रह्मचारी का नाम शामिल है. इन्हें अलग अलग समय पर एक से अधिक बार नामित किया गया था.
कई भारतीय वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार के बहुत ही करीब भी पहुंच गए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)
ऐसे मामले भी
वहीं एक नाम जगदीश चंद्र बोस का भी सामने आता है जिन्होंने बेतार संचार की खोज 1895 में की, लेकिन उसके लिए नोबेल पुरस्कार 1909 में गुग्लेल्मो मारकोनी और फर्डिनेंड ब्राउन को दे दिया गया. इसी तरह से कुछ और वैज्ञानिकों को भी नोबेल मिलने की उम्मीद की जा सकती थी. लेकिन उन्हें नोबेल नहीं मिला वे नामित हो सके या नहीं यह बाद में ही पता चलेगा.
वहीं एक नाम जगदीश चंद्र बोस का भी सामने आता है जिन्होंने बेतार संचार की खोज 1895 में की, लेकिन उसके लिए नोबेल पुरस्कार 1909 में गुग्लेल्मो मारकोनी और फर्डिनेंड ब्राउन को दे दिया गया. इसी तरह से कुछ और वैज्ञानिकों को भी नोबेल मिलने की उम्मीद की जा सकती थी. लेकिन उन्हें नोबेल नहीं मिला वे नामित हो सके या नहीं यह बाद में ही पता चलेगा.
पश्चिमी देशों का बोलबाला
लेकिन यह सच है कि नोबेल पुरस्कार पर पश्चिमी देशों का वर्चस्व रहा है. यहां तक कि विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले इजरायल और चीन के वैज्ञानिकों की भी संख्या खासी कम है. अधिकांश यहूदी वैज्ञानिकों को नोबेल मिलने के बावजूद इजराइल के केवल चार ही वैज्ञानिक नोबेल हासिल कर सके. वहीं चीन के केवल तीन वैज्ञानिक नोबेल हासिल कर सके हैं. सच तो ये है कि यूरोप और अमेरिका से बाहर केवल 9 देश के वैज्ञानिकों को ही नोबेल मिल सका है.
लेकिन यह सच है कि नोबेल पुरस्कार पर पश्चिमी देशों का वर्चस्व रहा है. यहां तक कि विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले इजरायल और चीन के वैज्ञानिकों की भी संख्या खासी कम है. अधिकांश यहूदी वैज्ञानिकों को नोबेल मिलने के बावजूद इजराइल के केवल चार ही वैज्ञानिक नोबेल हासिल कर सके. वहीं चीन के केवल तीन वैज्ञानिक नोबेल हासिल कर सके हैं. सच तो ये है कि यूरोप और अमेरिका से बाहर केवल 9 देश के वैज्ञानिकों को ही नोबेल मिल सका है.
यह भी पढ़ें: कौन हैं फिजिक्स में नोबेल जीतने वाले साइंटिस्ट, जिन्होंने गूगल से दिया था इस्तीफा, फिर बताए AI के खतरे
लेकिन इसमें एक बहुत ही बड़ा पहलू भी है. जिस तरह की सुविधाएं और माहौल यूरोप और अमेरिका में वैज्ञानिकों के लिए है, वह दुनिया में कहीं नहीं है. हां ये सच है कि इजरायल, दक्षिण कोरिया और चीन ने इस दिशा में काफी तरक्की की है. भारत अभी काफी पीछे है, लेकिन जीरो भी नहीं है. स्पेस रिसर्च में भारत यूरोप तक को टक्कर दे रहा है. लेकिन अगर भारत नोबेल पुरस्कारों में अपना नाम अधिक लिखवाना चाहता है तो हमें अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं के साथ साइंस रिसर्च के लिए बहुत ही मजबूत माहौल विकसित करना होगा.
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Vikas Sharma
As an exclusive digital content Creator, specifically work in the area of Science and technology, with special interest in International affairs. A civil engineer by education, with vast experience of training...और पढ़ें
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