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NASA ने ISS के लिए तैयार किए 2.3 करोड़ के टॉयलेट्स, जानिए कितने हैं खास

NASA ने ISS के लिए तैयार किए 2.3 करोड़ के टॉयलेट्स, जानिए कितने हैं खास

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नासा (NASA) ने इनटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उन्नत किस्म के टॉयलेट (Toilets) तैयार किए हैं जो पुराने सिस्टम से ज्यादा आसान और बेहतर हैं.

NASA ने ISS के लिए तैयार किए 2.3 करोड़ के टॉयलेट्स, जानिए कितने हैं खासZoom
नासा (NASA) के नए और बेहतर टॉयलेट्स (Toilets) ISS जाने के लिए तैयार हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) की अंतरिक्ष यात्रा को आसान और बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता किसी से छिपी नहीं हैं. अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research में नासा वैसे तो इन दिनों अपने ज्यादा ध्यान चार साल बाद दो लोगों को चंद्रमा (Moon) पर भेजने की तैयारी पर दे रहा है, लेकिन वह अंतरिक्ष में लंबे समय तक यात्रियों के रहने संबंधी समस्याओं पर भी बहुत बारीकी से काम रहा है. इसी के तहत अब नासा 2.3 करोड़ डॉलर के नए और उन्नत टॉयलेट्स (Toilets) इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए भेजने के लिए तैयार है.
पुराने सिस्टम से बेहतर
एक अमेरिकी करदाता को इन टॉलेट्स की कीमत 2.3 करोड़ डॉलर पड़ी है. लेकिन ये टॉयलेट अंतरिक्ष यात्रियों की सफर काफी आसान बनाने वाले हैं जिसमें ISS में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स भी शामिल हैं. इसके साथ ही यह वेस्ट को रीसाइकिल भी बेहतर तरीके से कर सकेंगे.
कितने अलग हैं अभी के टॉयलेट से
इस टॉयलेट सिस्टम का नाम  यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (UWMS) है. ये नए टॉयलेट्स फिलहाल स्पेस स्टेशन में उपलब्ध टॉलेट्स के मुकाबले छोटे हैं. आकार के लिहाज से ये 65 प्रतिशत छोटे हो गए हैं और वहीं वजन के लिहाज से ये 40 प्रतिशत छोटे हो गए हैं. इसके अलावा इनमें फुटरेस्ट और हैंडल की सुविधाएं भी है जो क्रू सदस्यों को नाजुक मौकों पर उड़ने से रोकने में मददगार साबित होंगे.

अंतरिक्ष (Space) में नित्य कर्मों से निपटने का काम गुरूत्व (Gravity) के न होने से मुश्किल हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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सफाई रखरखाव आसान
यह नई डिजाइन महिला अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी एक अच्छी खबर की तरह साबित होगी. नासा का कहना है कि यह नया उपकरण उपयोग में तो आसान है ही, उसका रखरखाव और साफ सफाई करना भी आसान और तेज है.
कैसे काम करेगा सिस्टम
क्रू के सदस्य एक फनल में पेशाब करेंगे जो एक होज (Hose) से जुड़ा होगा.  वहीं पेट साफ करने के लिए उन्हें क नई सीट उपयोग मिली है.  एक टाइटेनियम डुअल फैन सैपरेटर कचरे को अलग कर खींच लेगा. इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह अब पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो गया है. वहीं एक नया सिस्टम भी है जो स्पेस स्टेशन में बेहतर गंध को बनाए रखने में मददगार होगा.
और क्या होगा इस कचरे का
जमा की गई पेशाब का पहले ट्रीटमेंट होगा और उसे स्टेशन में ही रीसाइकिल कर सीधे पानी में बदल दिया जाएगा. वहीं मल पदार्थ कंटेनर्स में स्टोर किया जाएगा और वापस पृथ्वी पर विश्लेषण के लिए भेज दिया जाएगा. लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा वायुमंडल में जलने के लिए छोड़ दिया जाएगा जबकि टॉयलेट पेपर, ग्लोव्स जैसी चीजें वाटर प्रूफ बैग में फेंक दी जाएंगी.

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का विधटन (Dismantling) साल 2024 से शुरू हो जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

तो क्या हटाया जाएगा पुराना सिस्टम
यह नया सिस्टम तीन साल के लिये टेस्ट किया जाएगा. लेकिन इसके लगने के साथ पुराने सिस्टम को हटाया नहीं जाएगा. यह तब तक रहेंगे जब तक कि साल 2024 में स्पेस स्टेशन का विघटन शुरू नहीं हो जाता. यह नया सिस्टम भविष्य के लिए चंद्रमा और मंगल अभियानों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है.
गौरतलब है कि नासा ने हाल ही में युवाओं को चंद्रमा के लिए टॉयलेट डिजाइन करने का आग्रह करते हुए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया था. अंतरिक्ष और चंद्रमा में गुरुत्व का बहुत अधिक अंतर आ जाता है. चंद्रमा पर गुरुत्व पृथ्वी के गुरुत्व का 16.6 प्रतिशत ही होता है. इसलिए अंतरिक्ष के लिए टॉयलेट चंद्रमा के टॉयलेट से अलग साबित हो जाएंगे. ऐसे में चंद्रमा के लिये टॉयलेट अलग डिजाइन के होंगे.
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