जानिए सैटेलाइट और उनका कचरा कैसे बढ़ा रहा है रात के आकाश में प्रकाश प्रदूषण

रात्रिकालीन आकाश (Night Sky) में प्रकाश का प्रदूषण (Light Pollution) उम्मीद से कहीं ज्यादा हो गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

रात्रिकालीन आकाश (Night Sky) में प्रकाश का प्रदूषण (Light Pollution) उम्मीद से कहीं ज्यादा हो गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी की कक्षा (Orbit of Earth) में सैटेलाइट (Satellite) और उनके कचरे की बढ़ती संख्या रात्रिकालीन आकाश (Night Sky) में प्रकाश प्रदूषण (light Pollution) बढ़ा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 3:09 PM IST
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वैज्ञानिकों को लगता हैकि पृथ्वी की कक्षा (Orbit of Earth) में चक्कर लगा रहे कृत्रिम पिंड (Artificial Objects) रात के आसमानों (Night Sky) की चमक बढ़ा रहे हैं. यह चमक (Brightness) जितना समझा जा रहा था उससे कहीं ज्यादा है. हालिया शोधके मुताबिक  पृथ्वी का चक्कर लगा रही चीजों की संख्या हमारे पूरे ग्रह के ऊपर के आसमान की चमक 10 प्रतिशत तक बढ़ा रहे हैं.

उम्मीद से ज्यादा प्रकाश प्रदूषण

यह शोध मंथली नोटेसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है. 40 साल पहले खगोलविदों ने एक सीमा तय की थी, अब यह सीमा पार हो गई है जिससे आसामान अब प्रकाश प्रदूषण से ग्रस्त है.  स्लोवाकिया में स्लोवाक एकेडमी ऑफ साइंसेस कमेनियस यूनिवर्सिटी के मिरोस्लाव कोसिफाज इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता है.

चौंकाने वाले नतीजे
कोसिफाज ने अपने बयान में बताया, “हमने आकाशीय चमक में मामूली बढ़त की उम्मीद की थी. लकिन हमारे पहले सैद्धांतिक अनुमान बहुत ही ज्यादा चौंकाने वाले साबित हुए हैं. यह पहला शोध है जिसने अंतरिक्ष की चीजों का रात के आसमान पर असर का आंकलन किया है. जबकि इससे पहले विशिष्ठ उपग्रहों और अंतरिक्ष के कचरों का खगोलविदों की आकाशीय तस्वीरों के प्रभाव का अध्ययन हुआ था.

खास तरह का मॉडल

स्लोवाकिया, स्पेन और अमेरिका के शोधकर्ताओं की टीम ने अंतरिक्ष की वस्तुओं का रात के आकाश की चमक में योगदान का मॉडल बनाया है. इसके लिए उन्होने वस्तों की चमक और उनके आकार का वितरण का उपयोग किया है. इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने काम कर रहे सैटेलाइट और रॉकेट के अवशेषों दोनों को शामिल किया है.



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इस प्रकाश का प्रदूषण (Light Pollution) की वजह सैटेलाइट और उनके कचरा में बेतहाशा वृद्धि है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


यह होता है बड़ा असर

जहां टेलीस्कोप और संवेदनशील कैमरा प्रायः अंतरिक्ष के सुदूर पिंडों का प्रकाश के बिंदुओं के रूप में विभेदन करते हैं. कम विभेदन वाले प्रकाश पकड़ने वाली मानवीय आंखें केवल इन पिंडों का संयुक्त प्रभाव देख पाती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन पिंडों का प्रभाव यह है कि रात के आसमान में बिखरी हुई चमक का प्रभाव बढ़ जाता है. इससे हमारी गैलेक्सी मिल्कीवे की तारों के बादलो की चमक छिप जाती है, जैसा कि प्रकाश से दूषित शहरों में भी होता है.

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लंबे भौगोलिक क्षेत्रों तक पहुंच

इंटरनेशनल डार्क स्काय एसोसिएशन के लोकनीति निदेशक और इस अध्ययन के सहलेखक जॉन बैरनटाइन कहते हैं कि जमीन के प्रकाश प्रदूषण के विपरीत यह रात के आसमान में कृत्रिम प्रकाश पृथ्वी की सतह से लंबी दूरी तक देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि खगोलविदों ने शहरों के  प्रकाश से दूर रात के काले आसामान के लिए वेधशालाएं बनाई हैं. लेकिन इस प्रकाशीय प्रदूषण की ज्यादा विशाल भौगोलिक पहुंच है.

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आने वाले समय में संचार सैटेलाइट की संख्याओं में वृद्धि समस्या को और गंभीर बना देगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


सैटेलाइट समूह की बाढ़

हाल के सालों में खगोलविदो ने हमारे नीले ग्रह के चक्कर लगाने वाले पिंडों की संख्या में वृद्धि पर असहजता दर्शाई है. अब तो बड़ी संख्या में छोटे संचार सैटेलाइट्स के ‘मेगा कोन्सटेलेशन्स’ या समूह आ गए हैं और आने वाले समय के में इनकी संख्या में कई गुना वृद्धि होने वाली है जिससे अंतरिक्ष में प्रकाश प्रदूषण और ज्यादा बढ़ेगा.

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अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन और संयुक्त राष्ट के ऑफिस फॉर आउटर स्पेस अफेयर्स ने सैटेलाइट के इन समूहों को खगोलविज्ञान के लिए बहु बड़ा खतरा बताया है. शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस अध्ययन से सैटेलाइट ऑपरेटर्स और खगोलविदों के बीच चल रही चर्चा में बदलाव आएगा और पृथ्वी की कक्षा के सही प्रबंधन का रास्ता निकलेगा.
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