ओपेक क्या है, ये किस तरह तेल के दाम घटाता और बढ़ाता है?

ओपेक के फैसले का प्रभाव कुछ दिन के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन लंबे समय के लिए ओपेक के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देना जारी रखना कठिन हो जाएगा.
ओपेक के फैसले का प्रभाव कुछ दिन के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन लंबे समय के लिए ओपेक के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देना जारी रखना कठिन हो जाएगा.

ओपेक के फैसले का प्रभाव कुछ दिन के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन लंबे समय के लिए ओपेक के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देना जारी रखना कठिन हो जाएगा.

  • Share this:
पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का संगठन, जिसे ओपेक भी कहा जाता है, 1960 के दशक में तेल उत्पादन, कीमतों और नीतियों के समन्वय के लिए बना एक अंतर-सरकारी संगठन है. आज ओपेक में 14 सदस्य देशों का समावेश है जिसका प्राथमिक लक्ष्य वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करना है, जो कि दोनों उत्पादकों और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं पर संतुलित रूप से काम करता है.

तेल व्यापार व्यवसाय से जुड़े ज्यादातर लोग जानते और समझते हैं कि ओपेक के कुछ भी निर्णय लेने से बाजार में बेचे जाने वाले तेल की कीमत को प्रभावित किया जा सकता है. विश्व के मामलों पर ओपेक का प्रभाव न केवल तेल उद्योग में शामिल कंपनियों के लाभ को प्रभावित करता हैं, बल्कि परिवहन, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र को भी प्रभावित करता है.





तेल का कारोबार करने वाली कंपनियां ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग ब्रोकरों का उपयोग करके तेल मूल्य को घटा-बढ़ा कर लाभ उठा सकती हैं. इससे उन्हें खुले तौर पर तेल को खरीदने और बेचने की अनुमति मिलती है लेकिन यह इसपर भी निर्भर करता है कि बाजार से मंदी है या नहीं.
यूएफएक्स का व्यापार मंच पूरे ऑनलाइन व्यापार उद्योग में एक बड़ा मंच है. इसके उन्नत व्यापारिक उपकरण और चार्ट सबसे महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए रीयल-टाइम पहुंच के साथ समझदार व्यापारियों को सुविधा देते हैं. इस तरह उन्हें बेरतरीन स्थितियों के दौरान व्यापार करने की छूट मिलती है.

ओपेक तेल की कीमतों को कैसे नियंत्रित करता है?

तेल बाजार पर ओपेक के सबसे शक्तिशाली उपकरणों में से एक उत्पादन में कटौती है. सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटे के माध्यम से आउटपुट को कम करके तेल उत्पादन और तेल की कीमतों के विश्व स्तर पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. ओपेक सदस्यों द्वारा पहला औपचारिक उत्पादन समझौता 1982 में वापस आया था, जब 13 सदस्यों ने प्रतिदिन 17.5 मिलियन बैरल के कुल उत्पादन को प्राप्त करने के लिए अपने दैनिक उत्पादन को लगभग 700,000 बैरल तक कम करने का फैसला किया था.



पिछले नवंबर में, ओपेक के सदस्यों और गैर-सदस्यों ने समान रूप से वैश्विक बाजार में मजबूत "असंतुलन और अस्थिरता" से निपटने के लिए तेल उत्पादन को कम करने का फैसला किया था. संगठन ने फैसला किया कि 1 जनवरी 2017 से, उत्पादन प्रति दिन 1.2 मिलियन बैरल कम कर अधिकतम 32.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर निर्धारित किया जाएगा. प्रारंभिक समझौता 6 महीने तक चलना था, लेकिन बाद में इसे 6 महीने तक बढ़ा दिया गया.

ओपेक के फैसले का प्रभाव कुछ दिन के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन लंबे समय के लिए ओपेक के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देना जारी रखना कठिन हो जाएगा. अन्य महत्वपूर्ण कारक भी अब मैदाम में हैं जैसे कि अमेरिका का तेजी से बढ़ते शेल तेल का उत्पादन और ओपेक के प्रयासों के प्रभाव को कम करने की कोशिश करना.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज