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साल के अंत में पुतिन भारत आएंगे तो वारंट के बावजूद क्यों नहीं होगी गिरफ्तारी

Explainer: जब साल के अंत में पुतिन भारत आएंगे तो इंटरनेशनल वारंट के बावजूद क्यों नहीं होगी गिरफ्तारी

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Why Putin Will Not Be Arrested: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इस साल के अंत में भारत आएंगे. आईसीसी वारंट के बावजूद भारत उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगा, क्योंकि भारत आईसीसी का सदस्य नहीं है.

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साल के अंत में पुतिन भारत आएंगे तो वारंट के बावजूद क्यों नहीं होगी गिरफ्तारीZoom
पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन.
Why Putin Will Not Be Arrested: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत की यात्रा करेंगे. पुतिन की यात्रा की तारीखें अभी तय की जा रही हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को अपनी मास्को यात्रा के दौरान इसकी पुष्टि की. रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगू के साथ बातचीत में डोभाल ने कहा कि नई दिल्ली आगामी बैठक को लेकर ‘उत्साहित और प्रसन्न’ है. उन्होंने पिछले भारत-रूस शिखर सम्मेलनों को द्विपक्षीय संबंधों में ‘महत्वपूर्ण क्षण’ बताया और आगामी बैठक के महत्व पर जोर दिया 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी.

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूसी राष्ट्रपति पुतिन ज्यादा विदेश यात्राएं नहीं कर रहे हैं. इसके पीछे वाजिब कारण भी हैं. आखिरकार पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से गिरफ्तारी का वारंट जारी है. यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद आईसीसी ने पुतिन के खिलाफ ‘युद्ध अपराधों’ के लिए वारंट जारी किया है. पुतिन, क्रेमलिन के कुछ अन्य सदस्यों के साथ यूक्रेन से बच्चों के अपहरण में कथित संलिप्तता के लिए वांछित हैं. कहा जाता है कि रूस द्वारा सैकड़ों, बल्कि हजारों बच्चों का अपहरण किया गया है. ऐसा क्यों है कि पुतिन गिरफ्तारी का वारंट होने के बाद भी बेफिक्र होकर यात्रा की योजना बना रहे हैं.
आईसीसी का सदस्य नहीं है भारत
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) रोम संविधि (Rome Statute) नामक एक संधि के तहत काम करता है. भारत इस संधि का हस्ताक्षरकर्ता या सदस्य देश नहीं है. आईसीसी के वारंट को लागू करने की कानूनी बाध्यता केवल उन देशों पर होती है जो इसके सदस्य हैं. चूंकि भारत आईसीसी का सदस्य नहीं है, इसलिए वह कानूनी तौर पर पुतिन को गिरफ्तार करने के लिए बाध्य नहीं है. इसीलिए पुतिन के खिलाफ आईसीसी द्वारा जारी किए गए गिरफ्तारी के वारंट के बावजूद भारत यात्रा पर उनकी गिरफ्तारी की संभावना नहीं है. 
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किन देशों में हो सकती है गिरफ्तारी
रोम संविधि के अनुसार किसी व्यक्ति को तभी गिरफ्तार किया जा सकता है जब वह किसी ऐसे देश की सीमा में प्रवेश करता है, जो आईसीसी का सदस्य हो. भारत ने कभी भी इस संधि का अनुमोदन नहीं किया है, इसलिए यह वारंट भारत में लागू नहीं होता है. भारत अपनी संप्रभुता (Sovereignty) को महत्व देता है और मानता है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों को राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करना चाहिए. भारत ने ऐतिहासिक रूप से ऐसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों से दूरी बनाए रखी है जो उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता पर सवाल उठा सकते हैं.
कैसे काम करता है आईसीसी
यह न्यायालय जिसे हेग के नाम से भी जाना जाता है नीदरलैंड में स्थित है. इसकी स्थापना 2002 में मानवता के विरुद्ध अपराधों, युद्ध अपराधों और नरसंहार के लिए राजनेताओं को जवाबदेह ठहराने के उद्देश्य से की गई थी. 100 से ज्यादा देश हेग के सदस्य हैं, जिनमें यूक्रेन सबसे नया सदस्य है. हालांकि, अमेरिका, रूस और चीन को अभी इसमें शामिल होना बाकी है. समस्या यह है कि इसके पास अपनी कोई शक्ति नहीं है. इसके बजाय यह जारी किए गए गिरफ्तारी वारंटों पर कार्रवाई के लिए सदस्य देशों पर निर्भर है. लेकिन सदस्य देश अक्सर ऐसा नहीं करते. यही वजह है कि पुतिन आईसीसी के सदस्य मंगोलिया की यात्रा कर चुके हैं. पुतिन चीन और उत्तर कोरिया भी जा चुके हैं, जो आईसीसी के सदस्य नहीं हैं. कहा जा रहा है कि पुतिन संयुक्त अरब अमीरात भी जा रहे हैं, जो आईसीसी का सदस्य नहीं है. 
अमेरिका और रूस हैं इसके खिलाफ
अदालत ने पांच दर्जन से ज्यादा वारंट जारी किए हैं. हालांकि, इनमें से 30 नामजद लोग अभी भी फरार हैं. कई मामलों में आईसीसी ही कई लोगों के लिए अंतिम विकल्प है. मूलतः, यह उन लोगों पर मुकदमा चलाता है जिन्हें दूसरे देश चुनौती नहीं दे सकते या देना नहीं चाहते. अमेरिका और रूस दोनों ही इस अदालत के खिलाफ खड़े हुए हैं. ट्रंप ने यह कदम आईसीसी अभियोजक करीम खान द्वारा गाजा में कथित युद्ध अपराधों के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ वारंट जारी करने के बाद उठाया. नेतन्याहू ने वारंट को ‘बेतुका’ बताया है. ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी पर प्रतिबंध लगा दिया है और उस पर अमेरिका और इजरायल को निशाना बनाकर ‘अवैध और निराधार कार्रवाई’ करने का आरोप लगाया है.
पिछले साल दो बार मिले थे मोदी-पुतिन
पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की दो बार मुलाकात हुई थी. पहली मुलाक़ात जुलाई में 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान हुई थी. जो उनके तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा थी. इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित किया गया था. दोनों नेताओं की अक्टूबर में कजान में फिर मुलाकात हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे.
आने वाले समय में ट्रंप से भी मिलेंगे पुतिन
पुतिन की यह भारत यात्रा ऐसे संवेदनशील समय में हो रही है, जब भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद को लेकर नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार तनाव बढ़ रहा है. बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद का हवाला देते हुए भारतीय आयातों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया. अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल के खरीदारों पर प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी है. बशर्ते मास्को शुक्रवार तक यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने पर सहमत न हो. यह युद्ध अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर रहा है. इस बीच, क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि आने वाले दिनों में राष्ट्रपति पुतिन के भी ट्रंप से मिलने की उम्मीद है.
भारत और रूस के साथ संबंध
भारत और रूस के बीच गहरे रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं. दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय रिश्ते हैं. भारत ने यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस के खिलाफ कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया है. ऐसे में पुतिन को गिरफ्तार करना भारत के विदेश नीति और भू-राजनीतिक हितों के खिलाफ होगा.
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