दोपहर के बाद हमारा शरीर क्यों निढाल होने लगता है, सुस्त से दिनभर चुस्त बने रहने के लिए क्या करें?
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Agency:News18Hindi
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Afternoon Tiredness - काफी लोगों को दोपहर में खाना खाने के बाद या बिना खाना खाए भी उबासियां आनी शुरू हो जाती हैं. शरीर अजीब सी थकान महसूस करने लगता है. कुछ लोगों को दोपहर बाद सोने की आदत भी पड़ जाती है. विज्ञान के नजरिये से समझतें हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

Afternoon Slumps: आपने अपने कुछ साथियों को लंच के बाद ऑफिस में उबासियां लेते हुए या कुछ देर के लिए सोते हुए देखा होगा. हो सकता है कि कभी खुद भी लंच करने के कुछ समय बाद नींद का अनुभव किया हो. घर में अपने बड़ों को दोपहर बाद सोते हुए देखा होगा. कई बार दोपहर के बाद ऐसा लगता है, जैसे हमारा शरीर निढाल हो रहा है. ऐसे में कुछ देर की नींद या पावर नैप आपने भी लिया हो सकता है. कभी सोचा है कि अक्सर दोपहर बाद ही ऐसा क्यों होता है? हमारे शरीर में दोपह का खाना खाने के बाद ऐसा क्या बदलाव होता है कि नींद आने लगती है, जबकि भोजन तो हमारे शरीर को एनर्जी देता है?
विज्ञान के मुताबिक, जब आपको खाना खाने के बाद उनींदापन के साथ शरीर में मामूली दर्द महसूस होता है तो इसे ‘फूड कोमा’ कहा जाता है. हालांकि, अब तक इंसानों में इसका कोई ठोस कारण सामने नहीं आ पाया है, लेकिन वैज्ञानिकों ने रोडेंट्स, फ्रूट फ्लाइस और नेमाटोकड वॉर्म्स पर कुछ प्रयोग कर इसे समझने की कोशिश की है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हाई कार्ब और हाई शुगर फूड खाने के कारण इंसानों में सुस्ती ज्यादा होने की संभावना रहती है. आलू, ब्रेकफास्ट सीरियल्स और सफेद ब्रेड में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो शरीर में शुगर को तेजी से बढ़ाता है.
निढाल क्यों हो जाता है शरीर
ब्लड ग्लूकोज बढ़ने पर शरीर को ज्यादा इंसुलिन प्रोड्यूस करने का निर्देश मिलता है. इससे शरीर में कुछ जैविक घटनाएं होनी शुरू हो जाती हैं. ऐसे में मांसपेशियों और वसा कोशिकाओं को ग्लूकोज लेना पड़ता है. इस पूरे घटनाक्रम से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ सकता है और कम एनर्जी महसूस होने लगती है. आसान भाषा में कहें तो दोपहर का असंतुलित भोजन करने के बाद शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने से शरीर निढाल होने लगता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब आप खाना खाते हैं तो शरीर अपने पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर देता है. इसके बाद ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में चला जाता है, जो सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम के ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड के उलट होता है.
ब्लड ग्लूकोज बढ़ने पर शरीर को ज्यादा इंसुलिन प्रोड्यूस करने का निर्देश मिलता है. इससे शरीर में कुछ जैविक घटनाएं होनी शुरू हो जाती हैं. ऐसे में मांसपेशियों और वसा कोशिकाओं को ग्लूकोज लेना पड़ता है. इस पूरे घटनाक्रम से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ सकता है और कम एनर्जी महसूस होने लगती है. आसान भाषा में कहें तो दोपहर का असंतुलित भोजन करने के बाद शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने से शरीर निढाल होने लगता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब आप खाना खाते हैं तो शरीर अपने पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर देता है. इसके बाद ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में चला जाता है, जो सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम के ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड के उलट होता है.
दोपहर का असंतुलित भोजन करने के बाद शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने से शरीर निढाल होने लगता है.
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क्यों आती है दोपहर में नींद
आपके शरीर का ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट मोड’ किस हद तक आपको नींद की ओर ले जाता है, ये इस पर निर्भर करता है कि आप एक बार में कितना खाना खाते हैं. ज्यादा भोजन के लिए ज्यादा आराम की जरूरत होती है. एमिनो एसिड ट्रिप्टोफैन भोजन के बाद उनींदापन में भी भूमिका निभा सकता है. ट्रिप्टोफैन अंडे, मछली और मांस समेत कई प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थों में होता है. इंसुलिन मांसपेशियों में कुछ अमीनो एसिड के अवशोषण को उत्तेजित करता है, लेकिन ट्रिप्टोफैन को नहीं. यह ट्रिप्टोफैन को अमीनो एसिड ट्रांसपोर्टर पर मस्तिष्क में ट्रैवल के लिए छोड़ देता है. वहां यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन में बदल जाता है. ये दोनों केमिकल नींद को बढ़ाते हैं.
आपके शरीर का ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट मोड’ किस हद तक आपको नींद की ओर ले जाता है, ये इस पर निर्भर करता है कि आप एक बार में कितना खाना खाते हैं. ज्यादा भोजन के लिए ज्यादा आराम की जरूरत होती है. एमिनो एसिड ट्रिप्टोफैन भोजन के बाद उनींदापन में भी भूमिका निभा सकता है. ट्रिप्टोफैन अंडे, मछली और मांस समेत कई प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थों में होता है. इंसुलिन मांसपेशियों में कुछ अमीनो एसिड के अवशोषण को उत्तेजित करता है, लेकिन ट्रिप्टोफैन को नहीं. यह ट्रिप्टोफैन को अमीनो एसिड ट्रांसपोर्टर पर मस्तिष्क में ट्रैवल के लिए छोड़ देता है. वहां यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन में बदल जाता है. ये दोनों केमिकल नींद को बढ़ाते हैं.
‘फूड कोमा’ से कैसे बचें
भोजन निश्चित तौर पर हमारे शरीर को ऊर्जा देता है, लेकिन अलग-अलग तरह के भोजन शरीर पर अलग असर डालते हैं. खाना खाने के बाद थकान महसूस करना किसी-किसी के लिए आम बात हो सकती है, लेकिन ये हमारे शरीर पर विपरित असर भी डाल सकती है. इसलिए भोजन करते समय सावधानी बरतनी ही चाहिए. फूड कोमा से बचने का सबसे अच्छा तरीका सैंडविच या चावल जैसे हाई कार्ब खाद्य पदार्थों से बचना है. चीजों को संतुलित करने के लिए कुछ प्रोटीन, वसा और सब्जियां अपने भोजन में शामिल करें. साथ ही एक बार में बहुत ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए.
भोजन निश्चित तौर पर हमारे शरीर को ऊर्जा देता है, लेकिन अलग-अलग तरह के भोजन शरीर पर अलग असर डालते हैं. खाना खाने के बाद थकान महसूस करना किसी-किसी के लिए आम बात हो सकती है, लेकिन ये हमारे शरीर पर विपरित असर भी डाल सकती है. इसलिए भोजन करते समय सावधानी बरतनी ही चाहिए. फूड कोमा से बचने का सबसे अच्छा तरीका सैंडविच या चावल जैसे हाई कार्ब खाद्य पदार्थों से बचना है. चीजों को संतुलित करने के लिए कुछ प्रोटीन, वसा और सब्जियां अपने भोजन में शामिल करें. साथ ही एक बार में बहुत ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए.
थका हुआ क्यों लगता है
हमारे शरीर का अंदरुनी तंत्र भोजन को पचाने के लिए काम करता है, जिसमें काफी ऊर्जा खर्च होती है. इसीलिए जब हम ज्यादा खाना खा लेते हैं तो हम ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं. लिहाजा, जरूरत से ज्यादा खाना खा लेना शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. कुछ शोध में बताया गया है कि छोटी आंत से निकलने वाले हार्मोन ‘कोलेसिस्टोकिनिन’ सुस्ती के लिए जिम्मेदार है. हाई फैट और कैलोरी से भरपूर पनीर का टुकड़ा या पिज्जा खाने से कोलेसिस्टोकिनिन रिलीज होती है. एक शोध से पता चला है कि इसमें वृद्धि से भी आपको नींद आ सकती है. वहीं, शराब पीने वालों को भी दोपहर में बहुत नींद आती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शराब हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को बंद कर देती है, जिसके कारण हमें नींद आती है.
हमारे शरीर का अंदरुनी तंत्र भोजन को पचाने के लिए काम करता है, जिसमें काफी ऊर्जा खर्च होती है. इसीलिए जब हम ज्यादा खाना खा लेते हैं तो हम ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं. लिहाजा, जरूरत से ज्यादा खाना खा लेना शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. कुछ शोध में बताया गया है कि छोटी आंत से निकलने वाले हार्मोन ‘कोलेसिस्टोकिनिन’ सुस्ती के लिए जिम्मेदार है. हाई फैट और कैलोरी से भरपूर पनीर का टुकड़ा या पिज्जा खाने से कोलेसिस्टोकिनिन रिलीज होती है. एक शोध से पता चला है कि इसमें वृद्धि से भी आपको नींद आ सकती है. वहीं, शराब पीने वालों को भी दोपहर में बहुत नींद आती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शराब हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को बंद कर देती है, जिसके कारण हमें नींद आती है.
छोटी आंत से निकलने वाले हार्मोन ‘कोलेसिस्टोकिनिन’ में बढ़ाेतरी से भी शरीर में सुस्ती बढ़ने लगती है.
इससे बचने को क्या खाएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अग आप नाश्ते में पौष्टिक चीजें लेते हैं तो पूरा दिन एनर्जी बनी रहती है और नींद भी नहीं आती है. जो लोग हमेशा या अक्सर ब्रेकफास्ट नहीं करके सीधे लंच करते हैं, उनमें ये समस्या ज्यादा होती है. दरअसल, ऐसे लोग सुबह के छोड़े हुए नाश्ते की भरपाई के लिए लंच में हैवी मील लेते हैं, जिससे उन्हें आलस भी ज्यादा आता है. ब्रेकफास्ट में होल ग्रेन प्रोडक्ट्स, ओट्स, ब्राउन ब्रेड, अंडे, ऑमलेट और फ्रूट खाएं. पूरे दिन फुर्तीला बने रहना चाहते हैं तो शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए समय-समय पर पानी पीते रहें. बॉडी डिहाइड्रेट होने पर शरीर में सुस्ती महसूस होती है और काम करने में दिक्कत होने लगती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अग आप नाश्ते में पौष्टिक चीजें लेते हैं तो पूरा दिन एनर्जी बनी रहती है और नींद भी नहीं आती है. जो लोग हमेशा या अक्सर ब्रेकफास्ट नहीं करके सीधे लंच करते हैं, उनमें ये समस्या ज्यादा होती है. दरअसल, ऐसे लोग सुबह के छोड़े हुए नाश्ते की भरपाई के लिए लंच में हैवी मील लेते हैं, जिससे उन्हें आलस भी ज्यादा आता है. ब्रेकफास्ट में होल ग्रेन प्रोडक्ट्स, ओट्स, ब्राउन ब्रेड, अंडे, ऑमलेट और फ्रूट खाएं. पूरे दिन फुर्तीला बने रहना चाहते हैं तो शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए समय-समय पर पानी पीते रहें. बॉडी डिहाइड्रेट होने पर शरीर में सुस्ती महसूस होती है और काम करने में दिक्कत होने लगती है.
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Amrit Chandra
1999 से फ्रीलांस और 2004 से मेनस्ट्रीम मीडिया में सक्रिय हैं. ऑल इंडिया रेडियो और प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले तीन साल से ज्यादा समय से News18H...और पढ़ें
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