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दोस्ती, मोहब्बत और बनारसी ठसक...सब कुछ एक ही किताब में: बनारसी अफ़साने

दोस्ती, मोहब्बत और बनारसी ठसक...सब कुछ एक ही किताब में: बनारसी अफ़साने

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'बनारसी अफसाने' बनारस की गलियों, घाटों और वहां की संस्कृति को कहानियों के जरिए जीवंत कर देती है. यह कहानी-संग्रह पाठकों को प्रेम, दोस्ती और जीवन की गहराइयों को बनारसी अंदाज में महसूस कराने वाला भावनात्मक अनुभव देता है.

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Banarasi Afsane: प्रियंवदा दीक्षित का कहानी-संग्रह “बनारसी अफ़साने” बनारस की गलियों, घाटों और वहां की सांस लेती संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है. यह संग्रह केवल कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि उन आवाजों और अनुभवों की परछाई है, जो पीढ़ियों से बनारस की मिट्टी में रची-बसी हैं. कथाएं गंगा की लहरों की तरह बहती हैं – कभी सुकून देती हुई, तो कभी भीतर के द्रवित दर्द को उजागर करती हैं.

इस संग्रह की विशेषता यह है कि इसमें रिश्तों, दोस्ती, प्रेम और खोए हुए वादों की झलक बनारसी अंदाज में दर्ज है. कहानियां बेहद आत्मीय हैं – कहीं चाय की चुस्कियों में डूबा हंसी-मजाक है, तो कहीं गहरी उदासी में सुलगता अतीत. लेखक ने पात्रों के संवादों और स्थितियों को इतना सहज और असली रूप दिया है कि पाठक खुद को घाट पर बैठा, उन किरदारों के बीच महसूस करता है.
‘बनारसी अफसाने’ उन सबके लिए है, जिन्होंने कभी प्रेम को जिया है, दोस्ती को निभाया है और बनारस को सिर्फ आंखों से नहीं, बल्कि दिल से महसूस किया है. यह संग्रह आधुनिक हिंदी साहित्य में एक ताजा और यादगार अनुभव है. यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है, जो सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि महसूस करना चाहते हैं. बनारस की हवा, यादें और मोहब्बत हर पृष्ठ में सांस लेती प्रतीत होती हैं. निस्संदेह, यह संग्रह आधुनिक हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है और पाठकों को आत्मीयता से बांध लेने की शक्ति रखता है.
प्रियंवदा दीक्षित ने भाषा को किसी साहित्यिक प्रयोगशाला की तरह नहीं, बल्कि एक खुले मंच की तरह प्रस्तुत किया है – जहां पढ़ने वाला सहज ही किरदारों और उनकी भावनाओं से जुड़ जाता है. कुछ कहानियां शहरी बनारस के विज्ञान और हमारी आधुनिक जिंदगी की कसक को उजागर करती हैं, तो कुछ पारंपरिक घाट – कहानी में शांति और शृंगार रस भर देती हैं.
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‘बनारसी अफसाने’ बनारस को केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदना, एक धड़कन के रूप में पाठकों के सामने लाता है. यह संग्रह उन सबके लिए है जो जीवन को गहराई से समझना चाहते हैं – चाहे वह बनारस की गलियां हों या जिंदगी की ऐसी राहें जहां शब्दों से ज़्यादा उनके अर्थ का महत्व हो.
समीक्षित कृतिः बनारसी अफसाने (कहानी संग्रह)
लेखिकाः प्रियंवदा पाठक
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