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कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे...UP के वो कवि जिन्हें बिछोह ने बनाया मशहूर

कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे... पिता का छूटा साथ तो फूफा बने मसीहा, फिर बिछोह ने बनाया मशहूर कवि

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Agency:Local18
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Gopal Das Neeraj Interesting Story In Hindi: हिन्दी के मशहूर कवि और साहित्यकार गोपालदास सक्‍सेना उर्फ 'नीरज' की आज जयंती है. गोपालदास नीरज कवि के अलावा गीतकार भी थे. उन्होंने हिन्‍दी फिल्‍मों के लिए कई गीत लिखे थे. आज उनके जन्मदिन के अवसर पर जानेंगे उनके जीवन से जुड़ी खास बातों के बारे में...

कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे...UP के वो कवि जिन्हें बिछोह ने बनाया मशहूरZoom
कवि-गीतकार गोपाल दास नीरज की आज 100वीं जयंती है.
इटावा. 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में जन्मे गोपालदास नीरज अब हमारे बीच नहीं है. उन्होंने 5 जुलाई 2018 को इस संसार को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था. भले ही नीरज आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन वह आज भी हमारे दिलों में जिंदा है. उन्होंने अपने जीवन काल में जो हिंदी साहित्य जगत को कई अनूठी काव्य रचनाएं दी वो आज भी आधुनिक हिंदी काव्य जगत में ‘मील का पत्थर’ मानी जाती हैं. हालांकि आपको जानकर हैरानी होगी कि आधुनिक हिंदी काव्य धारा में विशेष योगदान देने वाले गोपाल दास का जीवन काफी दुखों में गुजरा था. यही वजह रही कि पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले गोपालदास ने बड़ी मेहनत से मास्टर्स कर पाए थे.

6 साल की उम्र में पिता का निधन
गोपालदास के पिता का नाम ब्रज किशोर था. उनकी माता का नाम सुखदेवी था जो कि एक गृहणी थीं. कहा जाता है कि गोपालदास का बचपन काफी दुखों में गुजरा था क्योंकि 6 साल की उम्र में उनके पिता का आकस्मिक निधन हो गया था. पिता के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारी गोपाल दास पर आ गई थी. इसलिए वो अपने मां और तीन भाईयों को छोड़ अपने परिवार से दूर फूफा के घर चले गए. जहां उन्होंने प्राथमिक शिक्षा आरंभ की. जहां उन्होंने अपने घर का खर्चा चलाने और अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए उन्होंने टाइपिंग का कार्य भी किया. कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई की.
‘निशा नियंत्रण’ से हुए काफी प्रभावित
आपको जानकर हैरानी होगी कि गोपालदास लोकप्रिय कवि और अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन से काफी प्रभावित थे. उन्होंने उनकी ‘निशा नियंत्रण’ कहीं से पढ़ने को मिल गया. इससे वह बहुत प्रभावित हुए थे. इस बारे में खुद नीरज ने ही बताया था. साल 1944 में प्रकाशित ‘नीरज’ की पहली काव्य-कृति ‘संघर्ष’ से में इस बारे में बखूबी बताया गया है.
सम्मान और पुरस्कार
गोपालदास नीरज 20वीं सदी में हिंदी काव्य धारा के प्रतिनिधि रचनाकारों में से एक रहे हैं. उन्होंने आधुनिक हिंदी काव्य में अपना विशेष योगदान दिया है. उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों व सम्मान से पुरस्कृत किया जा चुका है. नीरज पद्मश्री ( 1991), पद्म भूषण (2007), फ़िल्म फेयर पुरस्कार, विश्व उर्दू परिषद पुरस्कार और यश भारती सम्मान से सम्मानित हैं.
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ब्रेकअप ने बनाया कवि!
आपको बता दें कि गोपालदास का विवाह सावित्री देवी से हुआ. इस शादी से उन्हें एक बेटा हुआ था. हालांकि, कहा जाता है कि गोपालदास ने अपनी पहली कविता हाई स्कूल पढ़ने के दौरान लिखी थी. जब वे अपने फूफा के घर रहकर हाई स्कूल में थे, तभी उनका दिल एक लड़की पर आ गया था. हालांकि उनका रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका और उनका बिछोह हो गया. वह इस बिछोह से को सहन नहीं कर सके और उनके कवि-मानस से यूं ही सहसा ये पंक्तियां निकल पड़ीं.
“कितना एकाकी मम जीवन,
किसी पेड़ पर यदि कोई पक्षी का जोड़ा बैठा होता
तो न उसे भी आंखें भरकर मैं इस डर से देखा करता,
कहीं नज़र लग जाय न इनको.”
लगातार 3 साल जीता फिल्मफेयर अवॉर्ड
नीरज का फिल्मी दुनिया से गहरा नाता रहा है. उन्होंने सालों तक कई फिल्मी गाने लिखे हैं. आज मदहोश हुआ जाये रे मेरा मन, दिल आज शायर है गम आज नगमा है, खिलते हैं गुल यहां..मिलके बिखरने, ऐ भाई जरा देख के चलो, आगे ही नहीं पीछे भी, लिखे जो खत तुझे, कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे, रंगीला रे तेरे रंग में, जैसे सदाबहार गाने आज भी लोग गुनगुनाते हैं
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