Advertisement
होमताजा खबरसाहित्यसाहित्य संसार
कहानी में अनकहा छोड़ना ही उसे गहराई देता है - मृदुला गर्ग

कहानी में अनकहा छोड़ना ही उसे गहराई देता है - मृदुला गर्ग

Last Updated:

वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला गर्ग के निबंध संग्रह साहित्य का मनोसंधान का लोकापर्ण नई दिल्ली में किया गया. मृदुला गर्ग की रचना पर बोलते हुए मशहूर शिक्षाविद् और आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि मृदुला गर्ग का नॉन फिक्शन भी फिक्शन जैसा ही रोचक होता है.

कहानी में अनकहा छोड़ना ही उसे गहराई देता है - मृदुला गर्गZoom
निबंध संग्रह साहित्य का मनोसंधान के लोकार्पण के अवसर पर पुरुषोत्तम अग्रवाल, मृदुला गर्ग और वैशाली माथुर.
“जो कहानी कुछ अनकहा छोड़ दे, वही सच्ची और उत्कृष्ट कहानी होती है.” उन्होंने बताया कि हर लेखक को वह एक खास वाक्य पता होता है, जिसे लिख देने से कहानी पूरी तरह साफ हो जाएगी, लेकिन उसे अनकहा छोड़ना ही कहानी को गहराई देता है.वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला गर्ग का ये बयान कहानी में पाठकों को स्पेस मुहैया कराता है. उन्होंने अपनी रचनाओं में भी इसका प्रयोग किया है.

साहित्यकार मृदुला गर्ग ने अपने निबंध संग्रह ‘साहित्य का मनोसंधान’ के लोकार्पण के मौके पर बोलते हुए ये बात कही. कार्यक्रम में मशहूर शिक्षाविद् और आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि लेखक अपनी भाषा में नए शब्द गढ़कर साहित्य को समृद्ध करता है, और यह खूबी मृदुला गर्ग के इस संग्रह में साफ दिखती है. उन्होंने ये भी जोड़ा,“साहित्य और मन का रिश्ता गहरा होता है. लेखक अपनी चिंताओं और सरोकारों को साहित्य में पिरोता है, जो पाठकों के दिल-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ता है.” अग्रवाल ने मृदुला गर्ग के नॉन-फिक्शन को फिक्शन की तरह रोचक बताया, जो पात्र गढ़ता है और पाठक को बाँधे रखता है.
कथाकार और अनुवादक प्रभात रंजन ने कार्यक्रम में कहा, “मृदुला गर्ग ने अपने निबंधों में साहित्य को हर कोण से परखा है. उन्होंने ऐसे मुद्दों को उठाया जो दशकों पहले भी ज्वलंत थे और आज भी प्रासंगिक हैं.” उन्होंने हिंदी साहित्य में निबंध लेखन की कमी को रेखांकित करते हुए कहा, “हिंदी में ऐसी लेखिकाएँ कम हैं जो मृदुला जी की तरह निबंध लिख सकें. उनके लेखन में साफगोई, साहस और मौलिकता है, जैसा कि मनोहर श्याम जोशी ने कहा था कि मृदुला का लेखन किसी परंपरा में नहीं बँधता.”
पुस्तक का प्रकाशन पेंगुइन ने किया है. पेंगुइन की प्रकाशक वैशाली माथुर ने इस संग्रह के प्रकाशन की यात्रा पर रोशनी डाली, जबकि संपादक संजीव मिश्रा ने मृदुला गर्ग की लेखनी के अनुभव साझा किए. कार्यक्रम में मशहूर कवयित्री अनामिका, सुमन केसरी, रोहिणी कुमारी सहित कई लेखक, पत्रकार और साहित्य प्रेमी मौजूद थे.
Advertisement
‘साहित्य का मनोसंधान’ न केवल मृदुला गर्ग की गहन साहित्यिक दृष्टि को दर्शाता है, बल्कि यह पाठकों को साहित्य और मन के बीच गहरे रिश्ते पर सोचने के लिए प्रेरित करता है. यह संग्रह हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है.कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित कुंजुम स्टोर में धूमधाम से हुआ.
और पढ़ें