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खौफ ए खुदा है दिल में तो फख्र ए ज़मीन... शंकर-शाद मुशायरे में छाए वसीम बरेलवी

आंखों देखी: खौफ ए खुदा है दिल में तो फख्र ए ज़मीन... शंकर-शाद मुशायरे में जावेद अख्तर के सामने छाए वसीम बरेलवी

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Shankar Shad Mushaira: 5 अप्रैल शनिवार को दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में शंकर-शाद मुशायरा के 56वें संस्करण का आयोजन हुआ. लोकल 18 की टीम भी मुशायरे में मौजूद रही. जावेद अख्तर, वसीम वरेलवी, अजहर इकबाल और शबीना अदीब ने मंच-माहौल दोनों लूट दिया. पढ़िए लोकल 18 संवाददाता अंजलि सिंह की रिपोर्ट...

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नई दिल्ली. शनिवार शाम (5 अप्रैल) शायरी और गजल को पसंद को करने वालों के लिए यादगार बन गई. मौका था शंकर-शाद मुशायरे के 56वें संस्करण का. इस आयोजन की मेजबानी इकबाल अशर ने की. इकबाल अशर ने इस खूबसूरत शेर के साथ मुशायरे की शुरुआत की.

“उसे बचाए कोई कैसे टूट जाने से,
वो दिल जो बाज ना आए फरेबखाने से,
वह शख्स एक ही लम्हे में टूट फूट गया,
जिसे तराश रहा था मैं एक जमाने से…”
शंकर-शाद मुशायरे के मंच पर मशहूर गीतकार और फिल्म राइटर जावेद अख्तर, शायर वसीम बरेलवी, अज़हर इकबाल, नोमान शौक़, डॉ. गौहर रज़ा, हास्यकार, व्यंग्यकार और कवि पॉपुलर मेरठी, शबीना अदीब, खुशबीर सिंह शाद, अलीना इतरत, नुसरत मेहदी और शीन काफ निज़ाम शामिल थे. सभी ने अपनी शायरी, शेर और नज्मों को पेश किया. लोग इस मुशायरे में इतना डूबे कि वक्त का पता नहीं चला.
शाम 7:30 से शुरू हुई महफिल रात देर रात 12.30 बजे तक चली. पूरा ऑडिटोरियम लोगों से खचाखच भरा रहा. सबसे ज्यादा मांग वसीम बरेलवी की रही. जैसे ही वह स्टेज पर आएं और नज़्म और शायरी पढ़ना शुरू किया, चारों तरफ से वंस मोर, वंस मोर की आवाजें गूंजने लगी. लोगों ने माइक और मंच से दूर होने नहीं दिया. उन्हें दोबारा मंच पर आना पड़ा. वसीम बरेलवी की इस शेर पर सबसे ज्यादा तालियां बजी.
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‘खौफ ए खुदा है दिल में तो फख्र ए ज़मीन हो तुम,
खौफ ए खुदा नहीं तो कहीं के नहीं हो तुम…’
उनका दूसरा शेर, ‘ज़माना मुश्किलों में आ रहा है, हमें आसान समझा जा रहा है…’ पर लोग दीवाने हो गए. आलम यह था कि वसीम बरेलवी का ऑटोग्राफ लेने के लिए बाहर भीड़ लग गई. पुलिस को बैरिकेडिंग करके लोगों को रोकना पड़ा.
भीड़ और धक्कामुक्की के बीच लोकल 18 ने उनसे खास बातचीत की. उन्होंने एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि इस मुशायरे को वह हमेशा अहमियत देते हैं, क्योंकि इससे उनका खास लगाव है. जैसा इसका इतिहास है, वैसा किसी भी मुशायरा का इतिहास नहीं है. गंगा जमुनी तहजीब को बचाने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी. ऐसा कोई मुशायरा नहीं है, जो लगातार 56 सालों से चला आ रहा हो.
वसीम बरेलवी ने कहा, “जो लोग इस मुशायरे को चलाते थे उनके घर में शंकर-शाद पैदा हुए और उन्होंने इस मुशायरे की बुनियाद रखी. इस मुशायरे में जब वह शामिल नहीं हुए थे, तो उनका सपना था कि अगर लाल किला और डीसीएम का मुशायरा उन्होंने पढ़ लिया तो हिमालय फतेह कर ली. मुशायरे को राजनीति से जोड़ने पर उन्होंने कहा कि यह मुशायरा और शायरों पर निर्भर करता है कि वह अपनी शायरी और मुशायरे को राजनीति से जोड़ना चाहते हैं या नहीं.”
जावेद अख्तर ने पढ़ी अपनी लेटेस्ट शायरी 
इस दौरान जावेद अख्तर ने अपनी कई लेटेस्ट शायरी पढ़ी, जो उन्होंने पहले इस किसी और मंच से सुनाई नहीं थी.
“ख्वाब के गांव में पले हैं हम,
पानी छलनी में ले चले हैं हम…”
इसके बाद उन्होंने  “गली में शोर था, मातम था और होता क्या, मैं घर में था मगर इस गुल में कोई सोता था…” को सुनाकर सभी को अपना दीवाना बना दिया.
माहौल लूट गए अज़हर इकबाल
इन दिनों सोशल मीडिया के रील्स में वायरल हो रहे मेरठ के अजहर इकबाल ने माहौल लूट लिया. उनके एक शेर पर जमकर तालियां बजी.
“दिल यह कहता है अगर आप हमारे होते,
अब भी प्यारे हैं, तब और भी प्यारे होते
और देख कर उसको यह ख्याल आता है,
काश शादी ना हुई होती कुंवारे होते…”
तुम्हारी दौलत नई नई है… पर झूम उठे लोग
उत्तर प्रदेश के कानपुर की पैदाइश शबीना अदीब जब आईं तो माहौल ही बदल दिया. उन्होंने अपनी सबसे मशहूर शायरी सुनाई. इस शायरी पर लोग जमकर झूमे.
“जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना,
तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई नई है…”
वहीं पॉपुलर मेरठी ने ”मैं भी चुनाव में खड़ा हो गया हूं’ सुनाकर लोगों को खूब हंसाया.” मशहूर शायर गौहर रज़ा ने कई गंभीर शेर और शायरी सुनाई.
1954 में हुई थी शंकर-शाद मुशायरे की शुरुआत
देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित इस मुशायरे की शुरुआत 1954 में हुई थी. यह जानकर आपको हैरानी होगी कि शंकर-शाद मुशायरा, दिल्ली का सबसे लंबे समय तक चलने वाला मुशायरा बन चुका है.

About the Author

निखिल वर्मा
एक दशक से डिजिटल जर्नलिज्म में सक्रिय. दिसंबर 2020 से News18Hindi के साथ सफर शुरू. न्यूज18 हिन्दी से पहले लोकमत, हिन्दुस्तान, राजस्थान पत्रिका, इंडिया न्यूज की वेबसाइट में रिपोर्टिंग, इलेक्शन, खेल और विभिन्न डे...और पढ़ें
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