खबरदार-होशियार: असंतुष्ट नेताओं पर 'विजिलेंस' टीम की नजर, आकाओं को पल-पल की खबर
Agency:News18 Madhya Pradesh
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स्थानीय नेताओं की गुटबाज़ी के कारण एआईसीसी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से कुछ लोग यहां आए है, जो चुनाव प्रबंधन देख रहे हैं. उन्हें विधानसभा सभा क्षेत्र स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी गयी हैं.

ग्वालियर लोकसभा सीट पर बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियां भीतरघातियों से डरी हुई हैं. दोनों दलों की विजिलेंस टीमें इनकी हर गतिविधि पर नजर जमाए हुए हैं और पूरी रिपोर्ट बड़े नेताओं को भेजी जा रही है. ग्वालियर चंबल संभाग में टिकट वितरण के बाद ही बीजेपी में असंतोष के स्वर उभरने लगे थे. टिकट न मिलने से कई बड़े नेता नाराज हो गए थे. मुरैना सांसद अनूप मिश्रा टिकट कटने से अब तक नाराज हैं. वो प्रचार ना करने का ऐलान कर चुके है. नारायण सिंह कुशवाह और माया सिंह भी प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं. पार्टी को आशंका है कि ये लोग भितरघात कर सकते हैं.
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वहीं कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो ऊपरी तौर पर तो प्रत्याशियों का प्रचार करते नजर आ रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाने में लगे हैं. ऐसे ही नेताओं-कार्यकर्ताओं से निपटने के लिए बीजेपी ने एक खुफिया टीम बना दी है, जो नाराज नेताओं और भितरघातियों पर नजर रखकर उनकी पल-पल की खबर अपने आकाओं को देगी.
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कांग्रेस की बात करे तो पार्ट राजा महाराजा के गुट में बटी नजर आ रही है. यही कारण है कि मंत्री इमरती देवी लोकसभा चुनाव के लिए ग्वालियर में एक भी दिन प्रचार करने नहीं आई हैं. मंत्री प्रद्यम सिंह तोमर तोमर एक दो दिन ही प्रचार करते नजर आए. दोनों मंत्री सिंधिया गुट के माने जाते हैं. और ग्वालियर के बजाए महाराजा के इलाके गुना में उनके प्रचार अभियान में जुटे हैं.
स्थानीय नेताओं की गुटबाज़ी के कारण एआईसीसी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से कुछ लोग यहां आए हैं, जो चुनाव प्रबंधन देख रहे हैं. उन्हें विधानसभा सभा क्षेत्र स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी गयी हैं.
ग्वालियर लोकसभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्ज़ा है. आगे भी उसी के पास सीट रहे इसके लिए पार्टी मश्क्कत कर रही है. कांग्रेस को इस बार अपने पक्ष में माहौल दिख रहा है इसलिए उसे यहां इस बार जीतने की उम्मीद है. दोनों दलों को अपनी जीत का भरोसा है बशर्ते भितरघाती उन्हें नुक़सान ना पहुंचाएं.
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वहीं कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो ऊपरी तौर पर तो प्रत्याशियों का प्रचार करते नजर आ रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाने में लगे हैं. ऐसे ही नेताओं-कार्यकर्ताओं से निपटने के लिए बीजेपी ने एक खुफिया टीम बना दी है, जो नाराज नेताओं और भितरघातियों पर नजर रखकर उनकी पल-पल की खबर अपने आकाओं को देगी.
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कांग्रेस की बात करे तो पार्ट राजा महाराजा के गुट में बटी नजर आ रही है. यही कारण है कि मंत्री इमरती देवी लोकसभा चुनाव के लिए ग्वालियर में एक भी दिन प्रचार करने नहीं आई हैं. मंत्री प्रद्यम सिंह तोमर तोमर एक दो दिन ही प्रचार करते नजर आए. दोनों मंत्री सिंधिया गुट के माने जाते हैं. और ग्वालियर के बजाए महाराजा के इलाके गुना में उनके प्रचार अभियान में जुटे हैं.
स्थानीय नेताओं की गुटबाज़ी के कारण एआईसीसी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से कुछ लोग यहां आए हैं, जो चुनाव प्रबंधन देख रहे हैं. उन्हें विधानसभा सभा क्षेत्र स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी गयी हैं.
ग्वालियर लोकसभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्ज़ा है. आगे भी उसी के पास सीट रहे इसके लिए पार्टी मश्क्कत कर रही है. कांग्रेस को इस बार अपने पक्ष में माहौल दिख रहा है इसलिए उसे यहां इस बार जीतने की उम्मीद है. दोनों दलों को अपनी जीत का भरोसा है बशर्ते भितरघाती उन्हें नुक़सान ना पहुंचाएं.
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