COVID-19: महाराष्ट्र पर अगस्त पड़ा भारी, एक महीने में आए करीब चार लाख कोरोना मरीज
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COVID-19: महाराष्ट्र पर अगस्त पड़ा भारी, एक महीने में आए करीब चार लाख कोरोना मरीज
महाराष्ट्र में अगस्त के महीने में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़े कोरोना मरीज। (सांकेतिक फोटो)

महाराष्ट्र में कोरोना (Corona) संक्रमण लगातार बेकाबू होता जा रहा है. अगस्त (August) के महीने में देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र (Maharashtra) में ही सामने आए है. इस पर स्वास्थ्य विभाग (Health Department) का तर्क है कि जांच ज्यादा कराने से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं.

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मुंबई. महाराष्ट्र में अगस्त के महीने में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण बेहद तेजी से बढ़ा. यह जानकारी प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताई गई है. स्वास्थ्य विभाग (health Department) के अधिकारी के अनुसार प्रदेश में अगस्त के महीने में कोरोना वायरस संक्रमण (Infection) के 3 लाख 76 हजार नए मामले सामने आए, जबकि जुलाई और जून में क्रमंश: 2 लाख 41 हजार और 1 लाख 4 हजार लोगों के टेस्ट पॉजिटिव आए थे.

स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, 'एक अगस्त तक राज्य में कोविड-19 के 4 लाख 31 हजार मरीज सामने आए थे, जो बढ़कर एक सितंबर को 8 लाख 8 हजार हो गए. यह जनवरी महीने में महामारी की शुरुआत के बाद संभवत: सबसे तेज वृद्धि है.' उन्होंने कहा कि संक्रमितों की बढ़ी हुई संख्या की एक वजह अधिक संख्या में जांच है.

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले महीने महाराष्ट्र में 20 लाख 16 हजार लोगों की जांच की गई थी. जो एक सितंबर को बढ़कर 42 लाख 11 हजार हो गई है. राज्य में कोरोना को हराने के लिए आक्रमक तरीके से जांच की जा रही है, जिससे संक्रमितों का पता लगाने में मदद मिल सके'



वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि राज्य में कोविड-19 मरीजों और इससे होने वाली मौतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो चिंता की बात है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक अगस्त तक महाराष्ट्र में कोविड-19 से 15 हजार 3 सौ 16 लोगों की मौत हुई थी, जो एक सितंबर को बढ़कर 24 हजार 9 सौ से ज्यादा हो गई है. वहीं एक से पांच अगस्त के बीच 1,160 कोविड-19 मरीजों की मौत हुई थी. दूसरी ओर एक से पांच सितंबर की अवधि में यह संख्या 1,373 हो गई.'
वहीं महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य में टेस्ट की संख्या और बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'रोजाना होने वाली जांच में अधिकतर संख्या रैपिड एंटीजन जांच की है. जो पूरी तरह से भरोसमंद नहीं है. आरटी-पीसीआर जांच जो अधिक विश्वसनीय है, उसे बड़े पैमाने पर किया जाना चाहिए, जिससे कोरोना वायरस के संक्रमण की जमीनी स्थिति का पता चलेगा.'
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