अलवर लिंचिंग: BJP विधायक का दावा- पुलिस की मार से हुई रकबर की मौत

ज्ञानदेव अहूजा के इन दावों पर राजस्थान के गृह मंत्री ने कहा कि अलवर लिंचिंग मामले में अगर पुलिस का दोष सामने आया, तो उसके खिलाफ भी उचित कार्रवाई होगी.

भवानी सिंह | News18Hindi
Updated: July 22, 2018, 3:11 PM IST
भवानी सिंह
भवानी सिंह | News18Hindi
Updated: July 22, 2018, 3:11 PM IST
राजस्थान के अलवर में गौ-तस्करी के शक में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिए गए मामले में बयानबाजी जारी है. अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने भी अलवर मॉब लिंचिग को लेकर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि गौ-तस्करी के शक में अकबर खान उर्फ रकबर की मौत भीड़ की पिटाई से नहीं, बल्कि पुलिस की मार से हुई है.

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बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा के रामगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए गए सवालों के बाद राजस्थान के गृह मंत्री गुलाम चंद्र कटारिया ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, 'अलवर लिंचिंग के मामले में अगर पुलिस भी दोषी साबित हुई, तो उसके खिलाफ भी उचित कार्रवाई होगी. किसी को बख्शा नहीं जाएगा.'

वहीं अलवर के एसपी राजेंद्र सिंह से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, 'मामले में बीजेपी विधायक के आरोपों की जांच कराएंगे. जो भी पुलिस अधिकारी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.'

रामगढ़ से बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा, 'गौ-तस्करी के शक में भीड़ ने रकबर खान को सिर्फ कुछ थप्पड़ जड़े थे. जब रकबर को रामगढ़ थाना पुलिस लेकर आई, तो पुलिस ने गांववालों के सामने ही उसकी जमकर पिटाई की. बीजेपी विधायक का दावा है कि ऐसा करके पुलिस ने लोगों के सामने यह दर्शाने की कोशिश की थी कि वो भी गौ-तस्करों के खिलाफ कारवाई करती है.'




ज्ञानदेव आहूजा ने कहा, 'मुझे विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि रामगढ़ थाना पुलिस ने पहले आरोपी की गोविंदगढ़ मोड़ पर पिटाई की. फिर थाने लाकर भी खूब मारा.' विधायक के मुताबिक, 'पुलिस रकबर को देर रात एक बजे थाने लेकर आई थी और फिर तीन घंटे तक उसकी जमकर पिटाई की. उसकी हालत बिगड़ने लगी तो सुबह करीब 4 बजे उसे अस्पताल लेकर गई, जहां रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.'

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ज्ञानदेव आहूजा ने कहा, 'मैं इस मामले में न्यायिक जांच की मांग करता हूं, जिससे यह साफ हो जाएगा कि हत्या भीड़ ने की है या फिर उसकी मौत पुलिस की पिटाई से हुई है.'


विधायक का यह भी दावा है, 'रकबर की मौत के बाद खुद को बचाने के लिए पुलिस ने गौ-तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के बहाने कथित गो-रक्षक परमजीत सिंह और धर्मेंद्र यादव को थाने बुलाया, फिर गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों ने पुलिस का सहयोग कर गायों को गौशाला तक भिजवाया था.'

आहुजा ने यह भी बताया, 'इससे एक साल पहले रामगढ़ थाना में पुलिस ने जहानपुर निवासी सतनाम सिंह को थाने में पीटा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी.' ज्ञानदेव आहूजा के मुताबिक, 'इसके पहले अलवर में हुए पहलू कांड में में भी पुलिस ने जिन लोगों को जबरन आरोपी बनाया था, वे जांच में बाहर आ चुके हैं.'

बता दें कि अलवर के रामगढ़ में कुछ लोगों ने शुक्रवार को गौ-तस्करी के आरोप में रकबर खान नामक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. कहा जा रहा है कि उसके पास दो गायें थी. मामले में शनिवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
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