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क्या महाठग सुकेश की तरह दूसरे कैदी भी लगा सकते हैं जेल में कूलर? जानें नियम

महाठग को किस आधार पर मिली तिहाड़ में कूलर लगाने की इजाजत... क्या दूसरे कैदी भी उठा सकते हैं इस सुविधा का लाभ? जानें जेल मैनुअल

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Sukesh Chandrasekhar News : दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तिहाड़ जेल के अंतगर्त आने वाली मंडोली जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर को किस आधार पर कूलर लगाने की इजाजत दी है? क्या दिल्ली जेल नियम 2018 या जेल मैनुअल में आम कैदियों के लिए इस तरह का कोई प्रावधान है? समझिए तिहाड़ जेल के पूर्व डीजी और दिल्ली बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष से.

क्या महाठग सुकेश की तरह दूसरे कैदी भी लगा सकते हैं जेल में कूलर? जानें नियमZoom
तिहाड़ के मंडोली जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर को किस आधार पर कूलर लगाने की इजाजत मिली है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ठगी के एक मामले में तिहाड़ जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर को अपने कमरे में कूलर लगाने की इजाजत दे दी है. महाठग अब अपने खर्चे पर जेल में कूलर लगाएगा और बिल भी खुद ही भरेगा. बता दें कि पिछले कुछ महीनों से सुकेश चंद्रशेखर कई कारणों से चर्चा में रह रहा है. सुकेश पर देश के दो बड़े बिजनेसमैन की बीवियों से 200 करोड़ रुपये ठगने का आरोप है. हालांकि, इस बार हीट वेव की वजह से सुकेश चर्चा में आ गया है. खास बात यह है इस बार कोर्ट ने स्वास्थ्य के आधार पर उसे बड़ी राहत दी है. लेकिन, जब सुकेश चंद्रशेखर को मंडोली जेल के पंखों से गर्मी दूर नहीं होती है तो तिहाड़ में बंद 12 से 13 हजार कैदियों का क्या हाल होता होगा? दिल्ली की 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में बूढ़े और बीमार कैदी किस हाल में रह रहे होंगे?

तिहाड़ जेल के पूर्व डीजी सुधीर यादव न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘हमारे समय में किसी भी कैदी के लिए कूलर या AC देने की कोई व्यवस्था नहीं थी. न ही कैदियों को ये सुविधाएं दी जाती हैं. तिहाड़ में तकरीबन 12 से 13 हजार कैदी रहते हैं. यहां कैदियों को सीलिंग फैन से ही काम चलाना पड़ता है. हां, कुछ ओल्ड एज के कैदियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कूलर वगैरह की व्यवस्था कुछ समय के लिए कराई जाती है. जहां तक आम कैदियों की बात है तो तिहाड़ जेल में एसी और कूलिंग की व्यवस्था नहीं है और नहीं किसी दूसरे जेल में कैदियों को कूलर दिया जाता है. हां, तिहाड़ के अधीन नए जेल मंडोली में सेंट्रलाइज्ड कूलिंग की व्यवस्था है. लेकिन, मुझे जानकारी नहीं है कि क्या यह कैदियों के लिए है?’

क्या कहते हैं तिहाड़ जेल के पूर्व डीजी
यादव आगे कहते हैं, ‘दिल्ली के किसी भी जेल में कूलिंग देने की कोई व्यवस्था नहीं है. हमलोगों के समय में स्वास्थ्य के आधार पर कुछ कैदियों को कुछ समय के लिए थोड़ी बहुत छूट मिलती थी. खासकर गर्मियों में ठंडा पानी मुहैया कराया जाता था. स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे गंभीर रोगों से ग्रस्त कैदियों को भी अमूमन पंखा ही दिया जाता था. लेकिन, अब तापमान बढ़ने के बाद शायद कैदियों के बारे में सोचना चाहिए. आखिर वह भी तो इंसान ही हैं. शायद कोर्ट ने इस वजह से ही सुकेश चंद्रशेखर के लिए मंडोली जेल में यह नई व्यवस्था की है.’
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नई दिल्ली बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राहुल सिंह कहते हैं, ‘कैदियों को सुविधाएं जेल मैनुअल के अनुसार दी जाती है. अगर कोई भी कैदी माननीय न्यायालय के समक्ष कोई याचिका दायर करता है तो माननीय न्यायालय इस पर विचार करती है. माननीय न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि स्पीडी और फेयर ट्रायल के लिए कैदी को स्वस्थ्य रहना भी जरूरी है, ताकि कैदी अपने केस को ठीक से न्यायालय के सामने रख सके. मैं आपको बता दूं कि माननीय न्यायालय के पास असीम शक्ति है, जो कैदियों को जेल मैनुअल के हिसाब से सुविधा मुहैया करा सके.’
क्या कहते हैं कानून के जानकार
सिंह आगे कहते हैं, ‘कैदियों को समय-समय पर मेडिसिन के साथ-साथ उपचार भी दिया जाता है और अगर जरूरत पड़ती है तो जेल से बाहर के असप्तालों में भी दिखाया जाता है. ऐसे में कोई भी प्रार्थना अगर स्वास्थ्य संबंधी आता है तो जेल मैनुअल और मौलिक अघिकारों को ध्यान में रख कर आदेश पारित किया जाता है. माननीय न्यायालय का सुकेश चंद्रशेखर के संबंध में कूलर लगाने का आदेश इसी संबंध में है.’
सुकेश चंद्रशेखर तिहाड़ के मंडोली जेल में बंद है. अब सुकेश को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश के मुताबिक मेडिकल आधार पर एयर कूलर मुहैया कराया जाएगा. सुकेश चंद्रशेखर 200 करोड़ रुपये की जबरन वसूली के मामले में पिछले कई महीनों से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद है. पिछले दिनों सुकेश ने माननीय न्यायलय से गुहार लगाई थी कि उसे तेज बुखार और त्वचा संबंधी समस्याएं हो रही हैं. इसलिए उसे कूलर की सुविधा उपलब्ध करवाया जाए.
क्या कहता है दिल्ली जैल मैनुअल
बता दें कि दिल्ली जेल नियम 2018 में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन, धारा 458 में जेल के रेजिडेंट डॉक्टर रोजनामचा रखेगा, जिसमें वह कारागार से बाहर जाने के समय और उसके स्वास्थ्य रिपोर्ट समय-समय पर जमा कराएगा. कैदी को अगर किसी भी तरह की दिक्कत होती है तो वह अधीक्षक को इसके बारे में बताएगा. अधीक्षक की रिपोर्ट पर ही कैदी के इलाज या अन्य तरह की सुविधाएं देने के संबंध में अदालत को बताया जाता है.

About the Author

रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें
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