रिफॉर्म एक्सप्रेस या मंत्रियों की क्लास? पीएम मोदी ने मांगा मंत्रालयों का रिपोर्ट कार्ड, लुटियंस दिल्ली में मची है खलबली!
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Agency:सीएनएन-आईबीएन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों से उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तलब किया है. कैबिनेट सचिवालय ने इसके लिए एक खास फॉर्म भी जारी किया है, जिसमें मंत्रियों को बताना होगा कि उन्होंने क्या सुधार लागू किए, और उनका जनता पर असर क्या पड़ा .

नई दिल्ली. राजनीति में कहा जाता है कि चुनाव जीतना एक कला है, लेकिन सरकार चलाना एक तपस्या. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीसरी पारी के लिए जो पैमाना सेट किया है, उसने दिल्ली के पावर कॉरिडोर में मंत्रियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट से रिपोर्ट कार्ड तब कर लिया है. इसमें रिफार्म जो हुए और जो होने हैं, उसकी जानकारी देनी होगी.
कैबिनेट सचिवालय ने एक फॉर्म जारी किया है, जो किसी स्कूल के प्रोग्रेस कार्ड जैसा है. इसमें मंत्रियों को साफ-साफ बताना होगा कि उन्होंने क्या सुधार किए, कब लागू किए और सबसे बड़ी बात… उनका जनता पर असर क्या हुआ?
काम नहीं रुकना चाहिए
पीएम मोदी ने दो टूक कह दिया है कि चाहे कोई मंत्री कैबिनेट में बना रहे या न रहे, मंत्रालय का सुधार रुकना नहीं चाहिए. यह एक बड़ा सियासी संदेश है. इसका मतलब साफ है कि मोदी सरकार में ‘व्यक्ति’ से बड़ा ‘सिस्टम’ और ‘परफॉर्मेंस’ है. यह उन लोगों के लिए चेतावनी भी है जो अपनी कुर्सी को पक्का मानकर सुस्त पड़ गए थे.
पीएम मोदी ने दो टूक कह दिया है कि चाहे कोई मंत्री कैबिनेट में बना रहे या न रहे, मंत्रालय का सुधार रुकना नहीं चाहिए. यह एक बड़ा सियासी संदेश है. इसका मतलब साफ है कि मोदी सरकार में ‘व्यक्ति’ से बड़ा ‘सिस्टम’ और ‘परफॉर्मेंस’ है. यह उन लोगों के लिए चेतावनी भी है जो अपनी कुर्सी को पक्का मानकर सुस्त पड़ गए थे.
‘जीएसटी 2.0’ और ‘रेलवे का 52/52 फॉर्मूला’
इस रिफॉर्म एक्सप्रेस के डिब्बों में जो सबसे भारी-भरकम सामान है, वो है GST 2.0. पिछले फेस्टिव सीजन में लागू किया गया यह सुधार टैक्स व्यवस्था को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है. वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 52 हफ्ते, 52 सुधार का एक ऐसा टारगेट रखा है, जिसने अफसरों की रातों की नींद उड़ा दी है. रेलवे के आधुनिकीकरण और रफ़्तार को बढ़ाने के लिए यह टाइम-बाउंड मिशन है. अगर यह सफल रहा, तो भारतीय रेल की शक्ल ही बदल जाएगी.
इस रिफॉर्म एक्सप्रेस के डिब्बों में जो सबसे भारी-भरकम सामान है, वो है GST 2.0. पिछले फेस्टिव सीजन में लागू किया गया यह सुधार टैक्स व्यवस्था को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है. वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 52 हफ्ते, 52 सुधार का एक ऐसा टारगेट रखा है, जिसने अफसरों की रातों की नींद उड़ा दी है. रेलवे के आधुनिकीकरण और रफ़्तार को बढ़ाने के लिए यह टाइम-बाउंड मिशन है. अगर यह सफल रहा, तो भारतीय रेल की शक्ल ही बदल जाएगी.
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खेल से लेकर खेती तक- सबका होगा हिसाब
सिर्फ भारी मंत्रालय ही नहीं, बल्कि खेल जैसे सेक्टर भी अब रडार पर हैं. ‘स्पोर्ट्स डेवलपमेंट बिल’ के जरिए सरकार ने कोशिश की है कि खिलाड़ियों को प्रशासन के केंद्र में लाया जाए और बिचौलियों या बाबूगीरी को खत्म किया जाए. अब कैबिनेट की बैठकों में एक खास वक्त निकाला जाएगा, जहां मंत्री अपनी इन जीत की कहानियां सुनाएंगे.
सिर्फ भारी मंत्रालय ही नहीं, बल्कि खेल जैसे सेक्टर भी अब रडार पर हैं. ‘स्पोर्ट्स डेवलपमेंट बिल’ के जरिए सरकार ने कोशिश की है कि खिलाड़ियों को प्रशासन के केंद्र में लाया जाए और बिचौलियों या बाबूगीरी को खत्म किया जाए. अब कैबिनेट की बैठकों में एक खास वक्त निकाला जाएगा, जहां मंत्री अपनी इन जीत की कहानियां सुनाएंगे.
2047 का टारगेट यानी रेस लंबी है…
प्रधानमंत्री का विजन सिर्फ अगले चुनाव तक सीमित नहीं है. वह इसे ‘विकसित भारत-2047’ के रोडमैप की तरह देख रहे हैं. लुटियंस दिल्ली के राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पीएम मोदी चाहते हैं कि जब भारत अपनी आजादी के 100 साल मनाए, तो नींव इतनी मजबूत हो कि कोई उसे हिला न सके. इसीलिए हर मंत्रालय से एक डिटेल रिपोर्ट मांगी गई है.
प्रधानमंत्री का विजन सिर्फ अगले चुनाव तक सीमित नहीं है. वह इसे ‘विकसित भारत-2047’ के रोडमैप की तरह देख रहे हैं. लुटियंस दिल्ली के राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पीएम मोदी चाहते हैं कि जब भारत अपनी आजादी के 100 साल मनाए, तो नींव इतनी मजबूत हो कि कोई उसे हिला न सके. इसीलिए हर मंत्रालय से एक डिटेल रिपोर्ट मांगी गई है.
विपक्ष के लिए क्या बचा?
एक तरफ विपक्ष अभी भी पुराने मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार ने परफॉर्मेंस का ऐसा डेटाबेस तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसे झुठलाना मुश्किल होगा. जब हर मंत्री अपने ‘रिफॉर्म’ का हिसाब देगा, तो विपक्ष के पास केवल शोर मचाने के अलावा कुछ ठोस नहीं बचेगा. यह मोदी की वो ‘साइलेंट पॉलिटिक्स’ है जो काम के शोर से विरोध की आवाज़ को दबा देती है.
एक तरफ विपक्ष अभी भी पुराने मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार ने परफॉर्मेंस का ऐसा डेटाबेस तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसे झुठलाना मुश्किल होगा. जब हर मंत्री अपने ‘रिफॉर्म’ का हिसाब देगा, तो विपक्ष के पास केवल शोर मचाने के अलावा कुछ ठोस नहीं बचेगा. यह मोदी की वो ‘साइलेंट पॉलिटिक्स’ है जो काम के शोर से विरोध की आवाज़ को दबा देती है.
About the Author
पायल मेहताएसो. एडिटर
पायल मेहता CNN News18 में एसोसिएट एडिटर हैं. पिछले एक दशक से बीजेपी और एनडीए की गतिविधियों की कवरेज कर रही है. केंद्र सरकार के नीतिगत मसलों पर उनकी खासी पकड़ है. दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों की गतिविधिय...और पढ़ें
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