महाठग सुकेश चंद्रशेखर के लिए आई खुशखबरी, हाईकोर्ट ने दी जमानत, फिर भी नहीं आ पाएगा जेल से बाहर, जानें क्यों?
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सुकेश चंद्रशेखर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठगी के मामले में जमानत दे दी है. जबतक सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती, वो जेल की सलाखों के पीछे ही रहेगा. न्यायमूर्ति मनीष पिताले की एकल पीठ ने उन्हें एक मामले में बेल दे दी.

नई दिल्ली. देश में बड़े-बड़े लोगों को करोड़ों की चंपत लगाने वाले मशहूर महाठग सुकेश चंद्रशेखर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक आपराध शाखा द्वारा 2015 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में सुकेश चंद्रशेखर को जमानत प्रदान कर दी है. सुकेश फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. हालांकि जमानत मिलने के बावजूद उसके आजाद होने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि ठगी के कई ऐसे मामले हैं, जिनमें उसे अरेस्ट किया जा चुका है.
सुकेश को जबतक सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती, वो जेल की सलाखों के पीछे ही रहेगा. न्यायमूर्ति मनीष पिताले की एकल पीठ ने गुरुवार को जमानत मंजूर की, जिसकी डिटेल में जानकारी शुक्रवार को दिन में उपलब्ध हुई. अदालत ने कहा कि मौजूदा अपराध के मामले में आरोपी सात साल से अधिक समय से जेल में है और उसके मामले की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हुई है.
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नैनो कार देने के नाम पर ठगी…
चंद्रशेखर को मई 2015 में भारतीय दंड संहिता (IPC) और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम (MPID) के तहत गिरफ्तार किया गया था. उस पर कथित तौर पर ‘लायन ऑफ इंडियन’ नामक एक फर्जी फर्म शुरू करने और विभिन्न निवेश योजनाएं शुरू करने का आरोप था, जिनमें टाटा नैनो कार, सोने के सिक्के आदि जैसे पुरस्कारों के अलावा 20 प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा किया गया था.
चंद्रशेखर को मई 2015 में भारतीय दंड संहिता (IPC) और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम (MPID) के तहत गिरफ्तार किया गया था. उस पर कथित तौर पर ‘लायन ऑफ इंडियन’ नामक एक फर्जी फर्म शुरू करने और विभिन्न निवेश योजनाएं शुरू करने का आरोप था, जिनमें टाटा नैनो कार, सोने के सिक्के आदि जैसे पुरस्कारों के अलावा 20 प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा किया गया था.
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19 करोड़ की ठगी…
चंद्रशेखर पर पोंजी योजना के जरिए 19 करोड़ रुपये एकत्र करने का आरोप है. उसने अपनी याचिका में कहा कि दोषसिद्धि की स्थिति में अधिकतम सजा सात वर्ष है और यह अवधि वह पहले ही जेल में बिता चुका है. चंद्रशेखर ने विशेष एमपीआईडी अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था.
चंद्रशेखर पर पोंजी योजना के जरिए 19 करोड़ रुपये एकत्र करने का आरोप है. उसने अपनी याचिका में कहा कि दोषसिद्धि की स्थिति में अधिकतम सजा सात वर्ष है और यह अवधि वह पहले ही जेल में बिता चुका है. चंद्रशेखर ने विशेष एमपीआईडी अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था.
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Sandeep Gupta
पत्रकारिता में करीब 13 साल से सक्रिय. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण, पंजाब केसरी और जी समूह की वेबसाइट क्रिकेट कंट्री/ इंडिया डॉट कॉम में काम किया. इस दौ...और पढ़ें
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