त्रिभुवन नाम क्यों रखा? जब कुरियन के नाम पर शाह और सौगत रॉय के बीच हुई तीखी बहस, नेहरू पर निशाना
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Agency:News18Hindi
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अमित शाह ने लोकसभा में सहकारिता बिल पर चर्चा के दौरान त्रिभुवन दास पटेल के योगदान को सराहा और कुरियन पर बहस की. उन्होंने कहा कि त्रिभुवन पटेल ने अमूल की नींव रखी और कुरियन को मौका दिया.

गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में सहकारिता बिल पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे, इसी बीच ममता बनर्जी के सांसद सौगत रॉय ने केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल का अपमान करने का आरोप लगा दिया. उन्होंने पूछा, नेशनल सहकारिता विश्वविद्यालय का नाम त्रिभुवन दास के नाम पर क्यों रखा गया, कुरियन के नाम पर क्यों नहीं? सहकारिता को बढ़ाने में उनका अकेला योगदान नहीं. इस पर शाह ने पूरी कहानी सुना दी. कुरियन को लेकर दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
शाह ने कहा, ‘जो लोग भी कुरियन का नाम ले रहे हैं, उन्हें मालूम भी नहीं होगा कि गुजरात सरकार कुरियन का शताब्दी वर्ष मना रही है. न केरल सरकार मनाती है और न ही बंगाल सरकार कुरियन को याद रखती है. अमूल की नींव त्रिभुवन दास पटेल ने डाली थी. कुरियन को अमूल में जॉब देने का काम त्रिभुवन पटेल ने किया. इनको नीदरलैंड डेयरी साइंस के बारे में जानने के लिए त्रिभुवन पटेल ने भेजा. हर व्यक्ति तक मुनाफा पहुंचे, यह सोच भी त्रिभुवन पटेल की ही थी. इसलिए यूनिवर्सिटी त्रिभुवन पटेल के नाम पर है.’
कांग्रेसी क्यों नहीं मनाते
इस पर कांग्रेस के नेताओं ने फिर हंगामा शुरू कर दिया. सवाल पूछा कि क्या कुरियन का कोई योगदान नहीं है? इस पर अमित शाह ने कहा, कुरियन का योगदान है इसलिए हम शताब्दी वर्ष मना रहे हैं. एक भी कांग्रेस शासित राज्य इनकी शताब्दी नहीं मना रहा है. क्यों नहीं मनाते आप? और सबसे बड़ी बात, कोई भी यूनिवर्सिटी का नाम बनाएंगे तो एक ही व्यक्ति के नाम पर होगा. कभी व्यक्तियों के समूह के नाम से कोई यूनिवर्सिटी बनती है क्या?
इस पर कांग्रेस के नेताओं ने फिर हंगामा शुरू कर दिया. सवाल पूछा कि क्या कुरियन का कोई योगदान नहीं है? इस पर अमित शाह ने कहा, कुरियन का योगदान है इसलिए हम शताब्दी वर्ष मना रहे हैं. एक भी कांग्रेस शासित राज्य इनकी शताब्दी नहीं मना रहा है. क्यों नहीं मनाते आप? और सबसे बड़ी बात, कोई भी यूनिवर्सिटी का नाम बनाएंगे तो एक ही व्यक्ति के नाम पर होगा. कभी व्यक्तियों के समूह के नाम से कोई यूनिवर्सिटी बनती है क्या?
नेहरू पर निशाना
शाह ने जवाहर लाल नेहरू पर भी निशाना साधते हुए कहा, हमने तो कम से कम अपने नेता का नाम नहीं दिया है. त्रिभुवन दास पटेल तो कांग्रेस के नेता थे, शायद आपको मालूम नहीं है. इसलिए उन्हें मौका नहीं दिया गया क्योंकि वो नेहरू परिवार के सदस्य नहीं थे. शाह ने सहकारिता की ताकत बताते हुए कहा, आज अमूल का ग्रुप टर्नओवर 90 हजार करोड़ तक पार कर गया है. गुजरात की 36 लाख महिलाओं को स्वरोजगार देने का काम हुआ है. प्रधानमंत्री जी ने इस विधेयक को, इस यूनिवर्सिटी को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी का नाम देकर त्रिभुवनदास पटेल को बहुत बड़ी श्रद्धांजलि देने का काम किया है. सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में एक प्रकार से हर परिवार को छूता है. हर गांव में कोई न कोई ऐसी इकाई है, जो सहकारिता के माध्यम से कृषि विकास, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के काम के अंदर जुटी हुई है और देश के विकास में योगदान करती है. ये जो विधेयक है आपके माध्यम से पारित होने के बाद इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा, सामाजिक समावेशन भी बढ़ेगा.
शाह ने जवाहर लाल नेहरू पर भी निशाना साधते हुए कहा, हमने तो कम से कम अपने नेता का नाम नहीं दिया है. त्रिभुवन दास पटेल तो कांग्रेस के नेता थे, शायद आपको मालूम नहीं है. इसलिए उन्हें मौका नहीं दिया गया क्योंकि वो नेहरू परिवार के सदस्य नहीं थे. शाह ने सहकारिता की ताकत बताते हुए कहा, आज अमूल का ग्रुप टर्नओवर 90 हजार करोड़ तक पार कर गया है. गुजरात की 36 लाख महिलाओं को स्वरोजगार देने का काम हुआ है. प्रधानमंत्री जी ने इस विधेयक को, इस यूनिवर्सिटी को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी का नाम देकर त्रिभुवनदास पटेल को बहुत बड़ी श्रद्धांजलि देने का काम किया है. सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में एक प्रकार से हर परिवार को छूता है. हर गांव में कोई न कोई ऐसी इकाई है, जो सहकारिता के माध्यम से कृषि विकास, ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के काम के अंदर जुटी हुई है और देश के विकास में योगदान करती है. ये जो विधेयक है आपके माध्यम से पारित होने के बाद इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा, सामाजिक समावेशन भी बढ़ेगा.
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Gyanendra Mishra
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें
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