जवाई के जंगलों में दिखी 'हस्ताक्षर वाली मकड़ी', अपने अनोखे जाले से सबको कर रही है हैरान
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Rajasthan News : राजस्थान के पाली जिले के जवाई जंगलों में इन दिनों एक रंगीन और रहस्यमयी मकड़ी चर्चा में है. सिग्नेचर स्पाइडर नाम की यह दुर्लभ मकड़ी अपने जाले पर किए गए अनोखे ‘हस्ताक्षर’ जैसे डिजाइन और खूबसूरत रंगों की वजह से सबका ध्यान खींच रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह मकड़ी बेहद कम दिखाई देती है.

पाली : पाली जिले में आने वाले जवाई क्षेत्र में एक खास तरह की मकडी जिसने अभी हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचने का काम किया है. यह कोई आम मकडी नहीं होती यह बेहद ही खास और रंगीन मिजाज की मकडी होती है जिसे सिग्नेचर स्पाइडर के नाम से जाना जाता है. वन्यजीव विशेषज्ञ लक्ष्मण पारंगी की माने तो अपने अनोखे जाले और रंग बिरंगे शरीर के कारण यह सबका ध्यान खींचने का काम करती है. इसके जाले पर किया गया जिगजैग आकार का हस्ताक्षर जैसा डिजाइन जो बाकी मकडियों से सको अलग बनाने का काम करता है. सुमेरपुर क्षेत्र के जवाई जंगलो में इस मौसम के चलते यह नजर आने लगी है जो बेहद ही खास और बहुत कम ही देखने को मिलती है.
इस मौसम में जवाई क्षेत्र समेत राजस्थान के अधिकांश गार्डनों में एक बेहद खास और रंगीन मिजाज की मकड़ी देखने को मिलती है, जिसे सिग्नेचर स्पाइडर के नाम से जाना जाता है. वन्यजीव विशेषज्ञ लक्ष्मण पारंगी के अनुसार यह मकड़ी अपने अनोखे जाले और रंग-बिरंगे शरीर के कारण सबका ध्यान खींचती है. इस मकड़ी की सबसे बड़ी पहचान है इसके जाले पर किया गया जिगजैग आकार का हस्ताक्षर जैसा डिजाइन, जो इसे बाकी मकड़ियों से अलग बनाता है.
जवाई में दिखी रहस्यमयी स्पाइडर
यह सिग्नेचर स्पाइडर(Signature spider) के नाम से भी जाता है. जो बाग-बगीचों व जंगलों में निचली जगह पर अपना जाल बुनता है और कीट-पतंगों का शिकार करता है. इसका बुना हुआ जाल लगभग अदृश्य रहता है और केवल इसका हस्ताक्षर ही दिखाई देता है. इस सिग्नेचर पैटर्न को स्टेबिलमेंटम कहा जाता है. खास बात यह है कि बहुत ही कम मगर इस मौसम में पाली के सुमेरपुर के जवाई जंगलो में यह देखने को मिलती है.
यह सिग्नेचर स्पाइडर(Signature spider) के नाम से भी जाता है. जो बाग-बगीचों व जंगलों में निचली जगह पर अपना जाल बुनता है और कीट-पतंगों का शिकार करता है. इसका बुना हुआ जाल लगभग अदृश्य रहता है और केवल इसका हस्ताक्षर ही दिखाई देता है. इस सिग्नेचर पैटर्न को स्टेबिलमेंटम कहा जाता है. खास बात यह है कि बहुत ही कम मगर इस मौसम में पाली के सुमेरपुर के जवाई जंगलो में यह देखने को मिलती है.
यह होती है इसकी पहचान
यह लगभग 8-12 मिमी लंबी और नर 3.5-4.5 मिमी होती है. सेफलोथोरैक्स के बाद भूरे-भूरे बालों के साथ. उरोस्थि दिल के आकार का बालों वाले यौवन सफेद पैच के साथ. पैल्प्स में रीढ़ होती है. पैर भूरे भूरे और बालों वाले. फेमोरा पृष्ठीय रूप से पीला. पेट पंचकोणीय और बालों वाली. डोरसम पीले भूरे अनुप्रस्थ बैंड के साथ. तीन सिगिला जोड़े अलग. दो अनुदैर्ध्य सफेद पैच के साथ वेंट्रम गहरा भूरा.
यह लगभग 8-12 मिमी लंबी और नर 3.5-4.5 मिमी होती है. सेफलोथोरैक्स के बाद भूरे-भूरे बालों के साथ. उरोस्थि दिल के आकार का बालों वाले यौवन सफेद पैच के साथ. पैल्प्स में रीढ़ होती है. पैर भूरे भूरे और बालों वाले. फेमोरा पृष्ठीय रूप से पीला. पेट पंचकोणीय और बालों वाली. डोरसम पीले भूरे अनुप्रस्थ बैंड के साथ. तीन सिगिला जोड़े अलग. दो अनुदैर्ध्य सफेद पैच के साथ वेंट्रम गहरा भूरा.
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Rupesh Kumar Jaiswal
रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन...और पढ़ें
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