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रंजीत बजाज: 5 राज्‍यों में 27 FIR, 65 दिन जेल, फिर जीती भारत की सबसे बड़ी फुटबॉल लीग

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Updated: December 1, 2019, 6:52 PM IST
रंजीत बजाज: 5 राज्‍यों में 27 FIR, 65 दिन जेल, फिर जीती भारत की सबसे बड़ी फुटबॉल लीग
रंजीत बजाज आई लीग के क्लब मिनर्वा पंजाब के मालिक हैं

रंजीत बजाज (Ranjit Bajaj) ने चंढीगढ़ (Chandigarh) में मिनर्वा एकेडमी (Minerva Academy) से क्लब की शुरुआत की जो आज आई लीग (I league) का स्टार क्लब बन चुका है

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  • Last Updated: December 1, 2019, 6:52 PM IST
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नई दिल्ली. रंजीत बजाज (Ranjit Bajaj) फुटबॉल जगत में आज एक ऐसा नाम है जो अपने बैखौफ अंदाज के लिए जाना जाता है. पंजाब एफसी (Punjab FC) के मालिक रंजीत बजाज (Ranjit Bajaj) ने अपने जीवन में हर उस हालात का सामना किया है जो कोई आम इंसान कभी नहीं करना चाहेगा. जेल की काल कोठरी से निकलकर फुटबॉल की दुनिया में नाम करने वाले बजाज (Ranjit Bajaj) को दुनिया बागी मानती है. हालांकि बजाज (Ranjit Bajaj)  का इस बारे में कहना है कि वह मानते हैं कि उनकी जिंदगी 'गैंगस्टर बजाज से सुधरे हुए बजाज के सफर की कहानी है.' खेलों खासकर फुटबॉल (Football) के लिए उनके प्यार ने उन्हें आज आईलीग  (I-League) चैंपियन टीम का मालिक बना दिया है.

बेहद खराब था बजाज का क्रिमिनल रिकॉर्ड
पांच राज्यों में 27 एफआईआर यह बताने के लिए काफी हैं कि बजाज (Ranjit Bajaj) क्यों खुद को गैंगस्टर  कहा करते थे. बजाज (Ranjit Bajaj) को बड़ा झटका तब लगा जब उन्हें हत्या के प्रयास के आरोप में जेल भेजा गया. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक साल 2010 में रंजीत बजाज (Ranjit Bajaj) को 65 दिन के लिए अंबाला जेल भेजा गया था. बजाज (Ranjit Bajaj) ने बताया कि उस रात वह अपनी गर्लफ्रेंड और उनकी एक दोस्त के साथ पब से लौट रहे थे जब कुछ लड़कों ने अभद्र टिप्पणियां  की. इससे गुस्से में आए रंजीत (Ranjit Bajaj) ने लड़कों को पीट डाला.

बजाज (Ranjit Bajaj) को अगले दिन पता चला कि जिस लड़के को उन्होंने मारा है वह पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज का बेटा है. इसके बाद बजाज (Ranjit Bajaj) पर केस चला और लंबे समय तक भागते रहने के बाद उन्होंने सरेंडर किया और जेल जाना पड़ा.

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रंजीत बजाज की टीम मिनर्वा पंजाब ने साल 2017-18 में आईलीग का खिताब जीता था


जेल में तय किया फुटबॉल में वापसी का रास्ता
जेल में रहते हुए रंजीत बजाज (Ranjit Bajaj) ने तय किया था कि वह बाहर निकलकर खुद में सुधार करेंगे और फुटबॉल खेलने का अपना सपना पूरा करेंगे. इसके बाद वे 36 साल की उम्र में संतोष ट्रॉफी (Santosh Trophy) में चंडीगढ़ (Chandigarh) की ओर से खेले. उन्होंने एमटीवी के शो रोडीज में हिस्सा लिया लेकिन उनका फुटबॉल (Football) के प्रति प्यार कम नहीं हुआ. उन्होंने तय किया कि वह अपने दादा की मिनर्वा क्रिकेट एकेडमी (Minerva Cricket Academy) में फुटबॉल का विंग शुरू करेंगे और यहीं से मिनर्वा फुटबॉल क्लब (Minerva Football Club) की शुरुआत हुई. धीरे-धीरे साल 2013 तक यह मिनर्वा पंजाब फुटबॉल क्लब बन गया.
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रंजीत बजाज ने 2007 में मिनर्वा क्लब की शुरुआत की थी


मोहन बगान के खिलाफ मुकाबला
अपने क्लब से बजाज के प्यार की इंतेहा यह थी कि टीम जब पहली बार मोहन बागान के खिलाफ खेल रह थी तो टीम के खिलाड़ी काफी नर्वस थे तब बजाज ने हाथ काटकर सबके माथे पर खून लगाते हुए कहा, 'तुम खिलाड़ी नहीं योद्धा हो.' उनके क्लब ने साल 2017-18 में आईलीग का खिताब जीता.

रंजीत का ड्रग्स के साथ भी लंबा नाता रहा था जबतक उनकी जिंदगी में उनकी पत्नी हाना आई. रंजीत कई बार रिहैब गए पर कोई फायदा नहीं हुआ. ऐसे में हाना ने उन्हें दुबई बुलाया जहां ड्रग्स मिलना लगभग नामुमकिन था रंजीत ने वहां खुद को एक कमरे में बंद किया और तबतक वहां से नहीं आए जबतक पूरी तरह ठीक नहीं हो गए. रंजीत ने बताया आज 12 साल हो गए हैं पर उन्होंने किसी तरह का नशा नहीं किया. वह अपनी टीम के लिए हर मायने में प्रेरणा बनना चाहते हैं.

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First published: December 1, 2019, 6:52 PM IST
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