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Opinion : तो क्या देवस्थानम बोर्ड एक्ट भी कृषि कानून की तर्ज पर लिया जाएगा वापस?

Opinion : तो क्या देवस्थानम बोर्ड एक्ट भी कृषि कानून की तर्ज पर लिया जाएगा वापस?

नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा से उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है.

नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा से उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है.

Uttarakhand Issue : चुनाव में जाने से पहले उत्तराखंड विधानसभा का अंतिम सत्र प्रस्तावित है. अगले महीने चमोली जिले के गैरसैंण में 7 और 8 दिसंबर को सत्र को होना है. हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रास्ता निकालने के लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसने एक अंतरिम रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी है. इधर बीजेपी के अंदर चर्चा हो रही है कि कहीं एक्ट उनको गढ़वाल क्षेत्र की कई सीटों पर नुकसान न पहुंचा दे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों को लेकर उठाए गए कदम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम पुष्कर धामी भी विधानसभा क्षेत्र में देवस्थानम बोर्ड एक्ट को लेकर संभवत कुछ ठोस निर्णय ले सकते हैं.

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गुरु पर्व के मौके पर विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा का राजनीतिक विश्लेषण करने में जानकार जुटे हैं. देश के कई राज्यों की तरह कृषि कानून का उत्तराखंड के कई इलाकों में विरोध होता रहा है. माना जा रहा है कि अब आनेवाले विधानसभा चुनाव में किसान वोटरों को लेकर बीजेपी रणनीति बदलेगी. अगर उत्तराखंड की बात करें तो यहां कृषि कानून के अलावा देवस्थानम बोर्ड एक्ट पिछले कुछ समय में बीजेपी सरकार के लिए सिरदर्द साबित हुआ है.

देवस्थानम बोर्ड एक्ट पर होगा फैसला!

उत्तराखंड के चार धामों यानी बदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री समेत 51 मंदिरों की व्यवस्था करने के लिए बनाया गया देवस्थानम बोर्ड एक्ट विवादों में है. त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय बनाए गए एक्ट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपने कार्यकाल में कानून वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ हुआ नहीं. अब निगाहें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर हैं. चारधाम से जुड़े पुरोहित इस एक्ट को लेकर शुरू से ही विरोध में रहे हैं. उनको लगता है देवस्थानम बोर्ड व्यवस्था उनके अधिकारों पर कुठाराघात है.

एक्ट कैसे हो सकता है वापस?

देवस्थानम बोर्ड एक्ट को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ये पूरी तरह से लागू है. हालांकि सरकार चाहे तो विधानसभा में प्रस्ताव लाकर एक्ट को वापस लेने की दिशा में एक्शन ले सकती है. चुनाव में जाने से पहले उत्तराखंड विधानसभा का अंतिम सत्र प्रस्तावित है. अगले महीने चमोली जिले के गैरसैंण में 7 और 8 दिसंबर को सत्र को होना है. हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रास्ता निकालने के लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसने एक अंतरिम रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी है. इधर बीजेपी के अंदर चर्चा हो रही है कि कहीं एक्ट उनको गढ़वाल क्षेत्र की कई सीटों पर नुकसान न पहुंचा दे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों को लेकर उठाए गए कदम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम पुष्कर धामी भी विधानसभा क्षेत्र में देवस्थानम बोर्ड एक्ट को लेकर संभवत कुछ ठोस निर्णय ले सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Chardham Yatra, New Agriculture Law, Uttarakhand news

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