होम /न्यूज /उत्तराखंड /

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ के इस गांव में होते हैं भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन, जानें खासियत

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ के इस गांव में होते हैं भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन, जानें खासियत

Pithoragarh News: आदिगुरु शंकराचार्य के उत्तराखंड के इलाकों में भ्रमण के दौरान यहां विष्णु मंदिरों के निर्माण का प्रचलन बढ़ा था. कासनी गांव में स्थित इस मंदिर में भगवान विष्णु की दशावतार की अद्भुत मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में देखने को मिलती है.

अधिक पढ़ें ...

हाइलाइट्स

भगवान विष्णु के दशावतार वाली 1000 साल से ज्यादा पुरानी प्रतिमा देखने को मिलती है.
11वीं सदी का प्राचीन विष्णु मंदिर, जिसका निर्माण कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया.

हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. देवभूमि उत्तराखंड में देवों का वास माना जाता है. यहां अनेक धार्मिक मान्यताओं के साथ प्राचीन काल के मंदिर समूहों का जिक्र पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के कारण ही उत्तराखंड राज्य अपनी अलग पहचान बनाता है. चाहें चारधाम हों या यहां के प्राचीन मंदिर, जिनका धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में काफी महत्व है, ऐसे ही प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला में आता है पिथौरागढ़ जिले के कासनी गांव में स्थित विष्णु मंदिर, जिसका निर्माण 11वीं सदी के आसपास माना जाता है.

भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपने आप में धार्मिक महत्व के साथ इतिहास के भी तमाम पहलू समेटे हुए है. यहां भगवान विष्णु के दशावतार वाली 1000 साल से ज्यादा पुरानी प्रतिमा देखने को मिलती है, जो उत्तराखंड में और कहीं नहीं है. यह मंदिर हमेशा खुला रहता है. श्रद्धालु किसी भी समय भगवान विष्णु के दर्शन कर सकते हैं. यहां सिर्फ नवरात्रि की पंचमी को विशेष पूजन होता है.

पिथौरागढ़-झूलाघाट रोड पर चार किलोमीटर की दूरी पर कासनी गांव में स्थित है 11वीं सदी का प्राचीन विष्णु मंदिर, जिसका निर्माण कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया माना जाता है. आदिगुरु शंकराचार्य के उत्तराखंड के इलाकों में भ्रमण के दौरान यहां विष्णु मंदिरों के निर्माण का प्रचलन बढ़ा था. कासनी गांव में स्थित इस मंदिर में भगवान विष्णु की दशावतार की अद्भुत मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में देखने को मिलती है. नागर शैली से बना यह मंदिर जहां पर पांच मंदिरों का समूह हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ उचित संरक्षण न मिलने के कारण दो मंदिरों की शिलाएं ध्वस्त हो गईं, जिनके पत्थरों से मंदिर के नजदीक ही नौलों का निर्माण किया गया है. इसके पानी का इस्तेमाल मंदिर के धार्मिक कार्यों में किया जाता है.

कत्यूरी राज में मंदिर के देखभाल के लिए काशी के कसनियाल परिवार को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी. जिनके नाम से ही कासनी गांव का नाम पड़ा. यहां के स्थानीय युवा और इतिहासकार मनीष कसनियाल बताते हैं कि भगवान विष्णु की दशावतार वाली प्राचीन प्रतिमा सिर्फ पिथौरागढ़ के कासनी में स्थित विष्णु मंदिर में ही देखने को मिलती है.

ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद भी पिथौरागढ़ के प्राचीन विष्णु मंदिर को उपेक्षित रखा गया है. धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को समेटे हुए इस मंदिर को जिले के धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है, जिससे गुमनाम हो रही इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षण मिल सके.

Tags: Hindu Temple, Pithoragarh news, Uttrakhand ki news

अगली ख़बर