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UPSC vs Judiciary: क्या न्यायपालिका की परीक्षा UPSC CSE से कठिन है ?

UPSC vs Judiciary: क्या न्यायपालिका की परीक्षा UPSC सिविल सर्विस एग्जाम से कठिन है?

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UPSC vs Judiciary: यूपीएससी कठिन इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इस परीक्षा को देने वाले कैंडिडेट की संख्या बड़ी होती है. न्यायपालिका परीक्षा exclusive मानी जाती है क्योंकि इसे केवल कानून की डिग्री वाले कैंडिडेट ही दे सकते हैं, आंकड़े बताते हैं कि इसे देने वाले कम लोग हैं.

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UPSC vs Judiciary:  संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा या न्यायपालिका (indian judicial service exam) की परीक्षा, ये दोनों ही परीक्षाएं देश के सबसे मुश्किल एग्जाम्स में शुमार हैं. इन दोनों में कौन सी परीक्षा ज्यादा मुश्किल है और कौन सी कम मुश्किल इसका अंदाजा पासिंग पर्सेंटेज, पाठ्यक्रम, applicants की क्वालिटी, आवेदकों की संख्या के आधार पर लगाया जा सकता है.
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UPSC के लिए आवेदन करने वाले लाखों लोगों में IIT-IIM जैसे टॉप संस्थानों से पढ़े कैंडिडेट्स भी होते हैं.हो सकता है इन कैंडिडेट्स ने ग्रेजुएशम के पहले साल से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी हो. इससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाती है. न्यायिक परीक्षाओं में, उम्मीदवारों की गुणवत्ता अलग होती है, क्योंकि वे एक सीमित दायरे की पढ़ाई कर के आए होते हैं. उदाहरण के तौर पर समझ सकते हैं, इन परीक्षाओं का दायरा इतना सीमित होता है कि दिल्ली न्यायिक सेवाओं और राजस्थान न्यायिक सेवाओं में प्रतिस्पर्धा में भी अंतर है.
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यूपीएससी का पाठ्यक्रम बहुत ज्यादा बड़ा है, जिनमें से अधिकांश ऐसा है जो किसी भी सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन की पढ़ाई से संबंधित नहीं है. लेकिन लॉ स्टूडेंट के ग्रेजुएशन में पाठ्यक्रम वैसा ही होता है जैसा उन्हें ज्यूडीशरी की परीक्षा में पढ़ना होता है. साथ ही यूपीएससी में विभिन्न विषयों का अध्ययन करना होता है जबकि न्यायिक परीक्षाओं का क्षेत्र कुछ हद तक सीमित है.
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यूपीएससी कठिन इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इस परीक्षा को देने वाले कैंडिडेट की संख्या बड़ी होती है. न्यायपालिका परीक्षा exclusive मानी जाती है क्योंकि इसे केवल कानून की डिग्री वाले कैंडिडेट ही दे सकते हैं, आंकड़े बताते हैं कि इसे देने वाले कम लोग हैं.(प्रतीकात्मक फोटो: Canva)
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उदाहरण के तौर पर समझ सकते हैं- यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए लगभग 8 लाख लोग बैठे. 800 पदों के लिए 12 लाख से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए. इसमें ग्रुप ए, ऑल इंडिया और ग्रुप बी के सभी पद शामिल हैं, उम्मीदवार/सीट की संख्या लगभग 950 है.न्यायिक सेवाओं की परीक्षा में यूपी पीसीएस जे 2018 के उदाहरण से समझते हैं.यूपी पीसीएस जे 2018 की प्रारंभिक परीक्षा में लगभग 65 हजार लोग बैठे थे और कुल 610 सीटें उपलब्ध थीं. आंकड़ों से समझ सकते हैं न्यायपालिका यूपीएससी की तुलना में कम मुश्किल है. (प्रतीकात्मक फोटो)
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judiciary exam राज्यों की ओर से आयोजित किया जाता है. इसमें भी यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम की तरह तीन स्टेज होती हैं. प्रिलिम्स, मेंस, इंटरव्यू. प्रिलिम्सल क्वालीफाइंग एग्जाम है. मेंस और इंटरव्यू के नंबर गिने जाते हैं.
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