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कवर्धा हादसे के पीड़ित 24 बच्चों को मिली 'मां', विधायक भावना बोहरा ने लिया गोद
कवर्धा हादसे के पीड़ित 24 बच्चों को मिली 'मां', विधायक भावना बोहरा ने लिया गोद, उठाएंगी ये बड़ी जिम्मेदारी
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के कवर्धा में हुए सड़क हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई. हादसे में कई बच्चों का परिवार बिखर गया. अब ऐसे बच्चों की मदद के लिए विधायक भावना बोहरा आगे आई हैं. उन्होंने 24 बच्चों को गोद लेने का फैसला किया है. (रिपोर्ट- मनीष मिश्रा)
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक दर्दनाक सड़क हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई. दरअसल 20 मई को कुकदूर थाना क्षेत्र के बाहपानी इलाके में पिकअप पलट गया था. गाड़ी तेज रफ्तार में मजदूरों को लेकर वापस लौट रहा था. इस दौरान ढाल पर ड्राइवर ने गाड़ी से नियंत्रण खो दिया और वह कई फीट नीचे खाई में पलट गई. उस वक्त गाड़ी में 30 से 35 लोग लोग सवार थे. मृतकों में ज्यादातर संख्या महिलाओं की थी.
घटना होते ही पूरे छत्तीसगढ़ में हाहाकार मच गया था. प्रदेश के नेताओं से लेकर अधिकारी तक आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंचे. लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त ड्राइवर ने सबसे बोला कूदो, तो, जो पुरुष थे, वो कूद गए, लेकिन महिलाएं नहीं कूद सकीं. इसलिए इस हादसे में महिलाओं की ज्यादा संख्या में मौत हुई.
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पंडरिया के वनांचल क्षेत्र कुकदुर के ग्राम बाहपानी में हुए भीषण सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 19 आदिवासियों के परिवार के बच्चों को विधायक भावना बोहरा ने गोद लेने की घोषणा की है. विधायक भावना बोहरा ने मृतकों के परिवारजनों से उनके घर जाकर मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया.
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विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह बहुत ही दुखद और पीड़ादायक घटना है. जब परिवार का एक सदस्य जाता है तो पीड़ा होती है और उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती. कुकदुर क्ष्रेत्र के आदिवासी भाई-बहनों ने हमेशा ही मुझे एक परिवार की तरह प्यार और सहयोग दिया है. आज यहां इस दुख की घड़ी में, मैं उन सभी परिवारजनों के साथ हूं, इसलिए फैसला लिया है कि इस हादसे में जिन बच्चों के सिर से परिजनों का साया उठ गया हैं, जिनके माता-पिता ने इस हादसे में अपनी जान गंवाई है उनके परिजन की भूमिका हम निभाएंगे.
भावना बोहरा ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले 19 लोगों के करीब 24 बेटा-बेटियों के आगे की शिक्षा, उनके रोजगार और शादी तक कि सारी जिम्मेदारी वे अपने भावना समाजसेवी संस्थान के जरिए उठाएंगी. पंडरिया मेरा परिवार है और जब परिवार पर आफत आती है तो उनके दुख में उनके साथ रहना मेरी जिम्मेदारी भी है और कर्तव्य भीय मैं उनके परिजनों की कमी तो पूरी नहीं कर सकती, लेकिन उनके सुरक्षित भविष्य के लिए प्रयास जरूर कर सकती हूं.
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