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बारिश में और भी खूबसूरत हो जाता है कवर्धा में टूरिज्म का ये ठिकाना, Photos

बारिश में और भी खूबसूरत हो जाता है कवर्धा में टूरिज्म का ये ठिकाना, देखें- दिलचस्प Photos

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छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के मैकल पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा रानीदहरा जल प्रपात की सुंदरता देखते ही बनती है. यहां की प्राकृतिक खुबसूरती व कलकल करती पानी का प्रवाह देखते ही बनती है. यहां साल भर पर्यटकों का आना जाना रहता है. किसी तरह की सुविधा भले ही यहां ना हो, जाने के लिए कच्चा रास्ता है. फिर भी लोग इस जगह पर सभी तरह की कठिनाई उठाकर पहुंचते हैं. यहां पहुंचने के बाद सभी तरह की परेशानी मानों छू मंतर हो जाती है.

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छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर बोड़ला विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम रानी दहरा में एक अद्भूत जलप्रपात है. इसे देखने के बाद पर्यटक काफी खुश नजर आते हैं, जो एक बार यहां आता है, वह बार बार आना चाहता है. साथ ही अपने परिवार, ईष्ट मित्रों को भी लेकर आते हैं. बारिश में यहां का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है. इसके कवर्धा के शान के रूप में भी देखा जाता है.
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रानी दहरा पहुंची पर्यटक वंदना चौबे, सुनील केशरवानी व अन्य कहते हैं कवर्धा जिले का यह एकमात्र जल प्रपात है, जिसे सहेजने की जरूरत है. पर्यटकों के लिहाज से बेहद खास जगह है. रानी दहरा जल प्रपात अपनी प्राकृतिक खुबसूरती के लिए जाना जाता है, लेकिन इसका पर्यटन क्षेत्र के रूप में जितना विकास होना चाहिए नहीं हो सका है. तीन किमी कच्चा रास्ता तय कर जाना होता है.
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रानी दहरा पहुंचने के लिए बारिश में काफी समस्या होती है. क्योंकि बारिश हो तो रपटा डूब जाता. फिर खुलने का घंटो इंतजार करना होता है. सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं है. लोग परिवार के साथ यहां पहुंचते है, जिनकी सुरक्षा के लिए न तो पुलिस है, न वन विभाग के लोग हैं. संकट में किसी से सहायता लेनी हो तो कोई नेटवर्क भी सही तरीके से नहीं रहता है. सुनील केशरवानी कहते हैं कि घना जंगल होने के चलते सामान्य लोग यहां नहीं आते हैं. केवल पर्यटक घूमने आते हैं.
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ग्राम पंचायत रानी दहरा गांव के बाद वन विभाग विभाग का एरिया शुरू होता है. वनक्षेत्र में ग्राम पंचायत काम नहीं करा पा रहे हैं, जिसके चलते गांव से जल प्रपात तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं बन पाया है रास्ते के नाम पर केवल उबड़-खाबड़ गिट्टी का पथरीला रास्ता है. बारिश होने पर मुरूम धूल जाता है, जो बचता है, वह कीचड़ में तब्दील हो जाता है. सरपंच श्याम सिंह का कहना है कि वन विभाग का एरिया होने के चलते ग्राम पंचायत के सरपंच कुछ भी विकास कार्य करा पाने में असमर्थता जता रहे हैं.
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रानी दहरा जलप्रपात जिले के प्रमुख पर्टयटन स्थलों में से एक है, जिसकी सुंदरता के चलते पर्यटक यहां खींचे चले आते हैं. जो पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण तो है ही. साथ ही एक धरोहर भी है, जिसके विकास को लेकर सकारात्मक सोच के साथ कार्य किए जाने की आवश्यकता है. ताकि इसकी प्राकृतिक सुंदरता को देखने दूर दूर से और ज्यादा संख्या में लोग आएं. जिला प्रशासन को इसका बेहतर प्रचार प्रसार करना होगा.
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