Advertisement
होमफोटोहरियाणाकुरुक्षेत्र
PHOTOS: सर्दियां गुजारने कुरुक्षेत्र के प्राचीन ब्रह्म सरोवर पहुंचे विदेशी परिंदे

PHOTOS: सर्दियां गुजारने कुरुक्षेत्र के प्राचीन ब्रह्म सरोवर पहुंचे विदेशी परिंदे

Last Updated:

प्रवासी पक्षी नवंबर से मार्च अंत तक यहां रहते हैं, फिर अपने देश वापस लौट जाते हैं.

1/6
कुरुक्षेत्र के थाना गांव में प्राचीन ब्रम्हसरोवर है. इस सरोवर में सदियों से प्रवासी पक्षी गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही पहुंच जाते हैं. इस साल भी इन परदेशी पक्षियों ने थाना गांव के ब्रह्म सरोवर में डेरा डाल दिया है. गांव वालों का कहना है कि 25 से 30 प्रजाति के सैकड़ों परिंदे यहां पहुंचते हैं. लेकिन चिंता की जो बात है कि लगातार इन परिदों की संख्या कम होती जा रही है. कारण प्रदूषण और धरती का बढ़ता तापमान है.
2/6
ये परिंदे साइबेरिया, यूरोप, लद्दाख, हिमालय और अंटार्कटिका से मीलों का सफर तय करते हुए हर साल यहां आते हैं. जानकर बताते है कि ये गंव उन पक्षियों के लिए मुफीद जगह है जो ठंडे प्रदेश से आते है. क्योंकि वहां बर्फीली ठंड हो जाती है इसलिए वो हरियाणा के इस इलाके में पहुंच जाते हैं.
3/6
ये परिंदे अपने देशों में पडऩे वाली बर्फीली ठंड से बचने के लिए यहां आते हैं. कई पक्षी तो ऐसे है जो कि 30 से 36 घंटे की लंबी उड़ान भरकर यहां आते हैं. बारहेडेड गीज ऐसा ही पक्षी है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
4/6
प्रवासी पक्षी नवंबर से मार्च अंत तक यहां रहते हैं, फिर अपने देश वापस लौट जाते हैं. ब्लैक रेड स्टार्ट, ब्ल्यू थ्रोट, ब्लैक नेक स्टॉर्क, कामन टील, होली स्टॉर्क, बिसलिंग टील्स, नोर्धन शोवेलर, रडी शेलडक, मार्श हैरियर, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, मार्श हैरियर और बारहैड गीज प्रमुख है.
5/6
डॉ चेतना शर्मा जोकि पेशे से पैथोलॉजिस्ट है लेकिन पक्षी प्रेमी हैं. वो कई सालों से इन पक्षियों को देख रही है. उनका कहना है कि थाना गंव का इस ब्रह्मसरोवर में पक्षियों को खाने के लिए मुफीद भोजन मौजूद रहता है.
6/6
यहां क्योंकि गांव वाले मछली पालन नहीं करते हैं इसलिए पक्षियों के लिए यहां भरपूर खाना मौजूद रहता है. इसे कम्युनिटी रिज़र्व बनाने की सरकार से मांग की गई थी जिसे सरकार ने मान लिया है.