आजमगढ़ के 5 प्रसिद्ध मंदिर, जिनका इतिहास और आस्था से है गहरा नाता
Last Updated:
उत्तर प्रदेश का आज़मगढ़ सिर्फ अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मौजूद प्राचीन और पौराणिक मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है. ऋषि-मुनियों की तपस्थली कहे जाने वाले इस जिले में भगवान शिव के प्राचीन मंदिरों से लेकर माता शीतला और पल्हनेश्वरी शक्तिपीठ तक कई धार्मिक स्थल हैं, जिनका इतिहास और आस्था से गहरा संबंध है. यहां भक्तों को देवताओं के अलग-अलग चमत्कारी स्वरूपों के दर्शन होते हैं, जो न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी आजमगढ़ को खास पहचान दिलाते हैं.
आजमगढ़ को ऋषियों की धरती के नाम से जाना जाता है. आजमगढ़ में कई महान ऋषियों की तपस्थली मौजूद है, जहां ऋषियों ने अपने तप और आध्यात्मिक शक्ति से इन जगहों को पवित्र बनाया इसके अलावा आजमगढ़ में कई ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर भी मौजूद है.
आजमगढ़ में ऋषि मुनियों के आश्रम से लेकर माता रानी के शक्तिपीठ और भैरव बाबा के अलौकिक स्वरूप में भगवान विराजमान है, महर्षि चंद्रमा ऋषि महर्षि दत्तात्रेय और महर्षि दुर्वासा ऋषि के आश्रम के साथ-साथ आजमगढ़ में भगवान शिव के भी बेहद प्राचीन मंदिर मौजूद है.
Advertisement
अगर आप भी आजमगढ़ में यहां के प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करना चाहते हैं तो आज हम आपको बताएंगे किन-किन जगहों पर स्थित है आजमगढ़ के ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर और धार्मिक स्थल.
Add News18 as
Preferred Source on Google
Preferred Source on Google
आजमगढ़ जिले में भी भगवान शिव का शिवलिंग पातालपुरी महाराज के रूप में विराजमान है. शहर से लगभग 3 किलोमीटर पश्चिम में स्थित भगवान भोलेनाथ का मंदिर जो बाबा भंवरनाथ के नाम से प्रसिद्ध है. वैसे तो यह मंदिर 1958 में बनकर तैयार हुआ था लेकिन इस मंदिर में विराजमान भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है.
जनपद मुख्यालय से तकरीबन 25 किलोमीटर की दूरी पर महराजगंज बाजार स्थित भैरव बाबा का अति प्राचीन और विशाल मंदिर विराजमान है .मान्यता है कि भगवान शिव के आदेश पर दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस करने के बाद काल भैरव दक्षिणमुखी स्वरूप में यहां विराजते हैं.
Advertisement
आजमगढ़ के चौक पर दक्षिणेश्वरी माता का मंदिर मौजूद है यह मंदिर दक्षिण मुखी देवी दुर्गा देवी का एशिया का दूसरा दक्षिण मुखी मंदिर है. यहां भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं. यह मंदिर नगर के मुख्य चौक पर स्थित है. मान्यता है कि यहां आने वाले भक्त कभी खाली हाथ लौट के वापस नहीं जाते.
आजमगढ़ के निजामाबाद में माता शीतला का एक बेहद पुराना और ऐतिहासिक मंदिर भी मौजूद है जो पौराणिक रूप से विशेष महत्व रखता है. यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है<br />मान्यताओं के अनुसार माता शीतला को स्वास्थ्य की देवी भी माना जाता है. यहां पर पूजा पाठ करने एवं हलवा पूड़ी का प्रसाद चढ़ाने से मांगी गई सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
पल्हनेश्वरी माता का पल्हना देवी मंदिर आजमगढ़ के प्राचीन मंदिरों में से एक है जो लगभग शहर मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर मेहनगर में स्थित है. यह मंदिर भी पल्हनेश्वरी माता के शक्तिपीठ के रूप में विराजमान है. हर साल नवरात्रि के समय में मंदिर में मेले का आयोजन होता है जिसमें लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा होती है.