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पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है, कोई बतलाओ...क्या आप जानते हैं गालिब का अर्थ

पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है, कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या...क्या आप जानते हैं गालिब का अर्थ

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Agency:Local18
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मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू शायरी की दुनिया के बेताज बादशाह थे. उर्दू साहित्य एक ऐसा नाम जिनके शायरी की दुनिया दीवानी है. उनकी लिखी शायरी आज भी उर्दू साहित्य की दुनिया में अहम स्थान रखती है. ग़ालिब ने अपनी कलम की दुनिया में अलग छाप छोड़ी है. आज ही के दिन आगरा में उनका जन्म हुआ था. यहां पढ़े उनके कुछ चुनिंदा शेर.

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मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर, 1797 को आगरा में हुआ था. उनका पूरा नाम मिर्जा असदुल्लाह बेग खान था. जिन्हें लोग गालिब के नाम से जानते थे.
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मिर्जा गालिब आगरा छोड़ शादी के बाद दिल्ली आ गए थे, पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में 'गालिब की हवेली' के नाम से उनका घर फेमस है.
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मिर्ज़ा ग़ालिब को उर्दू भाषा के साथ-साथ फारसी भाषा पर बहुत गहरी पकड़ थी. वह फारसी और उर्दू दोनों जुबान में शायर लिखते थे.
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मिर्ज़ा ग़ालिब ने 11 साल की उम्र से ही शायरी लिखना शुरू कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने खुद को ‘ग़ालिब’ नाम दिया. गालिब का मतलब विजयी या श्रेष्ठ होता है.
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मिर्ज़ा ग़ालिब ने बहुत कम समय में शायरी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली थी. वह अपनी फेमस शायरी की वजह से मुगल काल के आखिरी शासक बहादुर शाह जफर के दरबारी कवि भी रहे.
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गालिब को उर्दू भाषा का सबसे महान शायर माना जाता है. उर्दू के साथ फारसी शब्दों का हिंदी में जुड़ाव का श्रेय भी उन्हे ही दिया जाता है.
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मुगल काल के आखिरी बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र ने ग़ालिब को दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला की उपाधी दी थी.
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मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन पर आधारित कई फिल्में और टीवी सीरियल भी बन चुके हैं. जिन्हें लोगों ने काफी पसंद भी किया है.
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मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन पर आधारित कई फिल्में और टीवी सीरियल भी बन चुके हैं. जिन्हें लोगों ने काफी पसंद भी किया है.