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दीपावली पर श्रीमाधोपुर के मंदिरों में होती है विशेष पूजा

राजस्थान का एकमात्र मंदिर जहां लक्ष्मी-विष्णु संग विराजमान हैं, दीपावली पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

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Agency:Local18
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राजस्थान के श्रीमाधोपुर कस्बे के चौपड़ बाजार में स्थित भगवान श्रीसत्यनारायण और माता लक्ष्मी का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है. चतुर्भुज स्वरूप में विराजित भगवान विष्णु की यह प्रतिमा 50 कोस के दायरे में एकमात्र मानी जाती है. रामानंदी संप्रदाय से संबंधित इस मंदिर की सेवा-पूजा पहले खंडेला दरबार के राजवैद्य परिवार द्वारा की जाती थी, जो वर्तमान में महंत मधुसूदनदास द्वारा निभाई जा रही है.

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दिपावली पर घर-घर और दुकानों-प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. दीपावली के दिन लोग मां लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की भी पूजा करते हैं. मां लक्ष्मी का सात्विक और कल्याणकारी स्वरूप है महालक्ष्मी. चतुर्भुज मूर्ति भगवान विष्णु व महालक्ष्मी अभय वर देने वाले है. सीकर जिले के श्रीमाधोपुर कस्बे में भगवान विष्णु के स्वरूप का श्रीसत्यनारायण भगवान और मां लक्ष्मी का एक अनोखा चमत्कारी मंदिर मौजूद है, यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है.
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यह मंदिर श्रीमाधोपुर कस्बे के चौपड़ बाजार में स्थित है, श्री सत्यनारायण भगवान का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं में आस्था और श्रद्धा का केंद्र है. इस मंदिर में चतुर्भुज मूर्ति श्री विष्णु भगवान तथा महालक्ष्मी जी की मूर्ति प्रतिष्ठित है. चतुर्भुज मूर्ति के रूप में, आसपास 50 कोस में यह एकमात्र मंदिर है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण श्रीमाधोपुर की स्थापना के समय ज्येष्ठ शुक्ला एकादशी को हुआ था, यह मंदिर रामानंदी संप्रदाय का है.
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इस मंदिर की सेवा-पूजा खंडेला दरबार के राजवैद्य परिवार के पूर्वज एवं वंशज करते थे, वर्तमान में इस मंदिर की सेवा-पूजा महंत मधुसूदनदास कर रहे हैं. इस मंदिर में वर्ष भर के सभी धार्मिक उत्सव बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं, दीपावली त्योहार पर इस मंदिर की महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है. दीपावली के समय माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी विशेष पूजा-अर्चना होती है.
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यह राजस्थान के उन दो मंदिरों में से एक है, जहां भगवान श्री सत्यनारायण और माता लक्ष्मी दोनों की मूर्तियां एक साथ विराजित हैं. दीपावली के विशेष अवसर पर यहां विशेष आयोजन भी होता है. श्रीमाधोपुर कस्बे सहित दूर-दूर से लोग यहां आकर दीपावली की पूजा-अर्चना करते हैं, यहां माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त चढ़ावा भी चढ़ाते हैं.
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इस मंदिर को लेकर एक खास मान्यता भी है, भक्तों के अनुसार, दिवाली के मौके पर यहां मन्नत का धागा बांधने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. इसलिए दीपावली के त्योहार के समय यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है. इसके अलावा, यहां की एक और खास बात यह है कि भगवान सत्यनारायण और माता लक्ष्मी दोनों की प्रतिमाएं एक साथ विराजित होने के बावजूद, यहां विशेष पूजा पद्धति से दोनों की अलग-अलग पूजा होती है.
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माता लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण की आरती के समय दोनों की अलग-अलग आरती होती है. इस मंदिर का स्वरूप भी बहुत प्राचीन है. भक्त दूर-दूर से यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं, यहां मौजूद माता लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण दोनों की प्रतिमाएं अष्टधातु से बनी हुई हैं. दोनों प्रतिमाएं सैकड़ों साल पुरानी हैं, रोज़ाना यहां माता लक्ष्मी और भगवान सत्यनारायण का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है.
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