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क्या अर्धकुंभ 2027 में ऋषिकेश के इस घाट पर होगा स्नान? क्यों बढ़ रही है इसकी डिमांड?

क्या अर्धकुंभ 2027 में ऋषिकेश के इस घाट पर होगा स्नान? क्यों बढ़ रही है इसकी डिमांड?

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त्रिवेणी घाट का धार्मिक महत्व पहले से ही अत्यंत विशेष माना जाता है. यह स्थान गंगा आरती, स्नान और साधना के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.अर्धकुंभ जैसे विराट आयोजन से जुड़ने पर यह घाट अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है.

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महाकुंभ 2027 को लेकर देशभर में तैयारियों के बीच ऋषिकेश से जुड़ा एक बड़ा आध्यात्मिक सवाल चर्चा में है. क्या इस बार महाकुंभ की पवित्र स्नान परंपरा, ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट तक पहुंचेगी. हाल ही में ऋषिकेश स्थित मोदी योगा रिट्रीट में आयोजित वैश्विक ब्राह्मण सम्मेलन के बाद यह मांग और तेज हो गई है.
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वैश्विक ब्राह्मण सम्मेलन की अध्यक्षता राजाऋषि भूपेंद्र कुमार मोदी ने की. सम्मेलन में देश और विदेश से आए संत महात्मा, महामंडलेश्वर, योगाचार्य और विद्वान शामिल हुए. इस मंच से यह विचार सामने आया कि यदि अर्धकुंभ 2027 के दौरान ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर विशेष स्नान और आध्यात्मिक आयोजन होते हैं, तो यह ऐतिहासिक कदम होगा.
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राजाऋषि भूपेंद्र कुमार मोदी ने कहा कि सनातन धर्म अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है. योग, ध्यान और भारतीय जीवन दर्शन आज पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब विश्व तनाव और मानसिक अशांति से गुजर रहा है तब सनातन धर्म शांति और संतुलन का मार्ग दिखाता है. ऐसे में ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक केंद्र को अर्धकुंभ से जोड़ना वैश्विक संदेश देगा
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त्रिवेणी घाट का धार्मिक महत्व पहले से ही अत्यंत विशेष माना जाता है. यह स्थान गंगा आरती, स्नान और साधना के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.अर्धकुंभ जैसे विराट आयोजन से जुड़ने पर यह घाट अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है.
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सम्मेलन में यह भी बताया गया कि ब्राह्मण समाज ने सदियों से सनातन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखा है. वेद, उपनिषद और गीता का अध्ययन आज विदेशी विश्वविद्यालयों में भी हो रहा है. अर्धकुंभ का विस्तार ऋषिकेश तक होना सनातन संस्कृति के वैश्विक प्रचार को नई दिशा देगा. यही विचार इस मांग को धार्मिक के साथ सांस्कृतिक महत्व भी प्रदान करता है.
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यदि त्रिवेणी घाट पर अर्धकुंभ स्नान होता है तो इससे ऋषिकेश के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा. होटल, आश्रम, योग केंद्र और स्थानीय कारोबार को गति मिलेगी. साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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त्रिवेणी घाट को ऋषिकेश की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र माना जाता है. यह वही स्थल है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती के आध्यात्मिक संगम की मान्यता है. प्रतिदिन यहां होने वाली गंगा आरती और स्नान से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति मिलती है.
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