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सिर्फ एक मुट्ठी चावल और दुल्हन दे जाती है पूरा आशीर्वाद, वजह दिल छू लेगी

विदाई के वक्त दुल्हन क्यों फेंकती है अपने पीछे चावल, जानिए दिल छू लेने वाली वजह

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Agency:Local18
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भारतीय शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और मान्यताओं का संगम होती है. इसमें हर रस्म का अपना अलग महत्व और संदेश होता है. विदाई का पल सबसे भावुक होता है.

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भारतीय शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और मान्यताओं का संगम होती है. इसमें हर रस्म का अपना अलग महत्व और संदेश होता है. विदाई का पल सबसे भावुक होता है, जब दुल्हन अपने मायके से विदा होते हुए चावल अपने सिर के ऊपर से पीछे की ओर फेंकती है. यह परंपरा देखने में साधारण लगती है, लेकिन इसके पीछे परिवार की समृद्धि से जुड़ी गहरी भावनाएं छिपी होती हैं.
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विदाई के समय चावल फेंकना शुभता, बरकत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. दुल्हन अपने हाथों से चावल उठाकर सिर के ऊपर से पीछे फेंकती है, जिसका अर्थ है कि वह अपने परिवार के लिए सौभाग्य और खुशियों की कामना करती हुई आगे बढ़ रही है. इसे माता पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का अंतिम प्रतीक भी माना जाता है.
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हिंदू मान्यताओं के अनुसार बेटी को घर की लक्ष्मी का रूप माना जाता है. जब वह विवाह के बाद अपने नए जीवन की ओर कदम बढ़ाती है, तो वह चावल के माध्यम से अपने मायके को आशीर्वाद, समृद्धि और सुख शांति देता हुई विदा लेती है. यह रस्म दर्शाती है कि वह जाते जाते भी अपने परिवार की खुशहाली के लिए शुभ संकेत छोड़कर जा रही है.
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इस रस्म में दुल्हन बिना पीछे देखे पांच बार चावल फेंकती है. बिना पीछे देखना त्याग, विश्वास और नए जीवन में पूरी तरह आगे बढ़ने का प्रतीक है. वह अपने पुराने घर को सम्मान के साथ विदाई तो दे रही होती है, मगर अब उसका ध्यान पूरी तरह अपने नए जीवन को अपनाने पर होता है.
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चावल को समृद्धि, अनाज और जीवन का आधार माना गया है. इसलिए दुल्हन चावल फेंककर अपने मायके को आशीर्वाद और समृद्धि का प्रतीक देती है. इस रस्म के दौरान घर की महिलाएं अपने आंचल में चावल समेटती हैं, ताकि यह शुभ आशीष घर में सुरक्षित रहे और परिवार के पास हमेशा बरकत बनी रहे. इसे घर में एक पवित्र संकेत के रूप में संभालकर रखा जाता है.
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भावनात्मक रूप से यह पल माता पिता के लिए बेहद संवेदनशील होता है. बेटी का चावल फेंकना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि उसके बचपन, प्यार, संस्कार और साथ बिताए लम्हों की यादों का प्रतीक होता है. यह क्षण परिवार के रिश्तों, प्रेम और जुड़ाव को हमेशा के लिए एक मीठी याद में बदल देता है.
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विदाई के समय चावल फेंकने की रस्म केवल एक पारंपरिक कार्य नहीं, बल्कि आस्था, भावनाओं, प्रेम और समृद्धि से जुड़ा एक पवित्र आयोजन है. यह बेटी द्वारा अपने मायके को दिया गया आखिरी शुभ आशीर्वाद होता है. यही कारण है कि यह रस्म आज भी उतनी ही सम्मानपूर्वक निभाई जाती है, जितनी सदियों पहले निभाई जाती थी.
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