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रिश्ता पक्का करने की सबसे अलग पहाड़ी परंपरा… सब्जियों की डाली क्यों मानी जाती है शुभ?

न जेवर न पैसा.. यहां रिश्ता तय करने के लिए लड़के वाले लड़की के घर ले जाते हैं सब्जियों की टोकरी

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Agency:Local18
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पहाड़ों में जब किसी लड़की और लड़के का रिश्ता पक्का होता है तो दोनों परिवारों के बीच एक खास रस्म निभाई जाती है. इस रस्म में लड़के वाले लड़की के घर एक टोकरी में सब्जियाँ, फल और मिठाई लेकर जाते हैं. इसे शुभता और सम्मान की निशानी माना जाता है. यह परंपरा रिश्ते की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है

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पहाड़ों में जब किसी लड़की और लड़के का रिश्ता पक्का होता है तो दोनों परिवारों के बीच एक खास रस्म निभाई जाती है. इस रस्म में लड़के वाले लड़की के घर एक टोकरी में सब्जियाँ, फल और मिठाई लेकर जाते हैं. इसे शुभता और सम्मान की निशानी माना जाता है. यह परंपरा रिश्ते की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है और दोनों परिवारों को एक दूसरे से जोड़ती है.
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सब्जियों की टोकरी रखना पहाड़ी संस्कृति में बहुत पुरानी मान्यता है. यह टोकरी सिर्फ उपहार नहीं होती बल्कि समृद्धि, प्यार और स्वीकृति का संदेश भी देती है. माना जाता है कि खेत की उपज रिश्ते में खुशहाली लाती है. लड़के वाला परिवार यह टोकरी रखकर जताता है कि वे अब इस रिश्ते को पूरी तरह स्वीकार कर चुके हैं. यह एक सरल लेकिन दिल को छू लेने वाली परंपरा है.
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इस टोकरी में सब्जियों के साथ फल, गुड़, मिठाई और कुछ घर की खास चीजें भी रखी जाती हैं. कई परिवार खेत की पहली उपज भी इसमें रखते हैं. यह दर्शाता है कि लड़की वाले घर को सम्मान दिया जा रहा है. साथ ही माना जाता है कि यह सौगात नई शुरुआत के लिए शुभ होती है. हर सामान के पीछे एक भावनात्मक जुड़ाव और सांस्कृतिक महत्व जुड़ा होता है.
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पहाड़ों में इस रस्म को सिर्फ औपचारिकता नहीं माना जाता. यह दो परिवारों के बीच अपनापन बढ़ाने का तरीका है. जब लड़के वाले टोकरी लेकर लड़की के घर जाते हैं तो दोनों परिवार समय बिताते हैं और एक दूसरे को बेहतर समझते हैं. इससे रिश्ते और मजबूत बनते हैं. यह परंपरा सामूहिकता, प्यार और विश्वास को दर्शाती है. यह पहाड़ी समाज की खूबसूरत पहचान मानी जाती है.
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पहाड़ी गांवों में इस रस्म के कई नाम हैं. कहीं इसे डाली रखना कहा जाता है तो कहीं सौगात ले जाना बोला जाता है. कई जगह इसे थाली की रस्म भी कहते हैं. नाम चाहे जो हो, भावना एक ही रहती है. हर गांव में इस रस्म को अपने तरीके से निभाया जाता है. यही विविधता पहाड़ी संस्कृति को और भी खास बनाती है. लोग इसे बहुत सम्मान और खुशी के साथ निभाते हैं.
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पहाड़ों के बुजुर्ग इस रस्म को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं. उनके अनुसार सब्जियों की डाली रिश्ते की पहली निशानी होती है. पहले के समय में जब बाजार नहीं थे तो लोग अपने खेत की सब्जियाँ ही ले जाते थे. इससे दोनों परिवारों के बीच सादगी और अपनापन झलकता था. आज भी बुजुर्ग कहते हैं कि डाली ले जाने से रिश्ते में शुभ ऊर्जा आती है और परिवारों में खुशियां बढ़ती हैं.
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भले ही समय बदल गया है लेकिन यह परंपरा आज भी पहाड़ों में निभाई जाती है. अब टोकरी में मौसमी फल, मिठाई और गिफ्ट आइटम भी रखे जाते हैं. लेकिन इसका भाव वही रहता है. लोग इस रस्म को आधुनिकता के साथ जोड़कर निभाते हैं. यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का एक सुंदर तरीका भी बन गई है.
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