Lok sabha Election 2019: बिहार में इन वजहों से नहीं सुलझ रही महागठबंधन की 'गांठ'
कांग्रेस जहां 15 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं दिख रही है. जबकि क्षेत्रीय दल भी अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है. साफ है कि घटक दलों में सीटों को लेकर खींचतान जारी है.
बिहार में महागठबंधन में शामिल सभी दल बार-बार यही कह रहे हैं कि आने वाले कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा. लेकिन जिस तरह के आरजेडी 20 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं है वहीं कांग्रेस अब भी फ्रंटफुट पर खेलने की बात कह रही है. जाहिर है यह स्थिति बताती है कि गठबंधन में सीटों को लेकर जोर आजमाइश काफी चरम पर है, वहीं उलझन भी बरकार है. अहम यह है कि कांग्रेस और आरजेडी दोनों एक दूसरे पर दबाव बना रहे हैं.
कांग्रेस जहां 15 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं दिख रही है. जबकि क्षेत्रीय दल भी अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है.साफ है कि घटक दलों में सीटों को लेकर खींचतान जारी है. ऐसे में आगे की राह आसान अब भी नहीं दिख रही है.
आरजेडी का 20-20 फॉर्मूला
राष्ट्रीय जनता दल 20 सीटों से कम पर तैयार नहीं है. वह चाहती है कि बाकी 20 सीटों में सभी सहयोगी दल 'एडजस्ट' करें. लेकिन कांग्रेस को भी कम से कम 15 सीटें चाहिए. दोनों बड़े दल अपने-अपने दावों पर अड़े हैं. ऐसे में छोटे सहयोगी दल ऊहापोह में हैं. लगातार रांची और दिल्ली के दौरे से भी बात हल नहीं हो पा रहा है. लालू और राहुल गांधी की मुलाकात के बाद भी इस मसले का हल नहीं निकल सका है.
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17-11 पर नहीं बनी बात
दो दिन पहले ही ये सुर्खियां बनीं कि आरजेडी 17, कांग्रेस 11, आरएलएसपी 3, मांझी की पार्टी (हम) 2 और सीपीआई को एक सीट दी जाएगी. वहीं मुकेश सहनी पार्टी वीआईपी को 2 , समाजवादी पार्टी को एक और भाकपा माले को कम से कम एक सीट देने पर सहमति बन गई है. वहीं कयास लगाए जा रहे थे कि शरद यादव को आरजेडी अपने सिंबल पर चुनाव मैदान में उतारेगी, लेकिन ये चर्चा भी हवा हवाई ही निकली.
सीटों के चयन पर अटका मामला
इतना ही नहीं दरभंगा, मधेपुरा और मुंगेर की लोकसभा सीटों पर भी जिच बरकरार है. तीनों को कांग्रेस छोडने के पक्ष में नहीं है और आरजेडी देने के लिए तैयार नहीं है. दोनों ही दलों ने इसे नाक का सवाल बना लिया है. सूत्रों के अनुसार तेजस्वी तो पहले 17 सीटों पर मान गए थे, लेकिन लालू यादव ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और आरजेडी के लिए कम से कम 20 सीटें तय कर रखी हैं.
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अकेले चुनाव लड़ेंगे वामदल !
वामदलों की नाराजगी भी खुलकर सामने आ रही है. बताया जा रहा है किमहागठबंधन से वामपंथी दलों को एकमात्र आरा लोकसभा सीट ऑफर किया गया, लेकिन वामपंथी दलों ने इसे खारिज कर दिया. सूत्रों के अनुसार वाम दलों ने बेगूसराय से कन्हैया कुमार, मधुबनी से रामनरेश पाण्डेय, खगडिया से सत्य नारायण सिंह, मोतिहारी से शालिनी, गया से जानकी पासवान और बांका से संजय कुमार सिंह की उम्मीदवार तय कर ली है. वहीं नवादा भी उनकी नजर में है.
दो खेमों में बंटा महागठबंधन
इस बीच खबर है कि लालू के फॉर्मूले को कांग्रेस ने खारिज कर दिया है. पार्टी ने 15 सीटों की सूची थमा दी है और वह 13 से कम सीटों पर मानने को राजी नहीं है. ऐसे में छोटे घटक दल मोहरा बने हुए हैं पूरा गठबंधन दो खेमे में बंट गया है. मुकेश सहनी आरजेडी के साथ है तो कांग्रेस के साथ आरएलएसपी है. वामदल भी कांग्रेस के खेमे में अधिक सहज हैं. जबकि शरद यादव आरजेडी के साथ खड़े दिख रहे हैं. मांझी की पार्टी हम को अभी किसी ओर से अधिक भाव नहीं मिलता दिख रहा है.
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बहरहाल आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सीटों के तालमेल और आखिरी दौर की बातचीत के लिए कांग्रेस को तीन-चार दिनों का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस हवा में दावा न करे. क्षेत्रीय दलों का सम्मान करते हुए क्षमता के हिसाब से बात करे.
इस बीच बुधवार को महागठबंधन दलों की दिल्ली में बड़ी बैठक होने वाली है. बताया जा रहा है कि इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव भी शामिल रहेंगे. जाहिर है देखना दिलचस्प होगा कि सीट शेयरिंग पर आखिरी फॉर्मूला क्या निकलता है और, क्या सभी दलों को यह स्वीकार्य होगा ?
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