दिन के इस समय कोई बुक नहीं कर पाता ट्रेन टिकट, डेली होती है ऐसा, क्या है इसकी वजह?
क्या आप जानते हैं कि हर दिन कुछ देर के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग बंद हो जाती है. ऐसा टिकट बुकिंग सिस्टम के सर्वर्स की मेंटेनेंस के लिए किया जाता है ताकि वह क्रैश न करें.
नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि चौबीसों घंटे ट्रेन की टिकट बुक नहीं की जा सकती है. दिन में बहुत थोड़े समय के लिए ऐसा पल भी आता है जब सारे सर्वर बंद हो जाते हैं और टिकट बुकिंग पर विराम लग जाता है. जैसे ही ये समय बीतता है टिकट एक बार फिर से बुक की जा सकती है. ऐसा क्यों होता है इसके पीछे की वजह बहुत दिलचस्प है. अगर ऐसा न हो तो संभव है कि पूरा टिकट बुकिंग सिस्टम ही ठप बैठ जाए.
आज हम आपको बताते हैं कि दिन के किस समय टिकट बुकिंग बंद कर दी जाती है. हर रात 11:45 बजे से 12:30 बजे तक यानी कुल 45 मिनट के लिए पूरे भारत में ऑनलाइन टिकट बुकिंग रोक दी जाती है. इस दौरान न तो नया टिकट बुक होता है, न कैंसिलेशन होता है और न ही सीटें अलॉट की जाती हैं. इसका मतलब यह है कि IRCTC, PRS सिस्टम और रेलवे के बैकएंड सर्वर इस समय पूरी तरह ऑफलाइन मोड में चले जाते हैं. जैसे ही 12:30 बजे का समय पूरा होता है, टिकटिंग व्यवस्था फिर से चालू हो जाती है और आप अगली सुबह से हर तरह की बुकिंग कर सकते हैं.
क्यों लगता है ब्रेक
अब सवाल यह है कि आखिर रेलवे को हर दिन यह ब्रेक क्यों लेना पड़ता है. दरअसल भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े टिकटिंग नेटवर्क में शामिल है. रोजाना लगभग 20 लाख से ज्यादा टिकटें केवल ऑनलाइन बुक होती हैं और PRS सर्वर पर करोड़ों क्वेरी दर्ज होती हैं. इतने भारी लोड के साथ सिस्टम को रोज एक बार रीफ्रेश और सिंक किया जाता है. इस ब्रेक में सर्वर अपनी मेमोरी क्लियर करते हैं, अगले दिन की बुकिंग के लिए सीट मैट्रिक्स रीसेट किया जाता है, टिकट के स्टेटस अपडेट होते हैं और वेटिंग लिस्ट तथा उपलब्धता का पूरा डेटा दोबारा व्यवस्थित किया जाता है.
इसी दौरान अगले दिन खुलने वाली ट्रेनों की नई सीटें सिस्टम में लोड की जाती हैं. उदाहरण के लिए जो ट्रेनें 120 दिन बाद खुलती हैं, उनकी बुकिंग इसी रात सिस्टम में जोड़ी जाती है. यही कारण है कि 12:30 बजे के बाद अक्सर कई लोकप्रिय ट्रेनों में अचानक वेटिंग या उपलब्धता का पूरा डेटा बदल जाता है. इसके अलावा सुरक्षा कारणों से भी रेलवे इस डाउनटाइम को जरूरी मानता है क्योंकि लाइव बुकिंग चलने के दौरान सिस्टम अपडेट करना जोखिम भरा होता.
साइलेंट पीरियड
रेलवे के मुताबिक यह 45 मिनट का “साइलेंट पीरियड” पूरे नेटवर्क को स्थिर बनाए रखता है. लाखों लोग एक साथ टिकट बुक करते हैं, टाटकल बुकिंग जैसे हाई ट्रैफिक विंडो रोज खुलती हैं और PRS सर्वर लगातार एक्सेस होते रहते हैं. ऐसे में सिस्टम को बिना रोककर चलाना असंभव है. दुनिया के लगभग सभी बड़े टिकटिंग और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क अपने सर्वर को रोजाना या नियमित अंतराल में रीस्टार्ट करते हैं ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या डाटा मिसमैच न हो. इसलिए याद रखिए, रात 11:45 से 12:30 बजे तक टिकट बुकिंग रुकना किसी दिक्कत की वजह से नहीं बल्कि इस बड़े और जटिल सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी प्रक्रिया है. जैसे ही यह समय बीतता है, टिकट बुकिंग फिर से सामान्य हो जाती है और पूरा नेटवर्क नई ऊर्जा के साथ सुबह से काम करने लगता है.