चंद्रयान-2 प्रॉजेक्ट में हुई देरी, ISRO ने बताई ये वजह
चंद्रयान-2 को अप्रैल में अंतरिक्ष में भेजने की योजना थी.किन नई जानकारी ये है कि चंद्रयान-2 को अक्टूबर में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
चंद्रयान-2 को अप्रैल में अंतरिक्ष में भेजने की योजना थी. नई जानकारी ये है कि चंद्रयान-2 को अक्टूबर में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम का मानना है कि चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेजे जाने से पहले कुछ और टेस्ट किये जाने ज़रूरी हैं. चंद्रयान-2 पूरी तरह से भारत में तैयार किया गया है, जिसे भारी भरकम GSLV के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजे जाने की योजना है.
इसरो के लिए चंद्रयान-2 इसलिए भी अहम है क्योंकि पहली बार इसरो चंद्रमा पर किसी रोवर को उतारने वाला है. चंद्रमा धरती से क़रीब 3 लाख 82 हज़ार किलोमीटर दूर है, और चंद्रयान-2 को धरती से चंद्रमा तक पहुँचने में क़रीब 2 महीने का वक़्त लगेगा. चंद्रयान-2 के तीन हिस्से होंगे, ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर
चंद्रमा के 100 किलोमीटर के फासले तक पहुँचने के बाद ऑर्बिटर से लैंडर और रोवर अलग हो जाएंगे. जबकि ऑर्बिटर चंद्रमा के चक्कर लगाता रहेगा. फिर ठीक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर, लैंडर और रोवर चंद्रमा की सतह के पास पहुँचेंगे, और लैंडर से अलग होकर रोवर चंद्रमा पर चलना शुरू कर देगा.
रोवर एक 6 पहिये की गाड़ी होगी, जिसमें हाई क्वालिटी कैमरे लगे होंगे. इन कैमरों से रोवर लगातार इसरो तक चंद्रमा की सतह की तस्वीरें पहुँचाता रहेगा. रोवर चंद्रमा की सतह पर क़रीब 200 किलोमीटर की दूरी तय करेगा।
