चंद्रयान-2: जानिए भारत के मिशन चांद की A टू Z बातें
अपने सबसे चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार होकर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रयान -2 मिशन को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है.
अपने सबसे चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार होकर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रयान -2 मिशन को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. इसरो ने चांद पर झंडे गाड़ने की ठान ली है. चंद्रयान -2 अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण मिशन है क्योंकि इसरो पहली बार चंद्रमा के लिए ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर ले जाएगा. इसरो 3290 किलो का स्पेसक्राफ्ट, ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर अप्रैल के महीने में चांद पर उतारने जा रहा है. रोवर की ख़ास बात यह है कि रोवर चांद से हर 15 मिनट में तस्वीरें और सूचनाएं भेजेगा.
चंद्रमा पर पहुंचने के बाद, लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के निकट आराम से लैंडिंग करेगा. अप्रैल में श्रीहरिकोटा छोड़ा जानेवाला स्पेसक्राफ्ट चांद की जमीन को छूने में लगभग 2 महीने का समय लगा देगा. चांद पृथ्वी से 382000 किलोमीटर की दूरी पर है.
लैंडर के भीतर सेट किए गए 6-चक्र वाले रोवर अलग हो जाएंगे और चांद पर रोवर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह चंद्रमा की सतह पर 14 दिनों तक खर्च करने की शक्ति रखेगा और 150-200 मीटर तक चलेगा. 14 दिन बाद रोवर स्लीप मोड में चला जाएगा और सूरज की किरणें पड़ने पर ही चार्ज हो पाएगा. रोवर के अलावा ऑर्बिटर भी चांद की तस्वीरें ले सकेगा.
चांद पर जाने के सभी उपकरण, स्पेसक्राफ्ट, ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर तैयार हैं पर उन पर परीक्षण चल रहा है. परीक्षण के बाद चांद पर भेजने की तारीख तय की जाएगी. तारीख इस बात से भी तय होगी कि चांद पृथ्वी के अनुसार किस दिशा में है.
