सड़क पर जरा संभलकर! हर घंटे 55 हादसे, सबसे ज्यादा शिकार युवा, रिपोर्ट पढ़कर चौंक जाएंगे आप
Road Accidents Report: भारत में 2023 में हर घंटे 55 सड़क हादसे और 20 मौतें हुईं. रिपोर्ट बताती है कि सबसे ज्यादा शिकार युवा बने. तेज रफ्तार सबसे बड़ा कारण है. दोपहिया वाहन सबसे खतरनाक साबित हुए.
नई दिल्ली: देश की सड़कों पर हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की नई रिपोर्ट ‘भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2023’ ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं. इसमें बताया गया कि बीते साल यानी 2023 में सड़क हादसों की संख्या 4.2% बढ़कर 4,80,583 हो गई. इन हादसों में हर घंटे 55 दुर्घटनाएं और 20 मौतें दर्ज हुईं.
रिपोर्ट ने एक बार फिर दिखाया कि सड़क पर सबसे ज्यादा खतरे में युवा पीढ़ी है. कुल मौतों में से 66.4% 18-45 साल के युवाओं की रही. वहीं, 18-60 वर्ष के कामकाजी लोगों की हिस्सेदारी 83.4% तक पहुंच गई. यानी जिन लोगों पर घर और समाज की जिम्मेदारी होती है, वही सड़क पर सबसे ज्यादा हादसों का शिकार हो रहे हैं.
कहां हुए सबसे ज्यादा हादसे?
2023 में कुल हादसों में से-
- 31.2% (1,50,177) राष्ट्रीय राजमार्गों पर.
- 22% (1,05,622) राज्य राजमार्गों पर.
- 46.8% (2,24,744) अन्य सड़कों पर हुए.
वहीं, 1,72,890 मौतों में से-
- 36.5% (63,112) राष्ट्रीय राजमार्गों पर.
- 22.8% (39,439) राज्य राजमार्गों पर.
- 40.7% (70,339) अन्य सड़कों पर हुईं.
राज्यवार देखें तो तमिलनाडु में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे ज्यादा हादसे दर्ज हुए, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें हुईं.
तेज रफ्तार सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट में कहा गया कि सड़क हादसों के पीछे कई कारण हैं. मानवीय भूल, सड़क की हालत और वाहन की तकनीकी खराबी. लेकिन सबसे बड़ा कारण है तेज रफ्तार. 2023 में हुई कुल मौतों में से 68.1% मौतें ओवरस्पीडिंग की वजह से हुईं. यह आंकड़ा बताता है कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कितनी घातक साबित हो रही है.
दोपहिया वाहन सबसे खतरनाक
वाहन श्रेणी के हिसाब से देखें तो लगातार तीसरे साल दोपहिया वाहन सबसे ज्यादा हादसों और मौतों में शामिल रहे. रिपोर्ट के अनुसार बाइक और स्कूटर की हिस्सेदारी सबसे ऊपर रही. जबकि कार, जीप और टैक्सी जैसे हल्के वाहन दूसरे नंबर पर रहे.
रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि भारत में सड़क सुरक्षा की चुनौती और भी गंभीर हो चुकी है. हर घंटे 20 जानें गंवाना केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए दर्दनाक हकीकत है. यदि सड़क सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया और लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो आने वाले सालों में यह संकट और बड़ा हो सकता है.