उत्तराखंड का 'ट्रेक ऑफ द ईयर' सिनला पास, पंचाचूली से सीधे आदि कैलाश
यह ट्रेक 37 किलोमीटर का है, जो दारमा घाटी के बिदांग गांव से शुरू होता है और कठिन चढ़ाई चढ़ने के बाद 5600 मीटर की ऊंचाई को पार करने के बाद प्रसिद्ध आदि कैलाश पर्वत पहुंचा जाता है, जो व्यास वैली में है. इस ट्रेक में दिखने वाले नजारे काफी अद्भुत हैं.
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-चीन सीमा पर स्थित सिनला पास में अब पर्यटक आसानी से ट्रेक कर सकते हैं. दो सितंबर से देशभर के पर्यटकों के लिए 18 हजार फीट की ऊंचाई पर ट्रेकिंग के द्वार खोले जाएंगे. पर्यटन विभाग ने साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस बार इसे ट्रेक ऑफ द ईयर भी घोषित किया है. सिनला पास 5600 मीटर की ऊंचाई पर है, जो यहां दारमा घाटी को व्यास घाटी से जोड़ता है. पिथौरागढ़ में स्थित ये दोनों घाटियां अपने ग्लेशियरों और बुग्यालों के लिए जानी जाती हैं. अन्य हिमालयी राज्यों में इस उंचाई पर ट्रेकिंग की जाती है लेकिन अब उत्तराखंड में सिनला पास भी ट्रेकिंग के शौकीनों की लिस्ट में जुड़ने जा रहा है.
यह ट्रेक 37 किलोमीटर का है, जो दारमा घाटी के बिदांग गांव से शुरू होता है और कठिन चढ़ाई चढ़ने के बाद 5600 मीटर की ऊंचाई को पार करने के बाद प्रसिद्ध आदि कैलाश पर्वत पहुंचा जाता है, जो व्यास वैली में है. इस ट्रेक में दिखने वाले नजारे काफी अद्भुत हैं. इसी वजह से इसे ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किया है, जिसे प्रमोट करने के लिए पर्यटन विभाग यहां ट्रेकिंग के लिए पर्यटकों को लाने वाले टूर ऑपरेटरों को प्रोत्साहन भी दे रहा है.
टूर ऑपरेटरों को 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि
पिथौरागढ़ के पर्यटन अधिकारी कीर्ति आर्या ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सिनला पास ट्रेक एक काफी पुराना और स्थानीय लोगों द्वारा दारमा वैली से आदि कैलाश और ओम पर्वत जाने के लिए बनाया गया प्राचीन पैदल मार्ग है. अपनी खूबसूरत वादियों के लिए इसे ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किया गया है, जिससे इस ट्रेक को प्रमोट किया जा सके. उन्होंने कहा कि ट्रेकिंग का शुभारंभ दो सितंबर को होगा. यहां ट्रेकिंग कराने वाले टूर ऑपरेटरों को 2000 रुपये प्रति ट्रेकर की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी. इसके लिए सिनला पास ट्रेक के लिए कम से कम 10 लोग और ज्यादा से ज्यादा 20 लोग एक ग्रुप में होने की शर्त रखी गई है.
