किफायती इंश्योरेंस के साथ जानिए 7 फायदें, जो आपको पुरानी कार खरीदने पर मिलेंगे

पुरानी कार खरीदनें पर मिलेंगे ये फायदें.

पुरानी कार खरीदनें पर मिलेंगे ये फायदें.

सेकंड हैंड कार बेचने वाली कंपनियां ग्राहक को एक साल की अतिरिक्त वारंटी भी देती है. ऐसे में इसे एक फायदे के तौर पर देखा जा सकता है. मारुति सुजुकी की ट्रू वैल्यु और महिंद्रा की फर्स्ट च्वाइस जैसी कंपनियां इस बिज़नेस में शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2021, 5:32 AM IST
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नई दिल्ली. भारतीय ग्राहकों में नई और सेकंड हैंड कार को खरीदने का चलन काफी समय से है. जो ग्राहक अपने बजट के अनुसार नई कार नहीं ले सकते वो पुरानी सेकंड हैंड कार ले लेते हैं. अक्सर ग्राहक सेकंड हैंड कार खरीदते वक़्त हिचकिचाते हैं और सही से कार का चुनाव नहीं कर पाते. आपको बता दें कि अगर आप समझदारी और परख के साथ सेकंड हैंड कार का चुनाव करते हैं तो इसमें आपके पैसे की बचत के साथ साथ आपको कार की resale वैल्यू भी अच्छी मिलती है. आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में.

कीमत - सेकंड हैंड कार लेने पर आपको पैसे का फायदा तो होता है पर ये डील आपको समझदारी के साथ करनी होती है. आपको धैर्य की जरूरत होती है एक अच्छी डील आने के लिए. कई नई कंपनियों ने ऐसे स्टोर्स तैयार किये हैं जहाँ से ग्राहक सेकंड हैंड कार खरीद सकता है. ट्रू वैल्यू और कार्स 24 जैसी कंपनियां इसमें शामिल हैं.

resale वैल्यू - अक्सर ये  देखा गया है की किसी नई कार की कीमत बहुत जल्दी ही कम होने लगी है, जो कई बार 60 प्रतिशत से भी कम हो जाती है. जबकि सेकंड हैंड कारों में ऐसा देखने को नहीं मिलता. सेकंड हैंड कार यूज़र कार को अच्छे दाम में दुबारा बेच सकते हैं. सेकंड हैंड कार की कीमत समय के अनुसार बनी रहती है.

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कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं - सेकंड हैंड कार लेते वक़्त ग्राहक को किसी तरह का अत्रिरिक्त शुल्क नहीं देना पडता, सिर्फ ग्राहक को कार के पैसे देने होते हैं. जबकि नई कार लेते वक़्त ग्राहक को रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स और अन्य आरटीओ संबंधी खर्च उठाने पड़ते हैं.

एक्सटेंडेड वारंटी - आज कल ज्यादातर कार कंपनियां 5 से 7 साल तक की एक्सटेंडेड वारंटी दे रही है. अगर आपको कोई ऐसी कार की डील मिल जाती है तो आप बिना किसी अतिरिक्त खर्च के इसका लाभ उठा सकते हैं.  

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वारंटी - सेकंड हैंड कार बेचने वाली कंपनियां ग्राहक को एक साल की अतिरिक्त वारंटी भी देती है. ऐसे में इसे एक फायदे के तौर पर देखा जा सकता है. मारुति सुजुकी की ट्रू वैल्यु और महिंद्रा की फर्स्ट च्वाइस जैसी कंपनियां इस बिज़नेस में शामिल हैं.

कम इंश्योरेंस - कार के इंश्योरेंस का प्रीमियम वाहन की उम्र और मार्केट वैल्यू के अनुसार ही तय किया जाता है. ऐसे में सेकंड हैंड कार का  इंश्योरेंस प्रीमियम भी कम देना होता है.

आसान मासिक किस्त - नई कार लेते समय ग्राहक को अधिक मासिक किश्त के साथ और ज्यादा डाउन पेमेंट करना पड़ता है. जबकि सेकंड हैंड कार लेते समय फाइनेंस अमाउंट कम होने से मासिक किस्त भी कम हो जाती है.
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